नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी भोटे कोशी नदी की बाढ़ के बाद पांचवें दिन भी राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 734 के पार पहुंच गई है, जबकि करीब 2500 से 3000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और खोज अभियान के लिए सरकार ने 18 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है।
चितवन में सबसे ज्यादा मौतें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक सबसे ज्यादा 246 शव चितवन से बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 165, नवलपरासी वेस्ट में 63, गोरखा में 57, नुवाकोट में 51, धाडिंग में 45, तनहुन में 35 और रसुवा में 13 शव मिले हैं। गोरखा में बरामद मानव शरीर के कई अंगों को भी मृतकों के आंकड़ों में शामिल किया गया है।
हजारों लोगों का अब तक पता नहीं
बाढ़ और उसके बाद आई तबाही में हजारों लोग अपने परिवारों से बिछड़ गए हैं। सरकारी सूची में करीब 2500 से 3000 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें आम नागरिकों के साथ हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी, विदेशी नागरिक, सुरक्षा बलों और सरकारी विभागों के कर्मचारी भी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि अकेले हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाओं से जुड़े 933 लोग लापता हैं। वहीं, करीब 589 विदेशी नागरिकों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है। इससे लापता लोगों की तलाश और उनकी पहचान प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत ने भेजी चौथी राहत उड़ान
नेपाल में जारी संकट के बीच भारत ने रविवार को अपनी चौथी राहत उड़ान भेजी। इस उड़ान के जरिए करीब 11 टन जरूरी राहत सामग्री के साथ तकनीकी और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची है।
विशेषज्ञों की टीम डीएनए जांच के जरिए मृतकों की पहचान करने में नेपाल की मदद करेगी। इसके अलावा दुर्गम और मुश्किल इलाकों में चल रहे खोज एवं बचाव अभियान में भी तकनीकी सहायता दी जाएगी।
फिर बढ़ा भोटे कोशी नदी का जलस्तर
इस बीच भोटे कोशी नदी का जलस्तर और बहाव दोबारा बढ़ने से खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। नेपाल की आपदा प्राधिकरण ने निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी के आसपास जाने से बचने की अपील की गई है।
राहत शिविरों में रह रहे हजारों लोग अभी भी अपने लापता परिजनों की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रशासन और सुरक्षा बलों के सामने एक ओर जहां प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर लापता लोगों की तलाश और मृतकों की पहचान का काम भी लगातार जारी है।
