Monday, September 14

रांची: सरकारी दफ्तरों की भाषा अगर आम लोगों की समझ में आसानी से आए और प्रक्रियाएं सरल हों, तो शासन व्यवस्था ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बन सकती है। हिंदी दिवस के मौके पर रांची स्थित एटीआई सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो ने इसी बात पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सुशासन की पहचान केवल योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि उन्हें आम लोगों तक आसानी से पहुंचाने से होती है। इसके लिए सरकारी कामकाज में अनावश्यक कठिन शब्दों और जटिल प्रक्रियाओं को कम करने की जरूरत है।

सरल भाषा से बढ़ेगा जनता का भरोसा

सचिव ने कहा कि जब सरकारी आदेश, योजनाओं और प्रक्रियाओं की जानकारी लोगों को उनकी समझ की भाषा में मिलेगी, तो वे सरकारी सेवाओं का बेहतर तरीके से लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से जनहित को प्राथमिकता देते हुए सरल भाषा और स्पष्ट कार्यशैली अपनाने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन सेवाएं, समयबद्ध निस्तारण और शिकायतों की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं से सरकारी कामकाज को ज्यादा जवाबदेह बनाने में मदद मिल रही है।

हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, जनसरोकार का माध्यम

कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में व्याख्यान के साथ काव्यपाठ भी हुआ। हिंदी के कई साहित्यकारों और विद्वानों ने अपनी रचनाओं के जरिए हिंदी की व्यापकता, संवेदनशीलता और सामाजिक जुड़ाव को सामने रखा।

वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि जनसरोकार और सांस्कृतिक एकता से जुड़ी भाषा है। उन्होंने बताया कि देश की अलग-अलग लोकभाषाओं और बोलियों से जुड़कर हिंदी लगातार समृद्ध हुई है। यही विविधता हिंदी को व्यापक स्तर पर लोगों से जोड़ती है।

कविता के जरिए सामाजिक सरोकारों की बात

काव्यपाठ के दौरान सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन विषयों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत की गईं। वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी यह देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषाओं में शामिल है।

कार्यक्रम में हिंदी के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि अलग-अलग भाषाओं के शब्दों को अपनाते हुए हिंदी लगातार विकसित हो रही है। ऐसे में इसे केवल विरासत की भाषा के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की भाषा के तौर पर आगे बढ़ाने की जरूरत है।

कई साहित्यकार और अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में डॉ. जिंदर सिंह मुंडा, अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय; डॉ. केदार सिंह, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, विनोबा भावे विश्वविद्यालय; प्रख्यात कवयित्री एवं लेखिका डॉ. वंदना टेटे; डॉ. सावित्री बड़ाईक, सहायक प्राध्यापक, एसएस मेमोरियल महाविद्यालय; डॉ. कुमारी उर्वशी समेत कई हिंदी विद्वान मौजूद रहे।

कार्यक्रम का स्वागत संबोधन उप सचिव संजय रजक ने किया। कार्मिक विभाग से संयुक्त निदेशक आसिफ हसन और इश्तियाक अहमद तथा एटीआई से श्रीमती शालिनी खलखो और अपर निदेशक श्रीमती सीमा सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

समारोह का समापन हिंदी के प्रचार-प्रसार और उसके संवर्धन के संकल्प के साथ हुआ।

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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