नेपाल से अचानक आए सैलाब के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में पैदा हुआ बाढ़ का खतरा फिलहाल कम हो गया है। गंडक यानी नारायणी नदी का जलस्तर अब तेजी से नीचे आने लगा है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर पानी का स्तर घटकर करीब 81 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है। वहीं, त्रिशूली नदी का पानी नारायणी के रास्ते आगे निकल चुका है, जिससे निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर बाढ़ की आशंका फिलहाल टल गई है।
नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने बढ़ाई थी चिंता
दरअसल, नेपाल और तिब्बत सीमा से लगे इलाके में अचानक आई प्राकृतिक आपदा के बाद हालात चिंताजनक हो गए थे। चीन के पोइकू क्षेत्र से अचानक आए जल-प्रलय ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई।
बताया गया कि तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप के झटकों के कारण पहाड़ और बर्फ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में जा गिरा। इसके साथ भारी मात्रा में मलबा भी नदी में पहुंच गया।
नदी का रास्ता बंद हुआ, फिर अचानक टूटा प्राकृतिक बांध
बर्फ और मलबे के नदी में गिरने से पानी का बहाव बाधित हो गया और वहां एक तरह का प्राकृतिक बांध बन गया। कुछ समय बाद जब पानी का दबाव बढ़ा तो यह अस्थायी प्राकृतिक बांध अचानक टूट गया।
इसके बाद ऊपरी इलाकों में तेज फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हो गई। अचानक बढ़े पानी और तेज बहाव ने नेपाल के कई इलाकों में चिंता बढ़ा दी थी।
हालांकि, निचले इलाकों में उस दौरान बारिश नहीं होने और पानी के तेजी से आगे निकल जाने से स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं हुई।
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर की बाढ़ में 160 मौतें, 1000 से ज्यादा लोग लापता
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में कुल 160 लोगों की मौत हुई है, जिनमें नेपाल में 157 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई है। वहीं, 1,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के तेज बहाव में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी तबाह हो गई हैं।
बिहार में भी जारी किया गया था अलर्ट
नेपाल की स्थिति को देखते हुए बिहार में भी प्रशासन को अलर्ट किया गया था। पश्चिमी चंपारण समेत गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में निगरानी बढ़ा दी गई थी। तटबंधों पर नजर रखने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई।
आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए थे।
81 हजार क्यूसेक तक पहुंचा जलस्तर, फिलहाल राहत
अब गंडक नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर पानी का स्तर करीब 81 हजार क्यूसेक तक पहुंचने और त्रिशूली का पानी नारायणी के रास्ते आगे निकल जाने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में मंडरा रहा तत्काल बाढ़ का खतरा काफी कम हो गया है।
हालांकि प्रशासन की निगरानी अभी भी जारी है। नदी के जलस्तर में बदलाव और नेपाल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि परिस्थितियों में दोबारा बदलाव होने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।


