झारखंड के गोड्डा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है । BJP के पूर्व विधायक अंमित मंडल पर धांधली के गंभीर आरोप लगे हैं । विधायक पर आरोप है कि गोड्डा जिला में SIR के दौरान फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं के नाम जबरन और गलत तरीके से हटाने की कोशिश कर रहे हैं । यह खुलासा एक निजी बेवसाइट ने किया है। पड़ताल में खुलासा हुआ है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान कई बूथों पर फॉर्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई। इनमें अधिकांश नाम अल्पसंख्यक यानी मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं के बताए जा रहे हैं, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई। मामला गोड्डा के बसंतराय प्रखंड के महेशटिकरी, पचुआ किता, लोचनी और बघाकोल बूथों से जुड़ा है, जहां बूथ लेवल अधिकारियों ने कई फॉर्मों को फर्जी और नियमों के विपरीत बताते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपनी पार्टी के बूथ लेवल एजेंटों के खिलाफ दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है। फिलहाल यह मामला मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक पहुंच चुका है और प्रशासन ने हर आपत्ति की मौके पर जांच करने का भरोसा दिलाया है।
SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आया मामला
झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई थी, जिसके तहत 5 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की गई। इसमें करीब 16.48% यानी लगभग 43 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे। फिलहाल दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है, जो 4 सितंबर को समाप्त होगी। इसी दौरान गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड के कुछ गांवों में एक पैटर्न सामने आया, जहां भाजपा के बूथ लेवल एजेंट (BLA) फॉर्म-7 के बंडल लेकर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के पास पहुंचे और मतदाता सूची से नामों को हटाने की मांग की।
महेशटिकरी और पचुआ किता में मिली शिकायतें
महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर 9 की BLO अनीसा बानो के मुताबिक, एक BLA ने पहले 25 फॉर्म जमा किए, जिनमें सभी मुस्लिम मतदाताओं के नाम थे। बाद में BLO ने अनीसा बानो को बताया कि ये फॉर्म फर्जी थे। वहीं पचुआ किता में एक बीजेपी का BLA करीब 75 फॉर्म लेकर पहुंचा और ये फॉर्म उन आधिकारिक फॉर्मों से अलग दिख रहे थे जो उन्हें ब्लॉक ऑफिस से मिले थे।लेकिन जब BLO मुख्तार ने सख्ती से सवाल किए, तो पुष्टि न कर पाने की स्थिति में उसने सभी फॉर्म मौके पर ही जला दिए। बताया गया है कि इनमें से ज्यादातर नाम 2003 के पिछले SIR में पहले से दर्ज और सत्यापित थे। कुल मिलाकर महेशटिकरी, पचुआ किता, लोचनी और बघाकोल इन चार बूथों से इस तरह की शिकायतें मिली हैं।
प्रभावित परिवारों की चिंता
जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, उनमें कई परिवार पीढ़ियों से गांव में रह रहे बताए जाते हैं। 70 वर्षीय अब्दुल मन्नान खान और 50 वर्षीय मोहम्मद नौशाद जैसे लोगों ने आशंका जताई है कि इससे उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है या उनकी नागरिकता पर भी सवाल उठ सकते हैं, भले ही BLO ने उन्हें सूची में नाम बरकरार रहने का भरोसा दिया हो। परिवारों का कहना है कि उनके पास खतियान जैसे जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं, फिर भी नाम हटने की आशंका ने उन्हें चिंतित कर दिया है।
भाजपा का पक्ष
भाजपा की ओर से भी इस मामले में जवाबी शिकायत दर्ज की गई है। पार्टी के झारखंड SIR संयोजक राकेश प्रसाद ने अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि गोड्डा में दो बूथों के BLO ने उनके BLA द्वारा जमा फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किए। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि BLO ने BLA की पहचान सार्वजनिक क्यों की, जिससे उन्हें कथित तौर पर दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। पूर्व विधायक अमित कुमार मंडल के मुताबिक, फॉर्म जमा करना BLA की प्रशिक्षित जिम्मेदारी का हिस्सा है और दोहरी प्रविष्टि जैसे मामलों में आपत्ति दर्ज कराना सामान्य प्रक्रिया है।
प्रशासन और चुनाव आयोग का रुख
BDO श्रीमन मरांडी का कहना है कि आपत्ति संबंधित परिवार की ओर से या ठोस सबूत के आधार पर ही दर्ज होनी चाहिए, और हर अनुरोध की मौके पर जाकर जांच की जाएगी। झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं हुई है, फॉर्म-7 के जरिए आपत्तियां दर्ज कराना नियमानुसार है, हालांकि BLO को फॉर्म सीधे खारिज करने के बजाय पहले AERO को सूचित करना चाहिए, जो आगे की कार्रवाई तय करेगा।
विपक्ष के आरोप
वहीं JMM के स्थानीय प्रखंड अध्यक्ष सुल्तान अहमद ने इसे मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की भाजपा की सोची-समझी रणनीति बताया, जबकि कांग्रेस महासचिव सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि पार्टी झारखंड में SIR प्रक्रिया पर करीबी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की मनमानी को रोका जा सके। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
