उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अपनी इच्छा से इस्तीफा दे दिया है। फिलहाल वह राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं। इस्तीफे के बाद उनकी पूरी यात्रा एक बार फिर चर्चा में है – एक सामान्य परिवार से निकलकर IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु तक पहुंचना, लंदन में नौकरी करना, फिर विदेश का करियर छोड़कर भारत लौटना और UPSC के जरिए IAS बनना।
दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने अपनी 13 साल की प्रशासनिक यात्रा को याद करते हुए लिखा कि उन्होंने इस अविस्मरणीय सफर को अपनी इच्छा से विराम देने का फैसला किया है।
दिल्ली से IIT तक का सफर
दिव्या मित्तल की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली में हुई। 12वीं के बाद उन्होंने IIT दिल्ली में दाखिला लिया और वर्ष 2001 से 2005 के बीच बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने प्रबंधन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया।
CAT की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने IIM बेंगलुरु में दाखिला लिया। 2005-07 बैच में MBA की पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपने बैच के शीर्ष 5 प्रतिशत विद्यार्थियों में जगह बनाई।
IIM के बाद लंदन में नौकरी, लेकिन मन भारत में
प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने के बाद दिव्या मित्तल का करियर उन्हें लंदन ले गया। वहां उन्होंने नौकरी की और एक बेहतर अंतरराष्ट्रीय करियर की राह पर आगे बढ़ीं। लेकिन इसी दौरान उनके भीतर भारत लौटकर देश के लिए काम करने की इच्छा मजबूत होती गई।
आखिरकार उन्होंने लंदन की नौकरी छोड़ दी और भारत लौटकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
पहले प्रयास में IPS, दूसरे में IAS
रिपोर्टों के मुताबिक, दिव्या मित्तल ने UPSC की परीक्षा पहले प्रयास में पास की और IPS के लिए चयनित हुईं। लेकिन उन्होंने एक बार फिर परीक्षा दी। दूसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल की और IAS बनीं। इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला और 2013 बैच की IAS अधिकारी के रूप में उनका प्रशासनिक सफर शुरू हुआ।
देवरिया और मीरजापुर ने सिखाई अलग-अलग सीख
प्रशासनिक सेवा के दौरान दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में देवरिया और मीरजापुर के अनुभवों को खास तौर पर याद किया।
उनके मुताबिक, देवरिया ने उन्हें यह सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है। वहीं मीरजापुर ने उन्हें यह समझाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बल्कि सिर्फ एक राय है।
मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी के प्रति अपनी आस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां उन्होंने महसूस किया कि वास्तविक शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और ईश्वर की कृपा से आती है।
जमीन, दिव्यांग और किसानों से जुड़े कामों को बताया सबसे बड़ा संतोष
दिव्या मित्तल ने अपनी प्रशासनिक यात्रा के दौरान किए गए कामों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके करियर की सबसे बड़ी संतुष्टि उन लोगों के जीवन में बदलाव देखकर मिली, जिन्हें पहली बार जमीन पर अधिकार मिला, दिव्यांग लोगों को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिला और किसानों के खेतों तक पानी पहुंचा।
उनके मुताबिक, व्यक्तिगत सपनों का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था, लेकिन इसके बाद उन्होंने अपने लोगों के लिए देखे गए सपनों को पूरा करने को प्राथमिकता दी।
मई 2026 की पोस्ट भी रही थी चर्चा में
दिव्या मित्तल मई 2026 में भी अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में आई थीं। उन्होंने अपनी शिक्षा और जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा था कि IIT दिल्ली, IIM बेंगलुरु और IAS जैसी कठिन यात्राओं ने उन्हें परीक्षाओं और बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया।
हालांकि, उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था ने उन्हें जीवन की भावनात्मक चुनौतियों और अकेलेपन से निपटने के लिए उतना तैयार नहीं किया। उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर शिक्षा व्यवस्था में लाइफ स्किल्स और भावनात्मक शिक्षा को लेकर बहस छिड़ गई थी।
‘सब कुछ’ हासिल करने के बाद भी कुछ अधूरा लगा
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए दिव्या मित्तल ने अपने जीवन के उस दौर को भी याद किया, जब उनके पास करियर की तमाम उपलब्धियां थीं। IIT, IIM, लंदन की नौकरी और फिर IAS – एक के बाद एक बड़ी उपलब्धियां उनके हिस्से में आईं। इसके बावजूद उन्हें भीतर कहीं कुछ अधूरा महसूस होता था।
उन्होंने बताया कि विदेश में रहते हुए उनके मन में यह भावना थी कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में आगे बढ़ने की क्षमता में उनके देश का भी योगदान है। यही सोच उन्हें भारत वापस लाई।
13 साल की सेवा के बाद लिया विराम
13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद अब दिव्या मित्तल ने अपने IAS करियर को विराम देने का फैसला किया है। उनका इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक अधिकारी के पद से विदाई नहीं, बल्कि IIT से शुरू होकर IIM, लंदन और UPSC होते हुए IAS तक पहुंचे एक लंबे सफर का नया मोड़ भी है।
अपने भावुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि वह यह सोचकर आई थीं कि शायद वह कुछ देने आई हैं, लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें महसूस हुआ कि इस सफर में उन्होंने खुद सबसे ज्यादा पाया। उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने उनकी खुशी में उनसे ज्यादा खुशी महसूस की और मुश्किल दौर में भी उन पर अपना भरोसा बनाए रखा।
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