सिमडेगा: जिस मिट्टी में कभी हॉकी स्टिक थामकर बड़े सपने देखने की शुरुआत हुई, उसी मिट्टी की बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ाया है। झारखंड के सिमडेगा से निकलकर भारतीय महिला हॉकी टीम तक पहुंचीं सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग ने अपनी उपलब्धि से एक बार फिर साबित किया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। मेहनत, लगन और लगातार संघर्ष के दम पर गांव की पगडंडियों से निकलकर भी दुनिया के बड़े खेल मंच तक पहुंचा जा सकता है।
एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे और खिलाड़ी ब्यूटी डुंगडुंग व दीपिका सोरेंग अपने गृह जिले सिमडेगा पहुंचीं, तो उनका स्वागत केवल तीन खिलाड़ियों का सम्मान नहीं था। यह उस मिट्टी, उन परिवारों, प्रशिक्षकों, शिक्षकों और उन सपनों का सम्मान था, जिन्होंने इन बेटियों को इस मुकाम तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
हॉकी स्टिक से सलामी, अपनी बेटियों को देखकर खिल उठे चेहरे
सिमडेगा के एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम के समीप आयोजित स्वागत समारोह में तीनों खिलाड़ियों के पहुंचते ही उत्साह का माहौल बन गया। नन्हे हॉकी खिलाड़ियों ने हॉकी स्टिक से सलामी देकर उनका अभिनंदन किया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तिलक लगाया गया और पुष्प अर्पित कर सम्मान जताया गया।
जिन खिलाड़ियों की सफलता आज उनके सामने थी, कभी वे भी इसी तरह हॉकी के मैदान में अभ्यास करते हुए आगे बढ़ने का सपना देखती थीं। आज उनकी कहानी सिमडेगा के नए खिलाड़ियों के लिए उम्मीद और हौसले की मिसाल बन रही है।
सिमडेगा की बेटियों ने बताया- सपने बड़े हों तो रास्ते निकलते हैं
सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग का सफर उन युवाओं के लिए खास मायने रखता है, जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहकर बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के पीछे सिर्फ खिलाड़ियों की मेहनत नहीं, बल्कि शुरुआती प्रशिक्षण, परिवार का साथ, शिक्षकों का मार्गदर्शन और स्थानीय हॉकी व्यवस्था का योगदान भी अहम रहा है।
समारोह में तीनों खिलाड़ियों ने अपने हॉकी सफर और एशियन गेम्स के अनुभव साझा किए। उन्होंने शुरुआती दिनों में साथ देने वाले प्रशिक्षकों, शिक्षकों, अभिभावकों और हॉकी संगठनों के प्रति आभार जताया।
भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने कहा कि सिमडेगा की धरती ने उन्हें हॉकी खेलने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को संदेश दिया कि सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास जरूरी है। कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सिमडेगा से और भी खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा बनेंगे।
पूरे जिले के लिए गर्व की बात: उपायुक्त
उपायुक्त कंचन सिंह ने सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग को शॉल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। खिलाड़ियों के अभिभावकों को भी सम्मानित किया गया।
उपायुक्त ने कहा कि तीनों खिलाड़ियों की उपलब्धि पूरे सिमडेगा जिले के लिए गर्व का विषय है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण पदक जीतना उनकी वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन बेटियों ने सिमडेगा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है और उनकी सफलता सीमित संसाधनों के बीच खेल में आगे बढ़ने का सपना देखने वाली ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा है।
हॉकी झारखंड के महासचिव मनोज कॉनबेगी ने भी खिलाड़ियों की सफलता को सिमडेगा की हॉकी परंपरा, प्रशिक्षकों की मेहनत, विद्यालयों के सहयोग और अभिभावकों के त्याग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है उसे सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर देने की।
जब अपनी मिट्टी की पहचान अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचती है..
इस स्वागत समारोह की अहमियत पदक और सम्मान से कहीं आगे है। सलीमा, ब्यूटी और दीपिका की उपलब्धि सिमडेगा के उन बच्चों को यह भरोसा देती है कि उनकी शुरुआत चाहे किसी छोटे गांव या साधारण परिवार से हुई हो, उनके सपनों की सीमा वहां तक तय नहीं होती।
झारखंड की पहचान उसकी मिट्टी, संस्कृति और संघर्षशील लोगों से है। जब इसी मिट्टी से निकली बेटियां देश की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल करती हैं, तो वह उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गर्व का पल बन जाती है। सिमडेगा में हुआ स्वागत इसी गर्व और अपनी बेटियों के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिवंगत माता रूपी सोरेन को भी जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपायुक्त कंचन सिंह के नेतृत्व में अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में सलीमा टेटे ने उपायुक्त कंचन सिंह को भारतीय महिला हॉकी टीम की जर्सी भेंट की। समारोह ने एक बार फिर सिमडेगा की हॉकी परंपरा, खिलाड़ियों के संघर्ष और इस विश्वास को सामने रखा कि झारखंड की मिट्टी में प्रतिभा है और जब उसे मेहनत, मार्गदर्शन और अवसर मिलते हैं, तो उसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचती है।
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