पिंटू दुबे
रांची: झारखंड पुलिस में विभागीय परीक्षा के माध्यम से पदोन्नत किए गए सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) की प्रोन्नति को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अभी थमता नहीं दिख रहा है। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है और पूर्व में जारी अंतरिम रोक फिलहाल प्रभावी बनी हुई है। मामला पुलिस विभाग में वरिष्ठता (सीनियरिटी) और पदोन्नति से जुड़े नियमों की व्याख्या से जुड़ा है, जिस पर पुलिस महकमे के कई अधिकारी और कर्मचारी अपनी नजर बनाए हुए हैं।
विवाद मुख्य रूप से विभागीय परीक्षा के जरिए पदोन्नत हुए सब-इंस्पेक्टरों और प्रत्यक्ष भर्ती (डायरेक्ट रिक्रूट) के माध्यम से नियुक्त दारोगाओं के बीच वरिष्ठता निर्धारण को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि विभागीय परीक्षा से पदोन्नत अधिकारियों को वरिष्ठता में प्राथमिकता दी जाती है तो प्रत्यक्ष भर्ती से आए अधिकारियों के सेवा अधिकार प्रभावित होंगे। वहीं दूसरी ओर विभागीय परीक्षा पास कर पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों का पक्ष है कि उन्होंने निर्धारित नियमों के तहत परीक्षा उत्तीर्ण कर पदोन्नति प्राप्त की है, इसलिए उनके अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना है। अंतिम निर्णय आने तक पूर्व में दी गई अंतरिम व्यवस्था जारी रहने से संबंधित प्रोन्नति प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का अंतिम फैसला न केवल इस मामले के पक्षकारों बल्कि झारखंड पुलिस में भविष्य की पदोन्नति और वरिष्ठता निर्धारण की प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।
इस पूरे विवाद के कारण पुलिस विभाग में कई अधिकारियों की पदोन्नति और सेवा संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस मुख्यालय और संबंधित विभाग भी न्यायालय के अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि आगे की प्रशासनिक कार्रवाई नियमों के अनुरूप की जा सके।
मामले की अगली सुनवाई में अदालत वरिष्ठता, विभागीय परीक्षा और सेवा नियमों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। अंतिम आदेश आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विभागीय परीक्षा के माध्यम से पदोन्नत दारोगाओं की प्रोन्नति और वरिष्ठता का भविष्य क्या होगा।
