रांची: झारखंड में जाति, आय, आवास और ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोगों को अब सिर्फ ऑनलाइन व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में राज्य सरकार ने बड़ी राहत देते हुए ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन माध्यम से भी प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति दे दी है। नई व्यवस्था गुरुवार से लागू कर दी गई है और फिलहाल तीन महीने तक प्रभावी रहेगी।
प्रमाणपत्र जारी होने में आ रही तकनीकी और अन्य परेशानियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संबंध में राहत देने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार ने राज्य के सभी उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
लंबित आवेदनों के जल्द निपटारे पर जोर
सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि जाति, आय, आवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए लंबित आवेदनों की मिशन मोड में जांच कर नियमानुसार उनका जल्द से जल्द निष्पादन किया जाए। यानी जिन लोगों के आवेदन पहले से लंबित हैं, उनकी जांच प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर प्रमाणपत्र जारी करने को कहा गया है।
वहीं, ऑफलाइन माध्यम से जारी किए जाने वाले प्रमाणपत्रों की बाद में ऑनलाइन प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को प्रमाणपत्रों का पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने का निर्देश दिया गया है।
हर दिन होगी प्रमाणपत्र जारी करने की निगरानी
सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिले में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की प्रतिदिन निगरानी करने को कहा गया है। इसके अलावा लंबित आवेदनों, निष्पादित आवेदनों और जारी किए गए प्रमाणपत्रों की पूरी जानकारी कार्मिक विभाग को उपलब्ध करानी होगी।
सरकार का मानना है कि ऑफलाइन विकल्प उपलब्ध होने से ऑनलाइन प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी अड़चनों के कारण प्रमाणपत्र के लिए इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिलेगी और लंबित आवेदनों का तेजी से निपटारा किया जा सकेगा।
पहले से था ऑफलाइन प्रमाणपत्र का प्रावधान
विभाग के मुताबिक, जाति प्रमाणपत्र को ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन जारी करने का प्रावधान पहले से ही 22 फरवरी 2022 के परिपत्र में किया गया था। ऑनलाइन व्यवस्था के दौरान बिजली कटौती, लिंक फेल होने और दूसरी तकनीकी समस्याओं के कारण ऑफलाइन प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति दी गई थी।
अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस व्यवस्था को एक बार फिर प्रभावी रूप से लागू किया गया है। हालांकि, यह व्यवस्था फिलहाल तीन महीने के लिए लागू रहेगी। इस दौरान जिला प्रशासन को लंबित आवेदनों के निपटारे के साथ-साथ प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी।
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