नेपाल इन दिनों विनाशकारी बाढ़ की मार झेल रहा है। भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घरों, सड़कों और पुलों के साथ-साथ जलविद्युत परियोजनाओं और दूसरी जरूरी बुनियादी सुविधाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत एक बार फिर नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई दिया है।
भारत की ओर से भेजी गई मानवीय सहायता, आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयों की खेप काठमांडू पहुंच गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए दी है। उन्होंने बताया कि राहत एवं आपदा प्रतिक्रिया के साथ चिकित्सा सहायता नेपाल पहुंच चुकी है और राहत प्रयासों में सहयोग के लिए अतिरिक्त सहायता भी जुटाई जा रही है।
बाढ़ ने नेपाल में मचाई भारी तबाही
भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद नेपाल के कई इलाकों में हालात बेहद खराब हो गए। अब तक 175 शव बरामद किए जाने की सूचना है, जबकि कई स्थानीय नागरिकों के साथ विदेशी पर्यटकों के भी लापता होने की खबर है।
रिपोर्टों के अनुसार, 28 देशों के 476 लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है। आपदा के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
बाढ़ की तेज धारा ने कई घरों को नुकसान पहुंचाया, जबकि सड़क और पुलों का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। जलविद्युत परियोजनाओं सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
राहत और बचाव अभियान में जुटी नेपाल की एजेंसियां
आपदा के बाद नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं को भी सक्रिय किया गया है, ताकि प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने की कोशिश जारी है।
भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां
नेपाल की स्थिति को देखते हुए भारत ने तत्काल सहायता का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल के लिए 10 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री और आवश्यक दवाइयां भेजी हैं।
उन्होंने नेपाल के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है।
अब राहत सामग्री काठमांडू पहुंच चुकी है। भारत की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि जरूरत के मुताबिक आगे और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात
आपदा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली।
प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ में हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की और प्रभावित लोगों के प्रति भारत की एकजुटता जताई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत नेपाल को इस संकट से निपटने में हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
भारत और नेपाल के बीच पहले से मौजूद करीबी संबंधों के बीच इस संकट के समय दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय समन्वय भी देखने को मिल रहा है।
सिर्फ भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी मदद को तैयार
नेपाल में आई इस आपदा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने नेपाल को सहायता उपलब्ध कराने की इच्छा जाहिर की है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी प्रभावित लोगों के प्रति एकजुटता जताई है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से नेपाल सरकार के नेतृत्व में चल रहे राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग की बात कही गई है।
मुश्किल वक्त में फिर दिखी भारत-नेपाल की दोस्ती
नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर दिखाया है कि प्राकृतिक आपदा के समय पड़ोसी देशों के बीच सहयोग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। एक तरफ नेपाल की एजेंसियां जमीनी स्तर पर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं, तो दूसरी तरफ भारत ने चिकित्सा सामग्री और आपदा राहत सहायता पहुंचाकर सहयोग का हाथ बढ़ाया है।
अब चुनौती सबसे पहले लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को जल्द से जल्द बहाल करने की है। भारत की सहायता की पहली खेप काठमांडू पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में राहत अभियान के साथ दोनों देशों के बीच समन्वय और सहायता का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है।
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