रांची: मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची को अधिक समावेशी, पारदर्शी और प्रभावी बनाने को लेकर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन देश-विदेश के विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। सम्मेलन में मतदाता जागरूकता, निर्वाचन में समावेशन, महिलाओं की भागीदारी, प्रवासी मतदाताओं की चुनौतियां, सोशल मीडिया और AI के इस्तेमाल से लेकर अलग-अलग देशों की वोटर रजिस्ट्रेशन व्यवस्था तक पर विचार-विमर्श हुआ। उद्घाटन सत्र के बाद पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया, जबकि इसके बाद छह तकनीकी सत्रों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
मतदाता पंजीकरण को मजबूत करने पर पैनल डिस्कशन
उद्घाटन सत्र के बाद “Voter Registration and Voter Register” विषय पर पैनल चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डी.एन. गौतम ने की, जबकि प्रो. संदीप शास्त्री सह-अध्यक्ष रहे।
पैनल में विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को कैसे आसान और प्रभावी बनाया जाए। इसके साथ ही मतदाता जागरूकता, निर्वाचन समावेशन, मतदान की सुगमता, EPIC और मतदाता सूची में एकरूपता, महिलाओं की निर्वाचन सहभागिता, आंतरिक प्रवासन और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी विचार रखे गए।
विभिन्न देशों में लागू मतदाता पंजीकरण प्रणालियों और वहां अपनाई जा रही बेहतर प्रक्रियाओं को लेकर भी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
पहले सत्र में लोकतंत्र को मजबूत करने पर चर्चा
पहला तकनीकी सत्र “Voter Registration and Voter Register—Strengthening Democracy” विषय पर आयोजित हुआ। प्रो. सुधीर कुमार सिंह की अध्यक्षता और डॉ. प्रतिमा सारंगी की सह-अध्यक्षता में हुए इस सत्र में नागरिकता, मतदाता पंजीकरण, राजनीतिक दलों की भूमिका और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
दुनिया के अलग-अलग देशों की चुनावी व्यवस्था को समझा
दूसरे तकनीकी सत्र का विषय “Voter Registration: Cross Country Experience Across Globe” रहा। इसकी अध्यक्षता डॉ. महेश देबता और सह-अध्यक्षता डॉ. बी.बी. बिस्वास ने की।
इसमें एस्टोनिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, डेनमार्क, घाना और दक्षिण अफ्रीका सहित विभिन्न देशों की मतदाता पंजीकरण प्रणालियों और उनके अनुभवों का अध्ययन प्रस्तुत किया गया।
मतदाता सूची प्रबंधन के सैद्धांतिक पहलुओं पर मंथन
तीसरे सत्र में “Voter Registration: Theoretical Paradigm” विषय पर चर्चा हुई। चैतन्य प्रसाद की अध्यक्षता और प्रो. दिवांशु श्रीवास्तव की सह-अध्यक्षता में हुए इस सत्र में निर्वाचन समावेशन, लोकतांत्रिक सुदृढ़ीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन के सैद्धांतिक पहलुओं पर विचार किया गया।
सोशल मीडिया और AI से बढ़ेगी मतदाता जागरूकता?
चौथे तकनीकी सत्र में डिजिटल माध्यमों के जरिए मतदाता जागरूकता बढ़ाने पर जोर रहा। “Voter Registration and Voter Register—Social Media and Imperative of Awareness” विषय पर हुए इस सत्र की अध्यक्षता शिव प्रसाद शर्मा ने की, जबकि प्रो. संजय कुमार सह-अध्यक्ष रहे।
इस दौरान सोशल मीडिया, बहुभाषी मतदाता जागरूकता, निर्वाचन साक्षरता और मतदाता पंजीकरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से जुड़े शोध प्रस्तुत किए गए।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आधुनिक तकनीक पर तुलनात्मक अध्ययन
पांचवें तकनीकी सत्र में भारत समेत अन्य लोकतांत्रिक देशों की मतदाता पंजीकरण प्रणालियों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे की अध्यक्षता और डॉ. अरुण राय की सह-अध्यक्षता में हुए इस सत्र में ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई।
महिलाओं, प्रवासियों और वंचित वर्गों की भागीदारी पर जोर
छठे तकनीकी सत्र में “Voter Registration and Voter Register: Gender and Migrant Issues” विषय पर चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता डॉ. चार्वाक पति और सह-अध्यक्षता डॉ. हनी राज ने की।
सत्र में ग्रामीण और वंचित समुदायों, प्रवासी आबादी एवं श्रमिकों के अलावा जनजातीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मतदाता पंजीकरण से जुड़ी चुनौतियों पर विचार किया गया। चर्चा का प्रमुख मुद्दा यह रहा कि इन वर्गों को निर्वाचन प्रक्रिया से किस तरह अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है।
NUSRL में तीन जगहों पर चले समानांतर सत्र
सम्मेलन के समानांतर तकनीकी सत्रों के लिए NUSRL के तीन कक्षों और लेक्चर थिएटरों को तैयार किया गया था। इन सत्रों में नॉलेज पार्टनर संस्थानों के प्रोफेसर, शोधकर्ता और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
छात्र स्वयंसेवकों ने भी सम्मेलन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने तकनीकी और अकादमिक सत्रों में भाग लेने के साथ आयोजन को सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग किया।
देशभर के विषय विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन की थीम “Voter Registration and Voter Registers” को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। विशेषज्ञों से शोध-पत्र आमंत्रित करने के साथ उन्हें तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता और विषय से जुड़े अपने अनुभव साझा करने के लिए भी आमंत्रित किया गया।
सम्मेलन में बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डी.एन. गौतम, उत्कल विश्वविद्यालय की डॉ. प्रतिमा सारंगी, एम.एस. रामैया यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के डॉ. वी. विजयकुमार, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के डॉ. महेश देबता, IGNOU के प्रो. सतीश कुमार सिंह, बेंगलुरु विश्वविद्यालय के प्रो. सुरेंद्र कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. सुधीर कुमार सिंह, जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रो. ईशान नस्कर और दूरदर्शन के पूर्व अपर महानिदेशक चैतन्य प्रसाद समेत कई विशेषज्ञ शामिल हुए।
इसके अलावा शिव नादर विश्वविद्यालय के डॉ. राहुल वर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. रेखा सक्सेना, प्रो. संदीप शास्त्री, प्रो. ए.के. वर्मा, डॉ. स्वपन के. बिस्वास, शिव प्रसाद शर्मा, एस.के. सेठिया और भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के डॉ. हरि चरण बेहारा समेत कई विशेषज्ञों ने भी अपनी सहभागिता दी।
निर्वाचन विभाग के अधिकारी और शिक्षाविद रहे मौजूद
कार्यक्रम में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह सहित निर्वाचन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा शिक्षाविद, शोधकर्ता, विद्यार्थी, छात्र स्वयंसेवक, राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड के पदाधिकारी और कर्मियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया।
पहले दिन की चर्चा में खास तौर पर इस बात पर जोर रहा कि मतदाता पंजीकरण को आसान बनाने के साथ-साथ हर वर्ग की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके लिए जागरूकता, तकनीक, ऑनलाइन व्यवस्था और अलग-अलग देशों के सफल अनुभवों से सीख लेने पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
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