Friday, October 2

रांची: झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को बुलाए गए बंद का राजधानी रांची में मिला-जुला असर देखने को मिला। अल्बर्ट एक्का चौक पर आंदोलनकारी तीर-धनुष, भाला और अन्य पारंपरिक हथियारों के साथ सड़क पर उतर आए। सड़क के बीच प्रदर्शन किए जाने से चौक पर लंबा जाम लग गया। मौके पर पहुंची पुलिस यातायात व्यवस्था को सामान्य कराने और स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी रही।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह बंद उनकी लंबित मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए सांकेतिक तौर पर किया गया है। उनका दावा है कि वे किसी के साथ जबरदस्ती नहीं कर रहे हैं।

शिबू सोरेन को सर्वोच्च सम्मान देने की मांग

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता गुरु शिबू सोरेन को झारखंड आंदोलन का सर्वोच्च सम्मान देने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी करना शामिल है। उनका कहना है कि इस संबंध में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

इसके अलावा आंदोलनकारियों ने राजकीय मान-सम्मान और अलग पहचान देने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि आंदोलनकारियों के बेटे-बेटियों को रोजगार और नौकरी में 100 प्रतिशत गारंटी दी जानी चाहिए।

पेंशन और जेल जाने की बाध्यता खत्म करने की मांग

आंदोलनकारियों का कहना है कि आंदोलन में शामिल लोगों के लिए जेल जाने की बाध्यता समाप्त की जाए और सभी आंदोलनकारियों को 5 हजार रुपये सम्मान पेंशन दी जाए।

उनका दावा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 30 सितंबर 2024 को इन मांगों को लेकर आश्वासन दिया था और सरकार की ओर से संकल्प भी लिया गया था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इसके बावजूद मांगों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

अधिकारियों पर आदेश नहीं मानने का आरोप

आंदोलनकारियों ने कुछ अधिकारियों पर सरकार के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि इसी मामले को लेकर देवघर के DC के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।

आंदोलनकारियों के मुताबिक, वे अपनी मांगों को लेकर सड़क से लेकर कानूनी स्तर तक संघर्ष कर रहे हैं।

15 नवंबर को बिरसा चौक पर बड़े आंदोलन का ऐलान

आंदोलनकारियों ने कहा है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो 15 नवंबर को राज्यभर के आंदोलनकारी रांची के बिरसा चौक पर जुटेंगे। उनके मुताबिक, इस दौरान 21 आंदोलनकारी आमरण अनशन पर बैठेंगे और बड़ी संख्या में आंदोलनकारी प्रदर्शन में शामिल होंगे।

आंदोलनकारियों ने बुधवार के बंद को सांकेतिक बताया है। उनका कहना है कि बंद का उद्देश्य सरकार का ध्यान उनकी मांगों की ओर आकर्षित करना है।

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