रांची: जमीन की खरीद-बिक्री में पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर रांची से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक शख्स ने पहले अपनी पहचान बदली और फिर उसी बदली हुई पहचान के आधार पर खुद को जमीन मालिक का परिजन बताते हुए करीब 1 एकड़ 17 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री करा दी।
मामले में सबसे बड़ा सवाल आरोपी की पहचान को लेकर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी का असली नाम विकास चौबे है, लेकिन आरोप है कि उसने आधार कार्ड में अपना नाम बदलकर बिगु साहू कर लिया। इसके बाद इसी पहचान के आधार पर जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई।
पहचान बदली, फिर जमीन पर दावा
आरोप के मुताबिक, सिर्फ नाम बदलने तक ही मामला सीमित नहीं रहा। बदली हुई पहचान के आधार पर आरोपी ने खुद को जमीन मालिक का परिजन बताया। इसके बाद करीब 1 एकड़ 17 डिसमिल जमीन को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और रजिस्ट्री भी करा दी गई।

यहीं से इस पूरे मामले की जांच का दायरा बड़ा हो जाता है। अब सवाल यह है कि आधार में नाम बदलने से लेकर जमीन के दस्तावेज तैयार होने और रजिस्ट्री होने तक आखिर कौन-कौन से रिकॉर्ड इस्तेमाल किए गए और उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
रजिस्ट्री के बाद आरोपी उत्तर प्रदेश फरार…
मामला सामने आने के बाद पुलिस और संबंधित विभाग जांच में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद आरोपी उत्तर प्रदेश फरार हो गया था।
पुलिस ने आरोपी को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही जमीन से जुड़े दस्तावेजों और रजिस्ट्री रिकॉर्ड को खंगाल रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि जमीन के वास्तविक मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों में क्या दर्ज था और रजिस्ट्री के दौरान आरोपी की पहचान किस आधार पर स्वीकार की गई।
अकेले फर्जीवाड़ा या पीछे पूरी कड़ी?
जांच इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि फर्जी पहचान के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराने में किस-किस की भूमिका रही।
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। इस फर्जीवाड़े ने रांची में जमीन की रजिस्ट्री से पहले पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


