रांची: JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद इसी परीक्षा के जरिए चयनित होकर सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। सोमवार देर रात बड़ी संख्या में चयनित कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के बाहर पहुंच गए और अपनी नौकरी बचाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पुलिस बल की तैनाती की गई है।
एक तरफ JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों में सरकार के फैसले के बाद संतोष है, तो दूसरी तरफ JSSC-CGL के जरिए चयनित होकर नौकरी कर रहे कर्मचारियों के सामने अब अपने भविष्य को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे चयनित कर्मचारी
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने JSSC-CGL की चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति के बाद अलग-अलग सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब परीक्षा रद्द होने की घोषणा से उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि अगर परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई भी हो, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द कर चयनित अभ्यर्थियों को सामूहिक रूप से इसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
मंत्रालय में 300 से ज्यादा कर्मचारी मौजूद
इधर, JSSC-CGL के जरिए चयनित होकर झारखंड मंत्रालय में काम कर रहे 300 से ज्यादा कर्मचारी भी मंत्रालय परिसर में जुटे हुए हैं। कर्मचारियों के जुटने के बाद मंत्रालय का गेट बंद कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि फिलहाल न तो किसी को अंदर आने दिया जा रहा है और न ही किसी को बाहर जाने दिया जा रहा है।
मंत्रालय परिसर में कर्मचारियों के जुटने से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। वहीं प्रोजेक्ट भवन के बाहर भी चयनित कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
पुलिस ने की बातचीत की कोशिश
प्रदर्शनकारियों की संख्या को देखते हुए प्रोजेक्ट भवन के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस की ओर से कर्मचारियों से बातचीत कर उन्हें वहां से हटने और स्थिति सामान्य करने का आग्रह किया जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
“दोषियों पर कार्रवाई हो, हमारी नौकरी क्यों जाए?”
चयनित कर्मचारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अभ्यर्थी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन जिन लोगों ने मेहनत से परीक्षा पास की और नियुक्ति के बाद कई महीनों से सरकारी सेवा में काम कर रहे हैं, उनकी नौकरी खत्म करना उचित नहीं होगा।
उनका कहना है कि परीक्षा रद्द होने से केवल कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों पर भी इसका असर पड़ेगा। इसलिए सरकार को जांच और कार्रवाई के साथ-साथ चयनित कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी रास्ता निकालना चाहिए।
अब देखना होगा कि सरकार JSSC-CGL से चयनित होकर नौकरी कर रहे इन कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और जांच की प्रक्रिया के बीच उनकी नियुक्तियों को लेकर आगे क्या कदम उठाया जाता है।


