रांची: सुहागिनों का सबसे खास पर्व करवा चौथ इस साल गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो के बाजारों में करवा, छलनी, पूजा थाली और मेहंदी की दुकानों पर रौनक दिखने लगी है। देशभर में लाखों महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखेंगी।
कब है करवा चौथ, कब निकलेगा चांद?
द्रिक पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1:06 बजे शुरू होकर रात 10:09 बजे तक रहेगी।
• पूजा मुहूर्त (नई दिल्ली): शाम 5:38 से 6:56 बजे तक
• चंद्रोदय, नई दिल्ली: रात करीब 8:17 बजे
• चंद्रोदय, रांची: शाम करीब 7:53 बजे
पूर्वी शहर होने के कारण रांची में चांद दिल्ली से करीब 20-25 मिनट पहले दिखेगा। झारखंड के दूसरे शहरों में भी समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग जरूर देख लें। विदेश में रहने वाले भारतीय, जैसे अमेरिका और कनाडा में, यह व्रत एक दिन पहले यानी 28 अक्टूबर को रखेंगे।
सरगी से छलनी तक: ऐसे बीतता है दिन
व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी से होती है, जो आमतौर पर सास अपनी बहू को देती हैं। इसमें फल, सूखे मेवे, मिठाई और हल्का भोजन होता है। दिनभर निर्जला व्रत के बाद शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार कर समूह में करवा माता, गौरी और गणेश की पूजा करती हैं, व्रत कथा सुनती हैं और थालियां घुमाती हैं। चांद निकलने पर छलनी से पहले चांद और फिर पति का चेहरा देखा जाता है, चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
इस बार लुक में झारखंड का तसर सिल्क
लाल और मैरून करवा चौथ के पारंपरिक रंग हैं, लेकिन इस बार झारखंड की महिलाओं के पास एक खास विकल्प है: राज्य का अपना तसर सिल्क। अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए मशहूर तसर साड़ी पर लाल या मैरून बॉर्डर पारंपरिक भी दिखता है और ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश भी देता है। साथ में हल्के गोल्ड गहने, लाल बिंदी और हाथों पर बारीक मेहंदी पूरे लुक को निखार देती है।
रांची के बाजारों में नवविवाहिताओं के बीच सिल्क शरारा, लाल अनारकली सूट और डिजाइनर क्रॉप टॉप वाले लहंगे का ट्रेंड भी देखा जा रहा है। जो महिलाएं साड़ी से हटकर कुछ पहनना चाहती हैं, उनके लिए ये अच्छे विकल्प हैं।
रांची में कहां लगवाएं मेहंदी?
करवा चौथ से एक-दो दिन पहले मेहंदी की सबसे ज्यादा मांग रहती है। रांची में त्योहारों के मौसम में मेन रोड, अपर बाजार, लालपुर, कचहरी, हरमू, कोकर, डोरंडा, हिनू और बिरसा चौक जैसे इलाकों में सड़क किनारे अस्थायी दुकानें सजती हैं, और इन्हीं प्रमुख बाजारों में मेहंदी लगाने वालों के स्टॉल भी देखने को मिलते हैं। शहर का सबसे पुराना बाजार अपर बाजार और मेन रोड मेहंदी के कोन, चूड़ियां, करवा और पूजा सामग्री की एक साथ खरीदारी के लिए सबसे लोकप्रिय हैं।
• पहले से बुकिंग करें: 28 अक्टूबर की शाम सबसे ज्यादा भीड़ रहेगी। घर बुलाने के लिए ब्यूटी पार्लर या मेहंदी आर्टिस्ट की बुकिंग आज-कल में ही कर लें।
• रेट पहले तय करें: डिजाइन और हाथ के हिसाब से दाम बदलते हैं, इसलिए लगवाने से पहले कीमत तय कर लें।
• केमिकल वाली मेहंदी से बचें: बहुत जल्दी गहरा काला रंग देने वाली मेहंदी में केमिकल हो सकते हैं। प्राकृतिक मेहंदी मांगें और संवेदनशील त्वचा हो तो पहले छोटे हिस्से पर लगाकर देख लें।
• गहरा रंग पाने के लिए: मेहंदी 28 अक्टूबर की शाम लगवाएं और 6-8 घंटे लगी रहने दें। सूखने पर नींबू-चीनी का घोल लगाएं और उतारने के बाद कुछ घंटे पानी से बचें।
सेहत का भी रखें ख्याल
पूरे दिन बिना पानी और भोजन के रहना शरीर के लिए बड़ी चुनौती है। थोड़ी तैयारी से व्रत आसान और सुरक्षित बन सकता है।
व्रत से एक दिन पहले
• 28 अक्टूबर को दिनभर भरपूर पानी, नारियल पानी या छाछ पिएं, ताकि शरीर में पानी की कमी न रहे।
• रात का खाना हल्का और पौष्टिक रखें। बहुत तला-भुना या मसालेदार खाना न खाएं।
सरगी में क्या खाएं
• ऊर्जा के लिए: केला, सेब, पपीता जैसे फल, खजूर, अंजीर, बादाम और अखरोट।
• पेट भरा रखने के लिए: ओट्स, दलिया या साबुदाना, और प्रोटीन के लिए दूध, दही या पनीर।
• पानी की कमी से बचने के लिए: सरगी के आखिर में एक गिलास दूध या नारियल पानी जरूर लें।
सरगी में इनसे बचें :
चाय और कॉफी: कैफीन शरीर से पानी बाहर निकालती है, जिससे दिन में ज्यादा प्यास लगती है और खाली पेट एसिडिटी हो सकती है।
• बहुत नमकीन, मसालेदार और तली चीजें: ये प्यास बढ़ाती हैं।
• ज्यादा मिठाई: इससे शुगर तेजी से बढ़ती और फिर गिरती है, जिससे जल्दी भूख और कमजोरी लगती है।
व्रत के दौरान
• ज्यादा धूप, भागदौड़ और भारी घरेलू काम से बचें। दोपहर में थोड़ा आराम करें।
• खुद को भजन, कथा या परिवार के साथ बातचीत में व्यस्त रखें, इससे भूख-प्यास का ध्यान कम जाता है।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
हल्की भूख, थकान या सिरदर्द सामान्य है। लेकिन तेज चक्कर, उल्टी, सीने में दर्द, बेहोशी जैसा लगना, घबराहट या भ्रम हो, तो व्रत तुरंत तोड़ें, पानी या जूस लें और जरूरत हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। सेहत से बड़ा कोई नियम नहीं।
डायबिटीज वाली महिलाएं खास ध्यान दें
लंबे उपवास में ब्लड शुगर अचानक गिर सकती है, जिससे चक्कर या भ्रम हो सकता है। व्रत से पहले डॉक्टर से दवा और इंसुलिन के समय पर बात करें, और दिन में शुगर की जांच करती रहें। टाइप-1 डायबिटीज की मरीजों को आमतौर पर निर्जला व्रत न रखने की सलाह दी जाती है।
इन्हें डॉक्टर की सलाह जरूरी
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, थायरॉइड, एनीमिया या बीपी की मरीज, और नियमित दवा लेने वाली महिलाएं निर्जला व्रत से पहले डॉक्टर से जरूर बात करें। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति में फल या पानी के साथ व्रत रखना एक सुरक्षित विकल्प है, और कई परिवारों में यह परंपरा पहले से मान्य है।
व्रत खोलने का सही तरीका
• पहले एक गिलास पानी या नारियल पानी पिएं, फिर कुछ फल खाएं।
• 15-20 मिनट बाद खिचड़ी, दाल-चावल या हल्की सब्जी-रोटी जैसा सुपाच्य भोजन लें।
• एक साथ ज्यादा न खाएं, और तली-भुनी या बहुत मसालेदार चीजों, चाय-कॉफी और कोल्ड ड्रिंक से बचें, वरना एसिडिटी और पेट फूलने की परेशानी हो सकती है।
आस्था और सेहत, दोनों का संतुलन बनाकर ही यह पर्व सच में खुशियों भरा बनता है। झारखंड डिजिटल की ओर से सभी व्रती महिलाओं को करवा चौथ की शुभकामनाएं।
