2018 से कमीशन में बड़े बदलाव का इंतजार, बढ़ती लागत ने गैस एजेंसियों की बढ़ाई मुश्किलें; PNG वाले इलाकों में एलपीजी सप्लाई बंद करने और 3.16 करोड़ कनेक्शन सस्पेंड होने पर भी उठाए सवाल
रांची/नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की सप्लाई को लेकर आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ सकती है। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि अगर तय समय के भीतर मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो गैस वितरण का काम बंद करने जैसा कड़ा कदम उठाया जा सकता है। देशभर के करीब 4,000 डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े इस विरोध ने एलपीजी वितरण व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएस शर्मा के मुताबिक, पिछले कई वर्षों में रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ा बदलाव हुआ है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं की गई। दूसरी ओर, कर्मचारियों के वेतन, वाहनों के किराये, गोदामों के रखरखाव और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में गैस एजेंसियों का संचालन आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है।
सिलेंडर महंगा, लेकिन कमीशन पुराना; आखिर कैसे चलेंगी गैस एजेंसियां?
एसोसिएशन के अनुसार, वर्ष 2018 के बाद से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 450 रुपये से बढ़कर लगभग 1,000 रुपये तक पहुंच गई, जबकि कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी लगभग 1,100 रुपये से बढ़कर 3,033 रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसके बावजूद डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन में अपेक्षित संशोधन नहीं हुआ।
डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव के साथ वितरण व्यवस्था की लागत भी बढ़ी है। कर्मचारियों के वेतन, डिलीवरी वाहनों के ईंधन और रखरखाव, गोदाम के खर्च तथा दूसरे जरूरी संसाधनों पर पहले से अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। वर्ष 2022 में कुछ अंतरिम राहत जरूर मिली थी, लेकिन उसके बाद कमीशन में कोई ठोस संशोधन नहीं होने से एजेंसी संचालकों की परेशानी बनी हुई है।
एसोसिएशन ने सरकार से कमीशन की समीक्षा कर इसे मौजूदा खर्चों के अनुरूप निर्धारित करने की मांग की है।
PNG की लाइन बिछी तो LPG पर रोक क्यों? उपभोक्ताओं की पसंद का मुद्दा उठा
डिस्ट्रीब्यूटर्स ने पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी (PNG) की सुविधा वाले इलाकों में एलपीजी कनेक्शन और सिलेंडर सप्लाई बंद करने से जुड़े सरकारी आदेश पर भी आपत्ति जताई है।
एसोसिएशन के मुताबिक, 24 मार्च 2026 के आदेश के तहत पीएनजी की लाइन बिछ चुके क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बंद करने की व्यवस्था का विरोध किया जा रहा है। डिस्ट्रीब्यूटर्स का तर्क है कि इस फैसले से उनके कारोबार पर असर पड़ेगा। साथ ही, उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत, सुविधा और पसंद के अनुसार पीएनजी या एलपीजी चुनने का विकल्प मिलना चाहिए।
उनका कहना है कि किसी क्षेत्र में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध होने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि वहां एलपीजी की जरूरत पूरी तरह समाप्त हो गई है। हालांकि, आदेश के वास्तविक दायरे और इसके क्रियान्वयन की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि अलग से जरूरी है।
3.16 करोड़ कनेक्शन सस्पेंड होने का दावा, e-KYC प्रक्रिया पर सवाल
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई है। एसोसिएशन का दावा है कि बायोमेट्रिक ई-केवाईसी पूरी नहीं होने के कारण देशभर में करीब 3.16 करोड़ एलपीजी कनेक्शन निलंबित किए गए हैं।
डिस्ट्रीब्यूटर्स ने बायोमेट्रिक सत्यापन की अनिवार्यता और इसके उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सत्यापन की प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों के कारण आम लोगों को परेशानी हो सकती है।
इस मुद्दे पर एसोसिएशन ने निजता के अधिकार से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के के.एस. पुट्टास्वामी फैसले का भी हवाला दिया है। हालांकि, 3.16 करोड़ कनेक्शन निलंबित होने के दावे और उसके कारणों की पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी आंकड़ों की जरूरत होगी।
तेल कंपनियों पर मनमानी का आरोप, अतिरिक्त सामान बेचने के दबाव की शिकायत
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के अधिकारियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का आरोप है कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के कुछ अधिकारी गैस एजेंसियों के दैनिक कामकाज में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करते हैं।
डिस्ट्रीब्यूटर्स के मुताबिक, एजेंसियों पर गैस चूल्हा, रबर ट्यूब, लाइटर और एप्रन जैसे अतिरिक्त सामान बेचने का दबाव बनाया जाता है। इसके अलावा, गैस की आपूर्ति से जुड़े इंडेंट में कथित तौर पर मनमाने बदलाव किए जाते हैं, जिससे एजेंसियों की योजना और वित्तीय प्रबंधन प्रभावित होता है।
एसोसिएशन ने इन मामलों में पारदर्शिता लाने और डिस्ट्रीब्यूटर्स को अनावश्यक दबाव से राहत देने की मांग की है।
एक महीने की मोहलत, अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
कमीशन में संशोधन, पीएनजी वाले इलाकों में एलपीजी सप्लाई पर लागू नियमों की समीक्षा, ई-केवाईसी से जुड़ी समस्याओं का समाधान और तेल कंपनियों के कथित हस्तक्षेप पर रोक—ये डिस्ट्रीब्यूटर्स की प्रमुख मांगें हैं।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर एक महीने के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें एलपीजी वितरण ठप करने की चेतावनी भी शामिल है।
यदि देशभर में बड़े स्तर पर गैस वितरण प्रभावित होता है, तो इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल, रेस्तरां और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल इसे डिस्ट्रीब्यूटर्स की चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए। वास्तविक हड़ताल या सप्लाई बंद होने की स्थिति सरकार और एसोसिएशन के बीच आगे होने वाली बातचीत तथा निर्णयों पर निर्भर करेगी।


