रांची: अस्पताल मरीजों के इलाज के लिए है या फिर राजनीतिक गतिविधियों और शक्ति प्रदर्शन के लिए? रांची सदर अस्पताल में पिछले दिनों जो तस्वीरें सामने आईं, उसके बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल परिसर में राजनीतिक जमावड़े, धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी और अनधिकृत भीड़ पर सीधे लगाम लगाने का फैसला किया है। इतना ही नहीं, मरीजों की गोपनीयता के नाम पर क्लीनिकल एरिया में बिना अनुमति फोटो, वीडियो और रील्स बनाने पर भी रोक लगा दी गई है। रांची सिविल सर्जन के इस आदेश के बाद राजनैतिक गलियारे में हड़कंप मच गया है. हाल में ही मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, बूबलाल मरांडी, रघुवर दास, सुबोधकांत सहाय समेत खुद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी अस्पताल में घंटो नेतागिरी करते नजर आए थे क्या सिविल सर्जन में यह क्षमता है कि स्वास्थ्य मंत्री को ऐसा करने से रोक सकें या केवल स्वास्थ्य मंत्री सभी सरकारी असपतालों में नेतागिरी करेंगे अन्य लोगों पर पाबंदियां रहेंगी..यह बड़ सवाल खड़ा हो गया है. आदेश में अस्पताल में फोटो वीडियो पर भी रोक लगायी गयी है जिसका सीधा मतलब है मीडिया की नो इंट्री.
आदेश के बाद राजनितिक गलियारे में हड़कंप
यह आदेश ऐसे समय आया है, जब JPSC-JSSC परीक्षा विवाद के दौरान सदर अस्पताल में भर्ती आंदोलनकारी छात्रों से मिलने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी जैसे बड़े राजनीतिक चेहरे अस्पताल पहुंच चुके हैं। रघुवर दास ने घायल अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर तीखी टिप्पणी की थी, जबकि बाबूलाल मरांडी ने भी अस्पताल में भर्ती अनशनकारी छात्रों का हाल जाना था।
वहीं बाद में सरकार की ओर से मंत्री दीपिका पांडे सिंह और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी सदर अस्पताल पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात कर उनका अनशन समाप्त कराया।
यानी पिछले कुछ दिनों में सदर अस्पताल सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं रहा, बल्कि छात्र आंदोलन, राजनीति, समर्थकों की भीड़ और कैमरों की मौजूदगी का भी केंद्र बन गया।
सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा की शिकायत के बाद असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CSO), रांची ने 21 अगस्त 2026 को कड़ा आदेश जारी किया है।
अस्पतालों के लिए जारी प्रमुख निर्देश:
1 मरीज = 1 अटेंडेंट: भर्ती मरीज के साथ सामान्यतः केवल एक अटेंडेंट ही रह सकेगा। अतिरिक्त अटेंडेंट के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी।
धरना-प्रदर्शन और भीड़ पर प्रतिबंध: अस्पताल परिसर के अंदर नारेबाजी, जुलूस, धरना या अनधिकृत गैदरिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। मरीज से मिलने के लिए वार्ड या कॉरिडोर में समूह में एकत्र होने की अनुमति नहीं होगी।
फोटोग्राफी और रील्स पर रोक:
मरीज की गोपनीयता (Privacy) और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बिना अनुमति क्लीनिकल एरिया में फोटो, वीडियो या लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) पर बैन लगाया गया है।
अस्पताल के प्रतिबंधित क्षेत्र: ICU, HDU, इमरजेंसी, OT, लेबर रूम और NICU में बाहरी या अनाधिकृत लोगों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा।
इमरजेंसी रास्ते रहेंगे खाली: एम्बुलेंस रूट, इमरजेंसी पैसेज, एंट्री-एग्जिट गेट और सीढ़ियों को हर समय पूरी तरह बाधा-मुक्त (Clear) रखने का निर्देश दिया गया है।
विजिटिंग आवर्स का पालन: परिजनों और मित्रों को केवल निर्धारित समय (Visiting Hours) में ही वेटिंग एरिया में मिलने की अनुमति होगी।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। निर्देशों के उल्लंघन या किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और अन्य वरीय अधिकारियों को पत्र की प्रतिलिपि भेजी गई है।
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