रांची। फार्मेसी शिक्षा को बदलती तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में नए B.Pharm पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मेडिकल डिवाइसेज जैसे उभरते क्षेत्रों को शामिल किया गया है। यह जानकारी फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के अध्यक्ष डॉ. मोंटुकुमार एम. पटेल ने सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची में आयोजित एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) के दौरान दी।
सरला बिरला विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का विषय “एनईपी-2020 के अनुरूप पीसीआई द्वारा निर्धारित नए बी.फार्म पाठ्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन” था।
नए पाठ्यक्रम में AI और मेडिकल डिवाइसेज पर जोर
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. मोंटुकुमार एम. पटेल ने कहा कि फार्मेसी का क्षेत्र तेजी से बदलती तकनीक और औद्योगिक आवश्यकताओं के दौर से गुजर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए B.Pharm पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेडिकल डिवाइसेज और तकनीक आधारित शिक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों को जगह दी गई है।
उन्होंने बताया कि नए पाठ्यक्रम से शिक्षकों को परिचित कराने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देशभर में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार नया पाठ्यक्रम फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
नैतिक फार्मेसी प्रैक्टिस और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर
डॉ. पटेल ने शिक्षकों से नैतिक फार्मेसी प्रैक्टिस को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने PCI की AEBES उपस्थिति प्रणाली के उचित अनुपालन और फार्मासिस्टों की सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने पर भी जोर दिया।
उन्होंने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती से निपटने में फार्मासिस्टों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही शिक्षकों से विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ जिम्मेदार और नैतिक फार्मेसी प्रैक्टिस के लिए तैयार करने की अपील की।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. कुमार अजय ने भी शिक्षकों से FDP में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया।
शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण : डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा
कार्यक्रम के संरक्षक एवं राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि एनईपी-2020 के अनुरूप नए B.Pharm पाठ्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू करने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को बदलती शैक्षणिक और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद करेंगे। इससे नई पीढ़ी के फार्मेसी विद्यार्थियों को आधुनिक उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करने में सहायता मिलेगी।
फार्मेसी शिक्षा को कौशल आधारित बनाने पर जोर
विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने कार्यक्रम की मेजबानी का अवसर प्रदान करने के लिए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान फार्मासिस्टों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मेसी पेशे की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने PCI द्वारा देशभर के पांच हजार से अधिक फार्मेसी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में FDP आयोजित किए जाने को महत्वपूर्ण पहल बताया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने कहा कि नया PCI पाठ्यक्रम फार्मेसी शिक्षा को कौशल आधारित और तकनीक उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यक्रम को सैद्धांतिक रूप से समझना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे कक्षा और प्रयोगशाला में प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी है।
नए पाठ्यक्रम की रणनीतियों पर हुई चर्चा
फार्मेसी विभाग के डीन प्रो. शुभ्रजीत मंत्री ने नए पाठ्यक्रम की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक रणनीतियों को समझने और उन्हें शिक्षण प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया . कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में PCI द्वारा चयनित विशेषज्ञों ने नए B.Pharm पाठ्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. सलीमुल्ला खान ने B.Pharm पाठ्यक्रम-2026 और एनईपी-2020 के बीच सामंजस्य पर चर्चा की। वहीं डॉ. सैलेश जयंतिलाल वाधेर ने एनईपी, परिणाम आधारित शिक्षा और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने विचार रखे।
फार्मेसी शिक्षा में AI की भूमिका पर विशेष चर्चा
तकनीकी सत्र में डॉ. केतन रांच ने फार्मेसी पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समावेश और तकनीक आधारित फार्मेसी शिक्षा में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने फार्मेसी शिक्षा में नई तकनीकों के उपयोग और बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने की आवश्यकता पर चर्चा की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया उत्साह
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के दौरान तकनीकी सत्रों के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के डीन और फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में सह-संयोजक श्रीमती निशा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल संचालन में सहयोग के लिए श्रीमती अंजली मिश्रा के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।
विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति ने दी शुभकामनाएं
सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति श्री बिजय कुमार दलान ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजक मंडली को शुभकामनाएं दीं।
एक दिवसीय FDP के माध्यम से शिक्षकों को नए B.Pharm पाठ्यक्रम, एनईपी-2020, परिणाम आधारित शिक्षा, AI और तकनीक आधारित फार्मेसी शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य नए पाठ्यक्रम को शिक्षण और प्रयोगशाला स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए शिक्षकों को तैयार करना रहा।
