Tuesday, September 22

राजधानी रांची में कुछ आवासीय फ्लैट अब स्थायी किराये के बजाय कुछ घंटों या एक-दो दिनों के लिए ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। कम समय के लिए उपलब्ध ऐसे फ्लैटों को लेकर गेटेड सोसाइटियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा चिंता बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब किसी सोसायटी में रोज नए लोग आते-जाते हैं, तो उनकी पहचान और गतिविधियों की निगरानी किस स्तर पर होती है और किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, रांची में कुछ फ्लैटों को शॉर्ट स्टे के लिए करीब 6 से 8 हजार रुपये प्रतिदिन तक की दर पर उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रांची में निजी वन बीएचके और अन्य आवासीय इकाइयों को कम अवधि के ठहराव के लिए सूचीबद्ध किया गया है। कुछ संपत्तियों को गेटेड सोसाइटी में स्थित बताया गया है और इनमें छोटे व लंबे, दोनों तरह के ठहराव का विकल्प दिया गया है।

हालांकि, रांची में ऐसे शॉर्ट स्टे फ्लैटों की कुल संख्या कितनी है, इनमें कितने सामान्य आवासीय फ्लैट हैं और कितने विधिवत लाइसेंस प्राप्त सर्विस्ड अपार्टमेंट या अन्य श्रेणी में आते हैं, इसका कोई समेकित सरकारी आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

स्थायी निवासियों की सबसे बड़ी चिंता सत्यापन

सोसायटी में रहने वाले लोगों का कहना है कि समस्या बाहर से आने वाले हर व्यक्ति से नहीं, बल्कि उसकी पहचान और सत्यापन की व्यवस्था से जुड़ी है। उनका कहना है कि शॉर्ट स्टे के लिए फ्लैट बुक करने वाले व्यक्ति की पहचान, मोबाइल नंबर, पता और ठहरने की अवधि का रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए। साथ ही सोसायटी के सुरक्षा कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी होनी चाहिए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ मामलों में देर रात तक शोर-शराबे, नशे के सेवन और आपसी विवाद जैसी शिकायतें भी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, ऐसी शिकायतों की वास्तविकता और किसी विशेष फ्लैट में आपराधिक गतिविधि की पुष्टि संबंधित मामले की पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है।

देह व्यापार के आरोप, जांच जरूरी

कुछ स्थानीय निवासियों ने शॉर्ट स्टे फ्लैटों के इस्तेमाल को लेकर देह व्यापार की आशंका और आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, केवल आरोप के आधार पर किसी संपत्ति या व्यक्ति के खिलाफ निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

कानून में मालिक की जिम्मेदारी कब बनती है?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी संपत्ति में अपराध हो जाने मात्र से फ्लैट मालिक स्वतः उस अपराध का आरोपी नहीं बन जाता। लेकिन यदि मालिक को यह जानकारी हो कि उसकी संपत्ति का इस्तेमाल वेश्यावृत्ति या वेश्यालय के लिए किया जा रहा है और वह जानबूझकर इसकी अनुमति देता है, तो अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

इसके अलावा, झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 317 में नगरपालिका क्षेत्र में किसी परिसर को होटल या लॉजिंग हाउस के रूप में इस्तेमाल करने के लिए लाइसेंस की व्यवस्था है। इसलिए यह भी जांच का विषय है कि आवासीय फ्लैटों का नियमित रूप से व्यावसायिक शॉर्ट स्टे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं और संबंधित परिसर के पास जरूरी अनुमति या लाइसेंस है या नहीं।

पुलिस सत्यापन और बीट रिपोर्टिंग पर जोर

रांची में किरायेदारों और रहने वाले लोगों के सत्यापन को लेकर पुलिस पहले भी मकान मालिकों से अपील कर चुकी है। पुलिस स्तर पर बीट पेट्रोलिंग के जरिए क्षेत्र में रहने वाले लोगों, किरायेदारों और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

अपार्टमेंट और गेटेड सोसाइटियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पुलिस की नियमित बीट रिपोर्टिंग और सत्यापन व्यवस्था मजबूत होने से किसी घटना की स्थिति में संबंधित व्यक्ति तक पहुंचना आसान हो सकता है। ऐसे में शॉर्ट स्टे फ्लैटों के बढ़ते चलन के बीच सुरक्षा, पहचान सत्यापन और नियमों के पालन की स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।

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