Friday, October 2

सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को बेहद गंभीर और कष्टदायक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार जब पूर्वज यानी पितर नाराज या अतृप्त रह जाते हैं, तो परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध से हो रही है, जबकि मुख्य प्रतिपदा श्राद्ध 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा।

पितृ दोष लगने के प्रमुख कारण

वैदिक ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, पितृ दोष के पीछे गहरे आध्यात्मिक और ज्योतिषीय कारण होते हैं। इनमें प्रमुख हैं – पूर्वजों का विधिवत श्राद्ध व तर्पण न करना, जीवित बुजुर्गों का अनादर या उनकी अनदेखी करना, कुंडली के नौवें या दसवें भाव में सूर्य या चंद्रमा का राहु, केतु या शनि से अशुभ संबंध बनना, तथा परिवार में किसी की अकाल मृत्यु होने पर उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा न कराना।

पितृ दोष के प्रमुख लक्षण

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि पितृ दोष होने पर जीवन में लगातार अप्रत्याशित परेशानियां आने लगती हैं। इसके संकेतों में संतान सुख में बाधा, विवाह में लंबा विलंब या रिश्तों का टूटना, मेहनत के बावजूद आर्थिक तंगी और कर्ज बना रहना, सपनों में पूर्वजों या सांप का दिखना, घर में बार-बार बीमारी आना और बिना ठोस वजह पारिवारिक कलह बना रहना शामिल है।

राशि अनुसार मुक्ति के उपाय

ज्योतिषाचार्य ने इस पितृ पक्ष में 12 राशियों के लिए अलग-अलग दान और पूजा विधि सुझाई है। मेष राशि के लोगों को लाल वस्त्र दान करने और नदी में तांबे का सिक्का प्रवाहित करने की सलाह दी गई है, जबकि वृषभ राशि वालों को सफेद वस्तुओं का दान और पीपल पर जल चढ़ाने को कहा गया है। मिथुन राशि के जातकों के लिए गाय को हरा चारा खिलाना और मूंग दाल दान करना बताया गया है, तो कर्क राशि वालों के लिए दूध, चांदी और सफेद वस्त्रों का दान उपयुक्त है।

सिंह राशि के लिए गेहूं, गुड़ और तांबे के बर्तन का दान, कन्या राशि के लिए हरी मूंग और अन्न दान, तुला राशि के लिए दूध से बनी मिठाइयों का दान सुझाया गया है। वृश्चिक राशि वालों को मिट्टी के पात्र या भूमि दान, धनु राशि वालों को काले तिल और पीले वस्त्र दान करने को कहा गया है। मकर राशि के लिए तिल का तेल और कंबल दान, कुंभ राशि के लिए अन्नदान व छाता-जूते का दान, और मीन राशि के लिए धार्मिक पुस्तकों व पीले वस्त्रों का दान बताया गया है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार पितर कुल के रक्षक होते हैं और उनका आदर करने से पितृ दोष स्वतः पितृ आशीर्वाद में बदल जाता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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