रांची:
एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल ‘प्रोजेक्ट समृद्धि – एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम’ के तहत झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल कृषि और किसानों की आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। संस्था ने गैर-सरकारी संगठन प्रदान (PRADAN) के सहयोग से इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2023 में बोकारो और हजारीबाग जिलों से की थी, जिसे वर्ष 2024 में दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड तक विस्तारित किया गया।
परियोजना के तहत जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, भूमि विकास, वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा आधारित पेयजल एवं सिंचाई प्रणालियों का निर्माण किया गया। इन प्रयासों से न केवल खेती के लिए वर्षभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई, बल्कि किसानों की आय और कृषि उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
26 गांवों के 1,200 से अधिक किसान हुए लाभान्वित
बोकारो और हजारीबाग में इस परियोजना के अंतर्गत 101 खेत तालाब, दो सौर ऊर्जा आधारित लिफ्ट सिंचाई प्रणालियां तथा 211 एकड़ भूमि पर मृदा एवं नमी संरक्षण कार्य किए गए। इन सुविधाओं से करीब 585 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिला। इसके साथ ही सौर ऊर्जा संचालित पेयजल प्रणालियों और वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण से ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया गया।
परियोजना का लाभ उठाकर 1,200 से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों ने बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती अपनाई। सामुदायिक योजना, क्षमता विकास और बाजार से बेहतर जुड़ाव के कारण किसानों की घरेलू आय में तीन से चार गुना तक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
दुमका में भी मिला सकारात्मक परिणाम
बोकारो और हजारीबाग में सफलता मिलने के बाद परियोजना का विस्तार दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड में किया गया। यहां 31 खेत तालाब, चार सौर लिफ्ट सिंचाई प्रणालियां और पांच सिंचाई कुओं का निर्माण कर लगभग 220 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था विकसित की गई।
इसके अलावा छह प्रोडक्शन हाउस, 200 ट्रेलिस आधारित मल्टी-लेयर खेती इकाइयां, एक बायो-रिसोर्स सेंटर और एक पॉलीहाउस नर्सरी स्थापित की गईं, जिससे लगभग 1,000 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा मिला।
50 प्रतिशत तक बढ़ी किसानों की वार्षिक आय
कार्यक्रम के तहत पशु स्वास्थ्य शिविरों का भी आयोजन किया गया, जिससे पशुधन की उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार हुआ। बेहतर सिंचाई और आधुनिक कृषि तकनीकों के कारण 300 से अधिक परिवारों की वार्षिक आय में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। वहीं माइक्रो प्रोडक्शन एग्रीगेट्स के माध्यम से किसानों को सामूहिक खरीद, उत्पादन योजना और बाजार तक पहुंच की बेहतर सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
क्या बोले अधिकारी
एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ पीपल एंड ऑपरेशन्स आशीष घटनेकर ने कहा कि “जल तक सतत पहुंच ही मजबूत कृषि और ग्रामीण आजीविका की आधारशिला है। प्रोजेक्ट समृद्धि के माध्यम से हमारा लक्ष्य खेती पर निर्भर समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना और जलवायु-अनुकूल विकास को बढ़ावा देना है।”
वहीं प्रदान के कार्यकारी निदेशक सरोज कुमार महापात्र ने कहा कि “स्थायी परिवर्तन तभी संभव है जब समुदाय स्वयं इसकी जिम्मेदारी निभाए। यह परियोजना जल सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ लघु किसानों के लिए टिकाऊ आजीविका के नए अवसर तैयार कर रही है।”
ग्रामीण विकास की दिशा में मजबूत पहल
प्रोजेक्ट समृद्धि जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, टिकाऊ कृषि और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास का मॉडल बनकर उभरा है। यह पहल न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
