Friday, October 2

रांची: निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को रांची में प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पुराना विधानसभा परिसर से जुलूस निकालते हुए निर्वाचन आयोग कार्यालय पहुंचे। यहां पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कार्यालय का घेराव किया और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

पुराना विधानसभा परिसर से निकला जुलूस

कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता पुराना विधानसभा परिसर में जुटे और वहां से जुलूस की शक्ल में निर्वाचन आयोग कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान SIR और मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने तथा संशोधन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए।

सभा में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का निर्वाचन आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।

शिल्पी नेहा तिर्की ने मांगा मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा

प्रदर्शन के दौरान मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने SIR के तहत मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर भी अपनी चिंताएं सामने रखीं। पार्टी की ओर से निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर आयोग से जवाब मांगा गया।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयुक्त के. रवि कुमार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र एवं व्यापक समीक्षा की मांग की गई।

कांग्रेस ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया की समीक्षा के साथ चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।

बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता हुए शामिल

प्रदर्शन में भूपेंद्र मरावी, प्रदीप यादव, राजेश कच्छप, राधाकृष्ण किशोर और शिल्पी नेहा तिर्की समेत कांग्रेस के कई नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए आयोग से स्पष्ट जवाब की मांग की।

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