Wednesday, September 9

RBI के कड़े Re-KYC नियमों ने डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है। Google Pay, Paytm और PhonePe जैसी दिग्गज कंपनियों ने अब रिजर्व बैंक से गुहार लगाई है कि उन्हें छोटे और अनौपचारिक कारोबारियों की दोबारा पहचान-पुष्टि (Re-KYC) पूरी करने के लिए 15 सितंबर तक कुछ और वक्त दिया जाए। कंपनियों का तर्क है कि गांव-कस्बों के छोटे दुकानदारों तक पहुंचकर उनका सत्यापन कराना जितना दिखता है, उतना आसान नहीं है और नए नियमों की सख्ती ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है।

हजारों कारोबारियों का काम बाकी

रिपोर्ट्स के मुताबिक हजारों छोटे और अनौपचारिक व्यापारियों का Re-KYC अभी अधूरा है। ये कंपनियां छोटे शहरों और गांवों में QR कोड व साउंडबॉक्स के जरिए भुगतान लेने वाले दुकानदारों का दोबारा सत्यापन कर रही हैं, लेकिन नए नियमों में अनिवार्य फिजिकल वेरिफिकेशन ने इस काम को और जटिल बना दिया है।

दस्तावेजों की कमी बनी बाधा

सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कई छोटे दुकानदारों के पास KYC के लिए जरूरी दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि इनके डिजिटल लेनदेन का कुल हिस्सा बहुत बड़ा नहीं है, फिर भी छोटे शहरों और गांवों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में इनकी भूमिका अहम मानी जाती है।

80% काम पूरा होने की उम्मीद

कंपनियों को भरोसा है कि 15 सितंबर तक करीब 80% Re-KYC पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन बाकी बचे कारोबारियों का सत्यापन चुनौती बना रहेगा। RBI के नियमों के अनुसार फिजिकल KYC सिर्फ कंपनियों के अपने कर्मचारी ही कर सकते हैं, थर्ड-पार्टी एजेंसियों को यह जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। इसी वजह से बीते एक साल में कंपनियों को अपने स्टाफ की संख्या भी बढ़ानी पड़ी।

Re-KYC क्यों जरूरी

RBI के KYC नियमों का मकसद ग्राहकों की सही पहचान और पते की पुष्टि सुनिश्चित करना है, ताकि धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। कंपनियों को अनुपालन के लिए समय तो मिला है, लेकिन बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का पुनः सत्यापन आसान नहीं, इसलिए समयसीमा बढ़ाने की मांग उठ रही है।

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