Monday, September 21

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी में संगठनात्मक स्तर पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष अभिलाष साहू की प्राथमिक सदस्यता और पद पर बहाली को लेकर प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और एआईसीसी प्रभारी के. राजू आमने-सामने आ गए हैं।

मामला क्या है

प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के निर्देश पर 14 सितंबर 2026 को पत्र संख्या 431/09/2026 के जरिए अभिलाष साहू की पार्टी सदस्यता और झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी में उपाध्यक्ष पद पर बहाली की अधिसूचना जारी की गई थी। लेकिन तीन दिन बाद ही, 17 सितंबर को एआईसीसी में झारखंड प्रभारी के. राजू ने इस बहाली आदेश पर रोक लगा दी।

अपने पत्र में राजू ने स्पष्ट किया कि अभिलाष साहू के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी जांच रिपोर्ट का परीक्षण अभी बाकी है, और यह तय होना शेष है कि उन पर लगाए गए आरोपों और दी गई सजा के बीच अनुपात न्यायसंगत है या नहीं।

के. राजू के निर्देश

पत्र में के. राजू ने दो अहम बिंदुओं पर कार्रवाई का आदेश दिया है:

पहला, अनुशासन समिति से कहा गया है कि वह अभिलाष साहू की कथित वीडियो बनाने और उसे सार्वजनिक तौर पर प्रसारित करने में उनकी निजी भूमिका, समिति के सामने दिए गए उनके स्पष्टीकरण, और सार्वजनिक मंचों पर उनके बयानों की गहन जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपे। साथ ही उनके सार्वजनिक आचरण और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से जुड़े तथ्यों को भी रिपोर्ट में शामिल करने को कहा गया है।

दूसरा, जब तक यह विस्तृत रिपोर्ट सामने नहीं आती और उसकी समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक अभिलाष साहू को संगठन में कोई जिम्मेदारी सौंपे जाने को उचित नहीं ठहराया गया है — यानी उनके उपाध्यक्ष पद के दायित्व को फिलहाल स्थगित रखा जाए।

सामने आया अंतर्विरोध

इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर के आंतरिक टकराव को उजागर कर दिया है — प्रदेश अध्यक्ष की ओर से जारी बहाली आदेश और प्रदेश प्रभारी की ओर से उसी आदेश पर लगाई गई रोक, दोनों महज तीन दिन के भीतर सामने आए। सवाल यह उठता है कि प्रदेश इकाई और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की यह कमी झारखंड कांग्रेस के संगठनात्मक फैसलों की साख पर क्या असर डालेगी।

जहां प्रदेश अध्यक्ष कमलेश खुद बहाली के पक्ष में नजर आए, वहीं प्रभारी राजू ने इसे अनुशासनात्मक प्रक्रिया की अनदेखी बताते हुए रोक दिया। यह टकराव इस सवाल को जन्म देता है — आखिर फैसला किसका चलेगा, प्रदेश नेतृत्व का या केंद्रीय प्रभारी का?

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