झारखंड में शहरी क्षेत्र के भीतर जमीन, मकान या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब रजिस्ट्री के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। राज्य सरकार ने संपत्ति के हस्तांतरण पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में झारखंड नगरपालिका भूमि/भवन स्थानांतरण अधिभार नियमावली, 2026 को स्वीकृति दी गई।
इस फैसले के बाद नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत और अधिसूचित औद्योगिक नगरी के दायरे में आने वाली संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। सरकार का कहना है कि इस राशि से शहरी निकायों की आमदनी बढ़ेगी और शहरों में विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। हालांकि, खरीदारों के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री का कुल खर्च बढ़ना तय है।
संपत्ति की कीमत पर नहीं, रजिस्ट्री शुल्क पर लगेगा अतिरिक्त 10 प्रतिशत
नए नियम को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 10 प्रतिशत सरचार्ज सीधे जमीन या मकान की कुल कीमत पर नहीं लगेगा। इसकी गणना स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क की कुल राशि के आधार पर की जाएगी।
मौजूदा व्यवस्था में संपत्ति के मूल्य या निर्धारित सरकारी सर्किल रेट, जो भी लागू गणना के अनुसार अधिक हो, उसके आधार पर स्टांप और निबंधन शुल्क तय किया जाता है। अब इन दोनों शुल्कों के अतिरिक्त कुल राशि का 10 प्रतिशत सरचार्ज भी देना होगा।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी संपत्ति की रजिस्ट्री पर स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क मिलाकर एक लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, तो नए प्रावधान के तहत 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इस तरह रजिस्ट्री से जुड़े इन शुल्कों का कुल खर्च बढ़कर 1.10 लाख रुपये हो जाएगा। यह केवल उदाहरण है; वास्तविक राशि संबंधित संपत्ति और लागू शुल्क के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
सरचार्ज क्या होता है और यह कैसे लगेगा?
सरचार्ज का मतलब है किसी मौजूदा शुल्क के ऊपर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क। झारखंड में जमीन-मकान की रजिस्ट्री के मामले में इसका मतलब यह है कि खरीदार को पहले से लगने वाले स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क के अलावा कुछ अतिरिक्त राशि भी देनी होगी।
उदाहरण के लिए, यदि किसी जमीन या मकान की रजिस्ट्री पर स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क मिलाकर एक लाख रुपये बनते हैं, तो 10 प्रतिशत सरचार्ज के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे। यानी इन दोनों शुल्कों पर कुल खर्च 1.10 लाख रुपये हो जाएगा।
नगर निकायों को कहां खर्च करनी होगी यह राशि?
सरकार का उद्देश्य इस व्यवस्था के जरिए नगर निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। शहरी क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के साथ सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पार्क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की मांग भी बढ़ रही है। इन सुविधाओं के निर्माण और रखरखाव के लिए नगर निकायों को लगातार धन की जरूरत होती है।
नियमावली के तहत सरचार्ज से मिलने वाली राशि संबंधित नगर निकाय के खाते में जमा की जाएगी। इसका इस्तेमाल शहरी आधारभूत संरचना और विकास कार्यों पर किया जा सकेगा। इससे नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों को अपने क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है।
ऑनलाइन होगी वसूली, रजिस्ट्री रद्द होने पर रिफंड का प्रावधान
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरचार्ज की गणना और वसूली को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की योजना है। इसके लिए संबंधित विभागों के पोर्टल और भुगतान व्यवस्था को आपस में जोड़ा जाएगा, ताकि राशि की वसूली और संबंधित नगर निकाय तक उसका हस्तांतरण किया जा सके।
यदि किसी कारण संपत्ति का हस्तांतरण या रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा सरचार्ज वापस करने का प्रावधान भी रखा गया है।
जमीन खरीदने से पहले बजट की दोबारा करें गणना
इस फैसले का असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो रांची समेत झारखंड के अन्य शहरी क्षेत्रों में जमीन, फ्लैट या मकान खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। खासकर पहली बार संपत्ति खरीदने वाले लोगों को अब कीमत के साथ रजिस्ट्री से जुड़े सभी शुल्कों का हिसाब भी लगाना होगा।
खरीदारों को ध्यान रखना चाहिए कि संपत्ति की कीमत के अलावा स्टांप शुल्क, निबंधन शुल्क और लागू अतिरिक्त सरचार्ज जैसे खर्च भी बजट का हिस्सा होते हैं। इसलिए रजिस्ट्री कराने से पहले संबंधित निबंधन कार्यालय से देय राशि की जानकारी लेना उपयोगी होगा।
कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले से नगर निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में संपत्ति खरीदने वालों की जेब पर भी इसका असर पड़ेगा। नई व्यवस्था के लागू होने की प्रभावी तारीख और संबंधित औपचारिकताओं की जानकारी के लिए अंतिम सरकारी अधिसूचना देखना जरूरी होगा।
