जनरल और स्लीपर के बाद अब प्रीमियम कोच भी निशाने पर, यात्रियों ने हाउसकीपिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल; काकरोच के लिए स्प्रे, लेकिन चूहों के लिए इंतजाम नहीं होने का दावा
धनबाद। ट्रेनों में साफ-सफाई और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। इस बार मामला चूहों से जुड़ा है। यात्रियों का आरोप है कि ट्रेनों के सामान्य और स्लीपर कोच के बाद अब प्रीमियम श्रेणी के फर्स्ट एसी कोच में भी चूहों की आवाजाही देखने को मिल रही है। रात के समय सीटों और बर्थ के नीचे से चूहे निकलने की शिकायतें सामने आई हैं।
पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग ट्रेनों में यात्रियों ने चूहों की मौजूदगी को लेकर शिकायत की है। इनमें पाटलिपुत्र एक्सप्रेस, इस्लामपुर-हटिया ट्रेन और हावड़ा-कालका नेताजी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का नाम सामने आया है। यात्रियों के मुताबिक, रात के समय जब कोच में आवाजाही कम हो जाती है, तब चूहे सीटों के नीचे और अन्य हिस्सों से निकलकर इधर-उधर दौड़ते दिखाई देते हैं।
फर्स्ट एसी में भी नहीं मिली राहत
फर्स्ट एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए इस तरह की स्थिति ज्यादा परेशान करने वाली है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम श्रेणी का किराया देने के बावजूद अगर कोच में चूहों की समस्या का सामना करना पड़े तो रेलवे की साफ-सफाई और कीट नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब चूहे सीट या बर्थ के नीचे से अचानक निकलकर सामान के आसपास पहुंच जाते हैं। इससे न केवल असुविधा होती है, बल्कि सामान को नुकसान पहुंचने और खाने-पीने की चीजों के दूषित होने की आशंका भी बनी रहती है।
शिकायत पर हाउसकीपिंग स्टाफ के जवाब से यात्री हैरान
हावड़ा-कालका नेताजी एक्सप्रेस में चूहों की शिकायत से जुड़ा एक मामला विशेष रूप से चर्चा में है। यात्रियों ने चूहे की शिकायत लेकर ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ से संपर्क किया। यात्रियों के अनुसार, उन्हें बताया गया कि काकरोच के लिए स्प्रे उपलब्ध है, लेकिन चूहों को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कोई उपयुक्त स्प्रे या व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
यदि यात्रियों द्वारा बताई गई यह स्थिति सही है, तो इससे रेलवे के रोडेंट कंट्रोल यानी चूहा नियंत्रण सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, इस संबंध में रेलवे की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
सिर्फ सफाई से नहीं, नियमित रोडेंट कंट्रोल से रुकेगा मामला
रेलवे के कोचों में चूहों की मौजूदगी कोई नई समस्या नहीं है। चूहे अक्सर ट्रेन के ऐसे हिस्सों में पहुंच जाते हैं जहां यात्रियों की सीधी नजर नहीं जाती। कोच में खाने-पीने की चीजों के अवशेष, कचरा और अन्य खाद्य सामग्री इनके लिए आकर्षण का कारण बन सकती है।
यात्रियों का कहना है कि सिर्फ कोच की सामान्य सफाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए ट्रेनों और कोचिंग डिपो में नियमित पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल, खाद्य अवशेषों की सफाई, कचरा प्रबंधन और संभावित प्रवेश मार्गों को बंद करने जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
प्रीमियम किराया, लेकिन सफर में ‘चूहा सफारी’ क्यों?
रेलवे लगातार ट्रेनों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने और स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने पर जोर देता है। ऐसे में फर्स्ट एसी जैसे प्रीमियम कोच में चूहों की शिकायतें व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं।
यात्रियों का सीधा सवाल है कि जब उन्हें प्रीमियम कोच का किराया देना पड़ता है, तो बदले में उन्हें साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण मिलना भी रेलवे की जिम्मेदारी है। रात के समय सीट के नीचे से निकलते चूहों के कारण यात्रियों को आराम करने के बजाय अपने सामान और खाने-पीने की चीजों की चिंता करनी पड़े, तो यह निश्चित तौर पर गंभीर चिंता का विषय है।
अब देखना होगा कि रेलवे इन शिकायतों की जांच कर चूहों की समस्या के वास्तविक कारण का पता लगाता है या नहीं, और ट्रेनों में रोडेंट कंट्रोल की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


