पलामू के छतरपुर प्रखंड के रुदवा गांव में सुनील सिंह की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने का समाजसेवी रंजीत जायसवाल ने दिया भरोसा
छतरपुर। किसी बच्चे के लिए मां-बाप का साथ सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन रुदवा गांव के कुछ मासूमों की जिंदगी से यह सहारा महज एक महीने के भीतर छिन गया। पहले मां का निधन हुआ और अब एक सड़क हादसे में पिता सुनील सिंह की भी मौत हो गई। एक ही महीने में माता-पिता दोनों को खोने वाले इन बच्चों के लिए अब जिंदगी की राह बेहद मुश्किल हो गई है। इस दुखद घटना से छतरपुर प्रखंड के रुदवा गांव में मातम पसरा है।
जानकारी के अनुसार, छतरपुर प्रखंड के रुदवा गांव में हुए सड़क हादसे में सुनील सिंह की जान चली गई। करीब एक महीने पहले ही उनकी पत्नी का निधन हो चुका था। मां के जाने के बाद बच्चे अभी उस दुख से उबर भी नहीं पाए थे कि अब पिता की मौत ने उन्हें पूरी तरह बेसहारा कर दिया। जिस उम्र में बच्चों को माता-पिता की गोद और देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस उम्र में उनके सिर से दोनों का साया उठ गया।
मासूमों को देखकर भावुक हुए रंजीत जायसवाल
घटना की जानकारी मिलने पर पश्चिमी जिला परिषद प्रतिनिधि सह समाजसेवी रंजीत जायसवाल उर्फ फंटूस रुदवा गांव पहुंचे। उन्होंने सुनील सिंह के परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की। इसके बाद वे बच्चों से भी मिले और उन्हें ढांढस बंधाया। माता-पिता दोनों को खो चुके मासूमों की स्थिति देखकर रंजीत जायसवाल खुद भी भावुक हो गए।
उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में बच्चों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उनकी पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होने दी जाएगी। बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए वे हरसंभव सहयोग करेंगे।
बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी, मदद का दिया भरोसा
एक ओर परिवार इस असहनीय दुख से गुजर रहा है, वहीं बच्चों के सामने अब आगे की जिंदगी और पढ़ाई की चिंता भी है। ऐसे में रंजीत जायसवाल की ओर से दिया गया सहयोग का भरोसा परिवार के लिए संबल बना है। ग्रामीणों ने भी उनके इस मानवीय प्रयास की सराहना की है।
रुदवा गांव के इन मासूमों ने बहुत कम समय में ऐसा दुख झेला है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। मां के बाद पिता का साथ भी छूट गया। अब गांव और समाज से मिलने वाला सहयोग ही उनके जीवन को आगे बढ़ाने में सहारा बन सकता है।
