Monday, October 26
टाटा स्टील यूआईएसएल की ‘री-लाइफ’ पहल से कचरे में कमी और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा, 27 हजार किलो पुराने कपड़े मिले, 8 हजार किलो दोबारा इस्तेमाल के योग्य

जमशेदपुर/जासं। घरों में बेकार पड़े पुराने कपड़े, जूते-चप्पल, किताबें, खिलौने और अन्य घरेलू सामान अब किसी जरूरतमंद के लिए उपयोगी साबित होंगे। जमशेदपुर में टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (TSUISL) ने पुराने सामान को नया जीवन देने के उद्देश्य से एक अनोखी पहल शुरू की है। बिष्टुपुर स्थित जी टाउन क्लब के पास शुरू की गई इस पहल का नाम ‘री-लाइफ’ (Re-Life) रखा गया है। इसके तहत पुराने सामानों की सफाई और मरम्मत के बाद उन्हें बेहद कम कीमत पर लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंदों को सस्ते दाम पर उपयोगी वस्तुएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ कचरे को कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

इस योजना के तहत पुराने कपड़ों और अन्य उपयोगी वस्तुओं को फेंकने के बजाय उन्हें दोबारा इस्तेमाल के योग्य बनाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर पांच रुपये में थैला और 50 रुपये में जींस जैसी वस्तुएं उपलब्ध कराने की पहल लोगों को कम खर्च में जरूरी सामान खरीदने का विकल्प देगी। इससे उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिनके लिए नए कपड़े और घरेलू सामान खरीदना आर्थिक रूप से मुश्किल होता है।

तीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

री-लाइफ पहल के तहत पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और पुनः प्राप्ति यानी ‘Reuse, Recycle & Recovery’ को बढ़ावा देने के लिए तीन वाहनों को रवाना किया गया। टाटा स्टील यूआईएसएल के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर ने हरी झंडी दिखाकर इन वाहनों को रवाना किया। इन वाहनों के माध्यम से पुराने कपड़ों और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को एकत्र करने तथा उन्हें दोबारा उपयोग में लाने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाएगा।

कंपनी का मानना है कि शहर में बड़ी मात्रा में ऐसे कपड़े और घरेलू सामान मौजूद हैं, जिन्हें लोग अनुपयोगी समझकर फेंक देते हैं। जबकि थोड़ी सफाई, मरम्मत और उचित प्रसंस्करण के बाद इनमें से कई वस्तुएं फिर से इस्तेमाल की जा सकती हैं। इससे संसाधनों की बर्बादी कम होगी और कचरे के निस्तारण पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।

27 हजार किलो पुराने कपड़े मिले, 8 हजार किलो उपयोगी

कंपनी के अनुसार, इस पहल के शुरुआती चरण में ही उसे करीब 27 हजार किलोग्राम पुराने कपड़े प्राप्त हुए हैं। इनमें से लगभग 8 हजार किलोग्राम कपड़े दोबारा इस्तेमाल करने योग्य पाए गए। इन कपड़ों की सफाई और मरम्मत कर उन्हें नया रूप दिया जा रहा है, ताकि वे जरूरतमंद लोगों के इस्तेमाल में आ सकें।

यह आंकड़ा बताता है कि घरों में अनुपयोगी समझे जाने वाले सामान का बड़ा हिस्सा वास्तव में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि ऐसे सामान को व्यवस्थित तरीके से एकत्र कर उसका पुनः उपयोग किया जाए, तो इससे कचरे की मात्रा कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।

दान नहीं, सम्मान के साथ खरीदने का अवसर

टाटा स्टील यूआईएसएल के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर ने बताया कि वस्तुओं की कीमत जानबूझकर बहुत कम रखी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामान खरीदने वाले लोगों को यह महसूस न हो कि वे दान में मिली वस्तुएं ले रहे हैं। वे अपनी जरूरत के अनुसार कम कीमत चुकाकर सामान खरीद सकेंगे।

इस व्यवस्था के जरिए जरूरतमंद लोगों को सस्ती वस्तुएं उपलब्ध कराने के साथ उनके आत्मसम्मान का भी ध्यान रखा जाएगा। कंपनी के अनुसार, बिक्री से प्राप्त राशि का इस्तेमाल कर्मचारियों के वेतन और कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।

अनुपयोगी कपड़ों से बनेंगी दरी और कालीन

इस पहल में उन कपड़ों को भी बेकार नहीं जाने दिया जाएगा, जो मरम्मत के बाद भी पहनने योग्य नहीं होंगे। ऐसे कपड़ों से गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की मदद से दरी, कालीन और अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार की जाएंगी। इस तरह कपड़ों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

यह व्यवस्था सर्कुलर इकोनॉमी यानी ऐसी अर्थव्यवस्था की अवधारणा को बढ़ावा देती है, जिसमें संसाधनों को इस्तेमाल के बाद फेंकने के बजाय उन्हें दोबारा उपयोगी बनाया जाता है।

शहरवासी भी बन सकते हैं पहल का हिस्सा

जमशेदपुर के नागरिक अपने पुराने कपड़े नजदीकी पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट केंद्र या उपभोक्ता केंद्र में जमा कर सकते हैं। इसके बदले उन्हें ई-सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। इससे लोगों को पुराने सामान का जिम्मेदारीपूर्वक निस्तारण करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

री-लाइफ पहल सामाजिक सहयोग और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि शहरवासी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाते हैं, तो घरों में जमा पुराने सामान को जरूरतमंदों तक पहुंचाने, कचरा घटाने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिल सकती है।

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