एनटीपीसी (NTPC) बादम कोल खनन परियोजना क्षेत्र में सोमवार को ग्रामीणों और परियोजना अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। ग्राम बादम पहुंचे खनन अधिकारियों के वाहन को ग्रामीणों ने रोककर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ (CISF) के जवानों और अधिकारियों से ग्रामीणों ने हस्तक्षेप न करने की अपील की।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला और ग्रामीणों का रुख
ग्रामीणों ने सीआईएसएफ के अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई सुरक्षा बलों से नहीं, बल्कि कंपनी की कार्यप्रणाली से है। ग्रामीणों का कहना था कि सीआईएसएफ जवानों को कंपनी के गैर-संवैधानिक कदमों में उनका सहयोग नहीं करना चाहिए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि:
कंपनी ने अब तक विधिवत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं की है।
परियोजना को लेकर किसी भी प्रकार की ग्राम सभा की मंजूरी या सहमति प्राप्त नहीं की गई है।
’बाहरी’ व्यक्ति की मौजूदगी पर भड़का आक्रोश
विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब ग्रामीणों ने अधिकारियों की गाड़ी में कटकमदाग प्रखंड के ग्राम बेस निवासी साहब राणा को बैठा देखा। ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जमीन बादम और गोंदलपुरा के ग्रामीणों की है, जबकि कंपनी बाहरी लोगों को लाकर मध्यस्थता और दलाली कराने का प्रयास कर रही है।
लिखित समझौते के बाद शांत हुआ मामला
ग्रामीणों के कड़े रुख को देखते हुए सीआईएसएफ इंस्पेक्टर उदय कुमार की मौजूदगी में वार्ता हुई। ग्रामीणों की मांग पर दो मुख्य लिखित समझौते किए गए:
साहब राणा का बॉन्ड: साहब राणा ने सीआईएसएफ के समक्ष लिखित रूप से वचन दिया कि वह भविष्य में इस क्षेत्र में दोबारा प्रवेश नहीं करेगा।
कंपनी अधिकारी का आश्वासन: खनन परियोजना के अधिकारी ने लिखित रूप से स्वीकार किया कि बिना ग्राम सभा की सहमति के वे क्षेत्र में नहीं आएंगे।
सीआईएसएफ इंस्पेक्टर को इस लिखित पत्र का गवाह बनाया गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने साहब राणा और कंपनी के अधिकारियों के वाहन को सुरक्षित जाने दिया।
