Friday, October 30

शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है: राज्यपाल संतोष गंगवार

हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग का 11वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को आयोजित हुआ। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल-सह-झारखंड के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि डिग्री हासिल करना शिक्षा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसका वास्तविक मूल्य इस बात से तय होगा कि विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और देश के हित में किस तरह करते हैं।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि शिक्षित, कुशल, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिकों के योगदान से होगा।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई को अंतिम पड़ाव नहीं मानना चाहिए, बल्कि निरंतर सीखने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने की जरूरत है। ज्ञान के साथ विवेक और कौशल के साथ नैतिकता को भी महत्व देना जरूरी है।

आचार्य विनोबा भावे के विचारों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भू-दान आंदोलन के माध्यम से उन्होंने मानवता, करुणा, सामाजिक सहयोग और न्याय का संदेश दिया। उनके विचार प्रेरित करते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना भी होना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि भारत विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, डिजिटल सेवाओं, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप इंडिया, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहल युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। विद्यार्थियों को इन अवसरों का लाभ उठाते हुए नए विचारों को उद्यम का रूप देने का प्रयास करना चाहिए।

झारखंड की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध जनजातीय परंपराओं से परिपूर्ण इस राज्य की वास्तविक शक्ति यहां के युवाओं की प्रतिभा और परिश्रम है। उच्च शिक्षण संस्थानों को इस प्रतिभा को सही दिशा देते हुए शोध, नवाचार और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

राज्यपाल ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नैतिक मूल्यों को समान महत्व देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे विचारशील नागरिक तैयार करने चाहिए, जो अपने अधिकारों के प्रति सजग, कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम हों।

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