Friday, October 30

रांची: झारखंड में अस्पतालों और चिकित्सकों के लिए रेट चार्ट तथा विज्ञापनों को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की पहल पर अब वरिष्ठ डॉक्टरों की भी सहमति सामने आने लगी है। राज्य के वरिष्ठ सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञ ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि अस्पतालों में इलाज के खर्च की जानकारी मरीजों और उनके परिजनों को पहले से मिलनी चाहिए। इससे उन्हें इलाज से जुड़े आर्थिक फैसले लेने में आसानी होगी और अस्पतालों के बिल को लेकर होने वाली परेशानी कम होगी।

वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार, कई बार मरीजों को भर्ती करते समय इलाज का अनुमानित खर्च कुछ और बताया जाता है, लेकिन डिस्चार्ज के समय बिल में कई अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, शुरुआत में 15 हजार रुपये खर्च होने की बात कही जाती है, जबकि इलाज के बाद यह रकम बढ़कर 25 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। ऐसे में मरीज और उनके परिजन अचानक बढ़े हुए खर्च से परेशान हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों के रेट चार्ट में सभी जरूरी शुल्क स्पष्ट रूप से दर्ज होने चाहिए। मरीज को भर्ती करने से पहले इलाज, जांच, दवाइयों और अन्य संभावित खर्चों की जानकारी दी जानी चाहिए। यदि लोगों को पहले से पता होगा कि किस अस्पताल में इलाज का कितना खर्च आएगा, तो वे अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार अस्पताल और उपचार का विकल्प चुन सकेंगे।

चिकित्सक का मानना है कि कम खर्च बताकर मरीज को भर्ती करना और बाद में उससे अधिक राशि वसूलना उचित नहीं है। इस व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों के परिवार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने अस्पतालों के शुल्क को स्पष्ट और व्यवस्थित करने की पहल को स्वागत योग्य बताया।

वही सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद का कहना है कि कई मामलों में ऐसा होता था कि मृत्यु हो जाने के बाद भी पैसों के तंगी के कारण डेड बॉडी रोक दिया जाता था। अचानक से आर्थिक बोझ बढ़ जाने पर कई मामलों में परिवार वाले सक्षम नहीं हो पाते थे पैसे चुकता करना में । ऐसे में यह गंभीर मामला रहा है। इसी क्रम में रेट चार्ट में पारदर्शिता बेहद महत्वापूर्ण है। जो भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है उसे पूर्ण रूप से पारदर्शिता के साथ दिखाना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो कठोर कदम उठाये जायेंगे साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया जायेगा अस्पताल पर। एक सप्ताह के अंदर सभी निजी अस्पताल अपना रेट चार्ट लगा ले।

झारखंड में अस्पतालों के रेट चार्ट और विज्ञापनों को लेकर पारदर्शिता लाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के बीच वरिष्ठ चिकित्सकों का समर्थन इस चर्चा को और महत्वपूर्ण बना रहा है। अब देखना होगा कि इस पहल को किस तरह लागू किया जाता है और अस्पतालों में मरीजों को इलाज से जुड़े खर्च की स्पष्ट जानकारी किस स्तर पर उपलब्ध कराई जाती है।

Share.
Next Story
घोड़े पर घूमने वाले विधायक अनंत सिंह फिर तोड़ेंगे जेल की रोटियां ?
Exit mobile version