Saturday, October 31

रांची: झारखंड की जनजातीय कला, संस्कृति और उद्यमिता को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की पहल के तहत ‘द प्राइड ऑफ ट्राइब’ (TPOT) ने कतर की राजधानी दोहा में आयोजित 9वें वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट फोरम-2026 में भागीदारी की। इस दौरान जनजातीय हस्तशिल्प, फैशन, पर्यटन और स्थानीय उद्यमों की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने रखा गया। इसी पहल के तहत अब नेपाल ने रांची में प्रस्तावित नेशनल ट्राइबल फैशन वीक-2027 को आधिकारिक समर्थन देने की घोषणा की है।

TPOT की संस्थापक एवं निदेशक कांति गाड़ी के नेतृत्व में यह आयोजन 23 और 24 जनवरी 2027 को रांची में प्रस्तावित है। नेपाल का समर्थन मिलने से आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक भागीदारी का अवसर मिल सकता है। इसे भारत और नेपाल के जनजातीय समुदायों के बीच कला, संस्कृति और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

दोहा में जनजातीय उद्यमिता और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा

दोहा में आयोजित UNCTAD के वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट फोरम में TPOT की ओर से झारखंड की जनजातीय कला, पारंपरिक फैशन, हस्तशिल्प, पर्यटन और उद्यमिता से जुड़े विषयों को प्रस्तुत किया गया। इस दौरान नेपाल के थारू आदिवासी नेता और एशियन इंडीजिनस इंटरनेशनल नेटवर्क (AIIN) के कार्यकारी अध्यक्ष फूलमन चौधरी भी शामिल रहे।

कांति गाड़ी और फूलमन चौधरी के नेतृत्व में जनजातीय उद्यमियों, निवेशकों, डिजाइनरों, नीति-निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ व्यापारिक सहयोग, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसी संवाद के बाद नेपाल की ओर से नेशनल ट्राइबल फैशन वीक-2027 को समर्थन देने की पहल सामने आई।

भारतीय राजदूत से मुलाकात, एशियन ट्राइबल बिजनेस समिट पर चर्चा

दोहा प्रवास के दौरान कांति गाड़ी ने कतर में भारत के राजदूत से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रस्तावित एशियन ट्राइबल बिजनेस समिट पर भी चर्चा हुई। इस समिट की परिकल्पना एशिया और अन्य क्षेत्रों के जनजातीय उद्यमियों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।

नेपाल-झारखंड ट्राइबल टूरिज्म और होमस्टे सर्किट की योजना

TPOT की ओर से नेपाल और झारखंड के जनजातीय बहुल क्षेत्रों को जोड़ने के लिए ट्राइबल टूरिज्म एवं होमस्टे सर्किट की परिकल्पना भी प्रस्तुत की गई है। इसके तहत दोनों क्षेत्रों की स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन स्थलों को एक साझा नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।

इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय कारीगरों, बुनकरों, हस्तशिल्प निर्माताओं, पर्यटन गाइडों और होमस्टे संचालकों के लिए बाजार के नए अवसर तैयार करना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, स्वरोजगार और महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।

रांची में जनजातीय फैशन और परंपरा का संगम

23-24 जनवरी 2027 को प्रस्तावित नेशनल ट्राइबल फैशन वीक में पारंपरिक जनजातीय परिधानों, डिजाइनों, प्राकृतिक रंगों और स्थानीय कलात्मकता को आधुनिक फैशन के साथ प्रस्तुत करने की योजना है। आयोजकों के अनुसार, वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट फोरम के दौरान इस आयोजन का टीजर भी प्रदर्शित किया गया था।

इस मंच के जरिए जनजातीय डिजाइनरों, बुनकरों और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ उनकी कला को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

दुबई से दोहा और नेपाल तक अंतरराष्ट्रीय विस्तार की कोशिश

TPOT की ओर से इससे पहले 2025 में दुबई में ग्लोबल ट्राइबल बिजनेस फोरम का आयोजन शुरू किया गया था। संस्था अब सोहराय और कोहबर चित्रकला, टसर सिल्क, डोकरा शिल्प सहित झारखंड की पारंपरिक कलाओं को फैशन, पर्यटन और व्यापार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।

झारखंड के सामाजिक कार्यकर्ता और ट्राइबल लीडर अनिल अमिताभ पन्ना ने इस पहल के लिए कांति गाड़ी को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ‘गांव का हुनर, दुनिया का रैंप’ का संकल्प आदिवासी प्रतिभाओं और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

अब रांची में प्रस्तावित नेशनल ट्राइबल फैशन वीक के आयोजन और नेपाल की भागीदारी पर नजर रहेगी। यदि पर्यटन और व्यापार से जुड़ी प्रस्तावित योजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो इससे झारखंड के स्थानीय कलाकारों और उद्यमियों को नए अवसर मिल सकते हैं।

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