मोकामा के विधायक और JDU के पूर्व सदस्य अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने एक झटका दे दिया है, बिहार के प्रख्यात दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लेते हुए अनंत सिंह की जमानत को समाम्प्त कर दिया है और आत्मसमर्पण कर जेल जाने का आदेश दिया है, हालाँकि अनंत सिंह के वकील ने बेटी शिवांगी सिंह के शादी का हवाला देते हुए कुछ मोहलत मांगी है। शिवांगी की शादी 25 नवम्बर को बताया गया है जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक जेल लौटने का फैसला सुनाया है।
इसके साथ ही कोर्ट ने राज्यसरकार और पुलिस को भी चार महीने के अंदर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने का सख्त निर्देश दिया है। यह फैसला जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रस्सना बी. वराले की बेंच ने 30 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान लिया।
क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड ?
ये पूरा मामला 2025 बिहार के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुए हिंसा और उसमे 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की मौत से जुड़ा है. अक्टूबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मौकामा विधानसभा के टाल इलाके के तारतार गाँव के पास दो पार्टियों के समर्थको के बीच विवाद और हिंसक झड़प हो गया था इसमें एक तरफ मौकामा के बाहुबली और जेडीयू प्रत्यासी अनंत सिंह का काफिला था तो दूसरी तरफ जनसुराज के प्रत्यासी पियूष प्रियदर्शी समर्थन में लोग जुटे थे इसी दौरान दोनों के समर्थको के बीच हिंसक झड़प हो गई और इसमें जनसुराज के समर्थक दुलारचंद यादव की मौत हो गयी। जिसका मुख्य आरोपी अनंत सिंह को बताया गया. प्रारंभिक आरोप में मौत का कारण गोलीबारी बताई गयी थी। हालाँकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर यानी हृदय और श्वसन तंत्र का काम करना बंद करना बताया गया। साथ ही दिल और फेफड़ों को कठोर एवं भारी वस्तु से लगी चोट का भी जिक्र किया गया।
बताते चले कि दुलारचंद यादव जनसुराज पार्टी जाने से पहले जेडयू में भी काम कर चुके थे और इलाके में उनकी एक अलग राजनीतिक पहचान थी। इस पूरे मामले में बिहार पुलिस ने 1 नवम्बर 2025 को अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया . जेल में रहते हुए उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा और मौकामा के विधायक के रूप में जीत हासिल की। 19 मार्च 2026 को पटना हाइकोर्ट के जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा की अदालत ने अनंत को 15 हजार रुपये के बॉन्ड पर जमानत दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने किया जमानत रद्द !
पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अनंत सिंह के पोते नीरज सिंह ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनैती दी। याचिकाकर्ता ने अपने याचिका में ये दलील दी कि पटना कोर्ट ने जमानत देते वक्त उनकी पुरानी आपराधिक इतिहास और गतिविधियों और पर ध्यान नहीं दिया। इस पूरी याचिका में जेडीयू पार्टी के द्वारा जमा किये गए हलफनामे ने एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम किया जिसमें ये दावा किया गया कि अनंत सिंह के नाम पर 62 आपराधिक मामले दर्ज़ हैं जिनमे हत्या से जुड़े मामले, हत्या के प्रयास के मामले और अपहरण के मामले शामिल है , हालाँकि इस बात का मतलब ये नहीं है इन सभी मामलो में गुनेहगार अनंत सिंह ही है।
गौरतलब है बीते दिनों में जेडीयू पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से छह साल के लिए निष्काषित कर दिया था और उनपर पार्टी के नियमो के विरुद्ध जाने के आरोप लगे थे।
30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस जमानत के रद्द करने की याचिका पर सुनवाई की जिसमे अनंत सिंह की और से उनकी बेटी शिवांगी सिंह के शादी का हवाला दिया। बताया गया कि शिवांगी की शादी 25 नवंम्बर को निर्धारित है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शादी में शामिल होते हुए 1 दिसंबर को खुद को आत्मसमर्पण करने का निर्देश किया। गौरतलब है की कोर्ट ने उन्हें अनिश्चितकालीन जमानत नहीं है बल्कि निर्धारित तारीख तक जेल लौटने का आदेश दिया है।
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