Friday, October 23

रांची। झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के पांच महीने बाद भी पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा के लिए मिलने वाली राशि का इंतजार है। दुर्गापूजा बीत चुकी है और अब दीपावली व छठ जैसे बड़े त्योहार सामने हैं। ऐसे में बच्चों और उनके अभिभावकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि त्योहारों तक सरकार की ओर से निर्धारित सहायता मिल जाएगी। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने दीपावली के अंत तक सभी पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में राशि भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, राज्य के सभी स्कूलों में भुगतान और सामग्री वितरण की स्थिति अभी एक जैसी नहीं है।

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार, केंद्र सरकार से राशि का आवंटन हो चुका है। इसके बाद बच्चों को पोशाक और गर्म कपड़े उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की गई है। कई जिलों में बच्चों को इसका लाभ मिलना शुरू हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर वितरण भी पूरा किया जा चुका है। अब शेष पात्र विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है।

कक्षा के अनुसार 600 से 1200 रुपये तक का प्रावधान

समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा के लिए कक्षा के अनुसार सहायता देने का प्रावधान है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए प्रति छात्र 600 रुपये निर्धारित हैं।

इसमें दो सेट पोशाक के लिए 350 रुपये, स्वेटर के लिए 150 रुपये और जूता-मोजा के लिए 100 रुपये शामिल हैं। वहीं, कक्षा छह से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए 700 से 760 रुपये तक का प्रावधान बताया गया है। कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को पोशाक सहित निर्धारित सामग्री के लिए 1,200 रुपये देने की व्यवस्था है।

राशि और सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कक्षा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाने में संबंधित विद्यालयों और विभागीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कहीं भुगतान हुआ, कहीं अब भी बच्चों को इंतजार

राज्य के कुछ विद्यालयों में विद्यार्थियों को पोशाक की राशि या सामग्री मिल चुकी है, जबकि कई स्कूलों में अभी भी इंतजार बना हुआ है। ऐसे में जिलेवार स्थिति की समीक्षा करना जरूरी है, ताकि पता चल सके कि कितने पात्र बच्चों को लाभ मिल चुका है और कितने विद्यार्थियों का भुगतान लंबित है।

बैंक खातों की जानकारी, विद्यार्थियों के विवरण और सत्यापन से जुड़ी समस्याएं भुगतान में देरी का कारण बन सकती हैं। इसलिए लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना जरूरी है। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीकी या दस्तावेजी कमियों के कारण पात्र बच्चे योजना के लाभ से वंचित न रहें।

छोटे बच्चों के लिए अलग व्यवस्था, स्वयं सहायता समूहों की भी भूमिका

कक्षा एक और दो के छोटे बच्चों के बैंक खाते नहीं होने की स्थिति में स्कूल प्रबंधन समितियों या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा खरीदकर वितरित करने की व्यवस्था की जाती है। वहीं, अन्य पात्र विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए राशि भेजी जाती है या निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

कुछ जिलों में स्वेटर और जूता-मोजा की खरीद के लिए स्वयं सहायता समूहों तथा जेम पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया अपनाई जा रही है। खरीद और वितरण में देरी होने पर बच्चों को समय पर सामग्री नहीं मिल पाती। इसलिए विभागीय स्तर पर इन प्रक्रियाओं की निगरानी आवश्यक है।

ठंड बढ़ने से पहले स्वेटर और जूता-मोजा मिलना जरूरी

सर्दी का मौसम नजदीक आने के साथ ही बच्चों को गर्म कपड़े उपलब्ध कराने की जरूरत बढ़ गई है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों की पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा खरीदना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है।

सरकारी सहायता का उद्देश्य ऐसे परिवारों को राहत देना और बच्चों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना है। यदि राशि या सामग्री समय पर नहीं पहुंचती है, तो योजना का लाभ निर्धारित समय पर बच्चों तक नहीं पहुंच पाएगा।

दीपावली तक भुगतान पूरा करने की चुनौती

शिक्षा परियोजना परिषद ने दीपावली के अंत तक सभी पात्र बच्चों के बैंक खातों में राशि भेजने का लक्ष्य तय किया है। अब विभाग के सामने इस समयसीमा के भीतर भुगतान पूरा करने के साथ-साथ लंबित सामग्री वितरण सुनिश्चित करने की चुनौती है।

इसके लिए जिलावार प्रगति की नियमित समीक्षा, बैंक खातों से जुड़ी समस्याओं का समाधान और विद्यालय स्तर पर वितरण की निगरानी जरूरी होगी। फिलहाल अभिभावकों और विद्यार्थियों को उम्मीद है कि दीपावली तक उन्हें राहत मिल जाएगी। हालांकि, सभी पात्र बच्चों को तय समयसीमा में राशि या सामग्री मिल पाती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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