फर्जी चालान, WhatsApp और हवाला के जरिए तौर पर चलता था अवैध कारोबार; श्याम समूह की कंपनियों के निवेश भी जांच के दायरे में, धनबाद कनेक्शन पर भी उठ रहे सवाल
कोयले की कथित तस्करी से करोड़ों रुपये की कमाई और उस रकम को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए तरीकों ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र में कथित अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक 815.08 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। जांच के केंद्र में अनूप माझी उर्फ लाला के नेतृत्व वाला कथित कोयला सिंडिकेट है।
ED की जांच में कथित तौर पर ऐसा नेटवर्क सामने आया, जिसमें फर्जी परिवहन चालान, 10 या 20 रुपये के करेंसी नोट से जुड़े पहचान संकेत, WhatsApp के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान और हवाला के माध्यम से नकदी का लेनदेन शामिल था। एजेंसी का आरोप है कि इन तरीकों से अवैध रूप से निकाले गए कोयले को विभिन्न फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता था और उससे प्राप्त रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती थी।
17 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने हाल में 136.44 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां अटैच की हैं। इससे पहले एजेंसी 678.64 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुकी थी। इस तरह कुल राशि 815.08 करोड़ रुपये हो गई है।
10 रुपये के नोट से कैसे होता था ट्रकों की पहचान का कथित खेल?
ED की 15 अप्रैल 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में इस नेटवर्क के काम करने के तरीके का विस्तार से उल्लेख किया गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित सिंडिकेट में अवैध कोयला ले जाने वाले ट्रक, डंपर और टिपर के लिए एक खास पहचान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता था।
आरोप है कि ट्रांसपोर्टर को फर्जी चालान के साथ 10 या 20 रुपये का एक करेंसी नोट दिया जाता था। चालक उस नोट को वाहन की नंबर प्लेट के पास रखकर तस्वीर खींचता और WhatsApp के माध्यम से सिंडिकेट के संचालक तक भेजता था।
इसके बाद यह तस्वीर संबंधित मार्ग पर मौजूद पुलिस अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों तक भेजे जाने का आरोप है। ED के अनुसार, इस व्यवस्था का कथित उद्देश्य वाहनों को रास्ते में रोके जाने से बचाना या रोके जाने की स्थिति में उन्हें जल्द छुड़ाना था।
इस मामले में करेंसी नोट की भूमिका केवल भुगतान तक सीमित नहीं बताई गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, नोट की तस्वीर और वाहन की नंबर प्लेट को मिलाकर एक तरह का पहचान संकेत तैयार किया जाता था, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर कोयले से लदे वाहनों की आवाजाही में किया जाता था।
हालांकि, इस कथित व्यवस्था में किन-किन अधिकारियों की भूमिका थी, यह संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा।
‘लाला पैड’ से चोरी के कोयले को वैध दिखाने का आरोप
जांच का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा ‘लाला पैड’ नामक कथित अवैध परिवहन चालान प्रणाली है। ED के अनुसार, यह व्यवस्था ऐसी फर्जी कंपनियों के नाम पर बनाए गए चालानों पर आधारित थी, जिनका वास्तविक अस्तित्व नहीं था।
आरोप है कि ECL के लीज क्षेत्र से निकाले गए अवैध कोयले को इन चालानों के सहारे परिवहन किया जाता था। इससे कोयले की वास्तविक उत्पत्ति और उसकी आपूर्ति से संबंधित जानकारी छिपाने में मदद मिलती थी।
जांच एजेंसी का कहना है कि कथित नेटवर्क के जरिए कोयला पश्चिम बंगाल की विभिन्न फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में अवैध खनन, परिवहन और बिक्री को एक संगठित व्यवस्था के तहत संचालित किए जाने का आरोप है।
हवाला नेटवर्क से नकदी का लेनदेन, बैंकिंग व्यवस्था से बचने का आरोप
ED की जांच में कथित हवाला नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। एजेंसी के मुताबिक, अवैध कोयला कारोबार से प्राप्त रकम को सामान्य बैंकिंग माध्यमों के बजाय नकदी के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता था।
जांच में करेंसी नोट के सीरियल नंबर को पहचान के संकेत के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। आरोप है कि रकम भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के बीच नोट के नंबर का मिलान किया जाता था। पहचान की पुष्टि होने के बाद बिना सामान्य बैंकिंग रिकॉर्ड के नकदी सौंप दी जाती थी।
ED को आशंका है कि इस तरीके का इस्तेमाल अवैध कारोबार से प्राप्त आय के वास्तविक स्रोत और उसके लाभार्थियों को छिपाने के लिए किया गया। एजेंसी इन लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन लोगों और कंपनियों तक पहुंची।
श्याम समूह की कंपनियों के निवेश भी जांच के दायरे में
ED की अप्रैल 2026 की कार्रवाई में श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड और श्याम फेरो अलॉयज लिमिटेड से जुड़े निवेश का भी उल्लेख किया गया था। ये कंपनियां श्याम समूह का हिस्सा हैं। एजेंसी की प्रेस विज्ञप्ति में इनके प्रबंधन और नियंत्रण का संबंध संजय अग्रवाल तथा बृजभूषण अग्रवाल से बताया गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ लाभार्थी कंपनियों ने कथित तौर पर अवैध रूप से निकाले गए कोयले को नकद में खरीदा। इससे अवैध कारोबार से प्राप्त आय को छिपाने और उसे वैध कमाई के रूप में पेश करने में मदद मिली।
अप्रैल की कार्रवाई में कॉरपोरेट बॉन्ड और वैकल्पिक निवेश फंड जैसे वित्तीय साधनों में रखे गए निवेश भी अटैच किए गए थे। ED इन निवेशों और कथित अपराध से प्राप्त आय के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी कंपनी या व्यक्ति का जांच में नाम आने मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता। संबंधित आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
₹159.51 करोड़ से ₹815.08 करोड़ तक कैसे पहुंचा आंकड़ा?
लाला सिंडिकेट से जुड़े मामले में संपत्तियों की अटैचमेंट अलग-अलग चरणों में हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2026 में ED ने 159.51 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां अटैच की थीं। उस समय मामले में कुल अटैच संपत्तियों का मूल्य 482.22 करोड़ रुपये बताया गया था।
इसके बाद संपत्तियों की पहचान और वित्तीय जांच आगे बढ़ी। अक्टूबर 2026 की ताजा कार्रवाई में 136.44 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई। इससे पहले अटैच संपत्तियों का मूल्य 678.64 करोड़ रुपये था।
इस प्रकार ताजा आंकड़ा 815.08 करोड़ रुपये है। अप्रैल में बताई गई 159.51 करोड़ रुपये की कार्रवाई पहले के चरण की है; इसे अक्टूबर की नई कार्रवाई के साथ अलग से जोड़कर कुल राशि नहीं निकालनी चाहिए।
पुरुलिया और बांकुड़ा के रिसॉर्ट भी कार्रवाई के दायरे में
ED की ताजा कार्रवाई में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित गढ़ पंचकोट इको टूरिज्म और बांकुड़ा स्थित बिहारीनाथ इको टूरिज्म नामक दो होटल-सह-रिसॉर्ट शामिल हैं। इसके अलावा कोलकाता की दो संपत्तियों, कथित शेल कंपनियों के बैंक खातों में जमा रकम तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर शेयर और म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश को भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।
जांच एजेंसी इन संपत्तियों को कथित अवैध कोयला कारोबार से प्राप्त आय से जोड़कर देख रही है। उसका उद्देश्य संपत्तियों के वास्तविक लाभार्थियों और निवेश तक पहुंचने वाली रकम के स्रोत का पता लगाना है।
धनबाद कनेक्शन पर भी नजर, लेकिन तथ्यों की पुष्टि जरूरी
झारखंड के धनबाद और निरसा जैसे कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन तथा कोयले के परिवहन का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। ऐसे में लाला सिंडिकेट की जांच के संदर्भ में झारखंड कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, धनबाद में किसी विशेष व्यक्ति, कारोबारी या जनप्रतिनिधि की भूमिका अथवा CBI की किसी खास कार्रवाई की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट जरूरी है। इसलिए जांच से जुड़े ठोस दस्तावेजों के बिना किसी व्यक्ति को इस नेटवर्क का हिस्सा बताना उचित नहीं होगा।
जांच का दायरा बढ़ा, अब वास्तविक लाभार्थियों की पहचान पर जोर
ED की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कथित अवैध कोयला कारोबार से अर्जित आय का पता लगाना, उसके हस्तांतरण की कड़ियों को जोड़ना और संपत्तियों के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना है।
फर्जी चालान, करेंसी नोट के जरिए पहचान, WhatsApp संदेशों और कथित हवाला लेनदेन से जुड़ी जानकारी इस मामले को केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क की जांच को भी महत्वपूर्ण बनाती है।
फिलहाल मामले में जांच जारी है। आने वाले समय में एजेंसी की ओर से सामने आने वाले दस्तावेजों और आधिकारिक बयानों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नेटवर्क में अन्य किन लोगों और संस्थाओं की भूमिका रही तथा अवैध कारोबार से प्राप्त रकम का अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ।
