Friday, October 23

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

कैंसर की दवाओं पर 30% तक सीमित किया गया ट्रेड मार्जिन

दवा कंपनियों, अस्पतालों और खुदरा विक्रेताओं को नई दरें लागू करने का निर्देश

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज पर होने वाले भारी खर्च से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने कैंसर की 137 गैर-अनुसूचित दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने का फैसला किया है। इस कदम से संबंधित दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) में मौजूदा मूल्य संरचना के आधार पर 70 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। सरकार का उद्देश्य कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाना, दवाओं की उपलब्धता बढ़ाना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के तहत आने वाले राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने जनहित में यह कदम उठाया है। मंत्रालय की ओर से 17 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के मुताबिक, इस पहल के तहत कैंसर की उन 137 दवाओं को शामिल किया गया है, जिनकी कीमतों और वितरण व्यवस्था में ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने की जरूरत महसूस की गई थी।

137 कैंसर दवाओं पर लगेगी ट्रेड मार्जिन की सीमा

सरकार के इस फैसले के तहत चयनित 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य के आधार पर ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। यह कदम औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत उठाया गया है।

ट्रेड मार्जिन वह अंतर होता है, जो दवा की खरीद कीमत और वितरण या खुदरा बिक्री के दौरान निर्धारित बिक्री कीमत के बीच संबंधित व्यापारिक स्तरों पर जुड़ता है। दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में अत्यधिक मार्जिन होने पर मरीजों को एक ही दवा के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार का प्रयास है कि इस अंतर को नियंत्रित करके मरीजों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

हालांकि, सभी दवाओं की कीमतों में समान रूप से 70 प्रतिशत की कमी नहीं होगी। कीमतों में वास्तविक बदलाव प्रत्येक दवा की मौजूदा मूल्य संरचना और संशोधित दरों पर निर्भर करेगा।

9 नवंबर से लागू होंगी संशोधित कीमतें

एनपीपीए के निर्देश के अनुसार, सभी संबंधित दवा निर्माताओं को राजपत्र अधिसूचना प्रकाशित होने के सात दिनों के भीतर अपनी संशोधित कीमतों की जानकारी प्राधिकरण को देनी होगी। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी।

निर्माताओं को अपनी वेबसाइट पर संशोधित मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी। इसके साथ ही खुदरा दवा विक्रेताओं और अस्पतालों तक नई कीमतों की जानकारी व्यापक रूप से पहुंचानी होगी, ताकि मरीजों को निर्धारित तिथि से कम कीमत पर दवाएं मिल सकें।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि खुदरा दवा दुकानों और अस्पतालों को भी 9 नवंबर से संशोधित दरों के अनुसार दवाओं की बिक्री करनी होगी। अस्पतालों को अपनी वेबसाइटों पर भी नई कीमतें प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होंगी।

पहले भी 526 ब्रांड की दवाओं के दाम घटे थे

कैंसर की दवाओं को सस्ता करने की दिशा में यह सरकार की पहली पहल नहीं है। एनपीपीए ने वर्ष 2019 में भी ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन यानी व्यापारिक मार्जिन को तर्कसंगत बनाने की योजना पर काम किया था।

उस समय 42 कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया था। इस कार्रवाई के बाद गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के 526 ब्रांड की अधिकतम खुदरा कीमतों में 90 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई थी।

अब सरकार ने उसी अनुभव के आधार पर इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया है। इस बार शामिल दवाओं की सूची स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार की गई है।

विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर हुआ फैसला

कैंसर की 137 दवाओं के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति में देश के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञों, चिकित्सा विशेषज्ञों, विभिन्न अस्पतालों के जानकारों और सरकारी अधिकारियों को शामिल किया गया था।

समिति ने मरीजों के हित, दवाओं की कीमतों और उपचार की जरूरतों पर विचार करने के बाद इन दवाओं को ट्रेड मार्जिन नियंत्रण के दायरे में लाने की सिफारिश की। सरकार ने कहा है कि आवश्यकता के अनुसार इस सूची की समय-समय पर समीक्षा और अद्यतन भी किया जाएगा।

इस व्यवस्था का मकसद केवल दवाओं की कीमत घटाना नहीं, बल्कि कैंसर के उपचार तक मरीजों की पहुंच बेहतर बनाना भी है। कैंसर का इलाज अक्सर लंबे समय तक चलता है और कई मरीजों को लगातार महंगी दवाओं की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कीमतों में कमी परिवारों के कुल उपचार खर्च को कम करने में मददगार हो सकती है।

अस्पतालों और दवा दुकानों की होगी जिम्मेदारी

कैंसर की दवाओं की बड़ी मात्रा सीधे अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से मरीजों तक पहुंचती है। इसलिए नई व्यवस्था को लागू करने में अस्पतालों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

सरकार ने कहा है कि अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को लागू होने की तारीख से संशोधित कीमतों का पालन सुनिश्चित करना होगा। राज्य औषधि नियंत्रकों को भी निर्देशों के अनुपालन की निगरानी करनी होगी।

निर्माताओं, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं, अस्पतालों और अन्य संबंधित संस्थानों को निर्धारित कीमतों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की ओर से तय की गई कीमतों में कमी का वास्तविक लाभ मरीजों तक पहुंचे।

मरीज कैसे जांच सकेंगे दवाओं की नई कीमत?

मरीज और उनके परिजन दवाओं की संशोधित कीमतों की जानकारी के लिए एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट https://nppa.gov.in/en का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, दवाओं की कीमतों की जांच के लिए ‘फार्मा सही दाम’ ऐप भी उपलब्ध है।

दवा खरीदते समय मरीजों को पैक पर दर्ज अधिकतम खुदरा मूल्य और उपलब्ध संशोधित मूल्य सूची की जांच करनी चाहिए। यदि किसी दवा की कीमत को लेकर संदेह हो, तो संबंधित अस्पताल या दवा विक्रेता से संशोधित दर की पुष्टि की जा सकती है।

दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीमतों को नियंत्रित करने के साथ-साथ दवाओं की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना भी जरूरी है। इस व्यवस्था में दवा कंपनियों की वैध आय और बाजार में दवाओं की उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।

संबंधित कंपनियों को अधिसूचित दवाओं के मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति स्तर को बनाए रखना होगा, ताकि कीमतों में बदलाव के कारण मरीजों को दवाओं की कमी का सामना न करना पड़े।

कैंसर मरीजों के परिवारों को मिलेगी आर्थिक राहत

कैंसर का इलाज मरीज के साथ-साथ पूरे परिवार के लिए आर्थिक और मानसिक चुनौती बन जाता है। जांच, अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों की बचत पर भारी पड़ता है।

ऐसे में 137 कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने का फैसला उपचार खर्च कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि मरीज कौन-सी दवा इस्तेमाल कर रहा है और उसकी संशोधित कीमत कितनी तय होती है।

कुल मिलाकर, 9 नवंबर 2026 से लागू होने वाली यह व्यवस्था कैंसर के उपचार को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। इसका वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब निर्माता से लेकर अस्पताल और खुदरा दवा विक्रेता तक सभी नई कीमतों का पालन करें और मरीजों को निर्धारित दरों पर दवाएं उपलब्ध हों।

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