गुमला: बच्चों को यौन अपराधों, साइबर जोखिम और असुरक्षित व्यवहार से बचाने के लिए गुमला जिले के सभी विद्यालयों में 23 से 31 अक्टूबर तक सुरक्षित बचपन अभियान चलाया जाएगा। झारखंड शिक्षा परियोजना, गुमला की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकार के समन्वय से आयोजित इस अभियान में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम, बाल अधिकार, गुड टच-बैड टच और व्यक्तिगत सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी।
उप विकास DC अनिमेष रंजन के मार्गदर्शन और DC दिलेश्वर महतो के नेतृत्व में चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें असुरक्षित परिस्थितियों में मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित करना है। जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खलखो के अनुसार, सभी विद्यालयों को जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने और चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 का प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया है। प्रखंड एवं संकुल स्तर के पदाधिकारी, सीआरपी और बीआरपी अभियान की गतिविधियों की निगरानी करेंगे।
हर दिन अलग विषय पर जागरूकता गतिविधियां
अभियान के तहत 23 अक्टूबर को पॉक्सो अधिनियम और बाल अधिकार जागरूकता दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान प्रार्थना सभा में विशेष संबोधन, कानूनी संरक्षण की जानकारी और पोस्टर-स्लोगन लेखन जैसी गतिविधियां होंगी। 24 अक्टूबर को गुड टच-बैड टच और व्यक्तिगत सुरक्षा पर जागरूक किया जाएगा, जबकि 26 अक्टूबर को घर, स्कूल और रास्ते में सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार की पहचान करना सिखाया जाएगा।
27 अक्टूबर को ऑनलाइन सुरक्षा और साइबर बाल अपराध से बचाव, 28 अक्टूबर को बच्चों को अपनी बात निडर होकर रखने और विश्वसनीय व्यक्ति से मदद लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। 29 अक्टूबर को सम्मान, सहमति, व्यक्तिगत सीमाओं और लैंगिक समानता पर गतिविधियां होंगी। 30 अक्टूबर को अभिभावकों और शिक्षकों के साथ संवाद कर बच्चों की बात सुनने और उनके व्यवहार में बदलाव पहचानने पर चर्चा की जाएगी।
31 अक्टूबर को अभियान का समापन बाल सुरक्षा संकल्प के साथ होगा। इस दिन पोस्टर, चित्रकला, स्लोगन और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के अलावा चाइल्ड हेल्पलाइन एवं आपातकालीन सेवाओं की जानकारी दी जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा और गोपनीयता पर जोर
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी गतिविधियां बच्चों की उम्र और कक्षा के अनुरूप बाल-अनुकूल तरीके से आयोजित की जाएं। यदि कोई बच्चा उत्पीड़न या यौन अपराध से जुड़ी जानकारी साझा करता है, तो उसकी सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता का ध्यान रखते हुए पॉक्सो अधिनियम के तहत निर्धारित रिपोर्टिंग प्रक्रिया का पालन करना होगा।
प्रशासन का उद्देश्य स्कूलों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी से ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां बच्चे अपने अधिकारों को समझें और किसी भी असुरक्षित स्थिति में बिना डर के मदद मांग सकें।
