बोकारो: जिले में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने और हाथियों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने को लेकर उपायुक्त अजय नाथ झा ने संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। समाहरणालय में हुई बैठक में हाथियों के आवागमन वाले रास्तों को सुरक्षित रखने, समय पर लोगों को चेतावनी देने, जंगलों में भोजन-पानी की उपलब्धता बढ़ाने और आसपास के जिलों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में नमामि गंगे के तहत तेलमोच्चो पुल के पास प्रस्तावित घाट और रिवरफ्रंट विकास योजना की भी समीक्षा हुई।
गोमिया में हाथियों के रास्तों का सर्वे
वन विभाग ने मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों और हाथियों के पारंपरिक रास्तों को चिह्नित करने का काम किया है। बैठक में बताया गया कि गोमिया प्रखंड में करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया है। इसमें हाथियों के आने-जाने के रास्ते, प्रवेश और निकास स्थल तथा पूर्व में जनहानि, लोगों के घायल होने, मकान और फसल क्षति वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है।
लुगुबुरू, झुमरा पहाड़ के निचले क्षेत्र, मिर्जापुर और तेनुघाट डैम के आसपास हाथियों की गतिविधियों वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। लुगुबुरू से हजारीबाग की ओर जाने वाले हाथियों के रास्ते पर भी निगरानी रखी जा रही है।
कैमरे और सायरन से मिलेगी पहले चेतावनी
हाथियों की मौजूदगी की जानकारी समय पर लोगों तक पहुंचाने के लिए कैमरे, थर्मल कैमरा, सूचना संदेश और सायरन आधारित चेतावनी व्यवस्था विकसित की जा रही है। गोमिया क्षेत्र में करीब छह कैमरे लगाए जा रहे हैं, जबकि इनके संचालन के लिए लालपनिया में नियंत्रण कक्ष बनाया जा रहा है।

डीसी ने निर्देश दिया कि सड़क, पुल, राजमार्ग, खनन या अन्य निर्माण कार्यों के कारण हाथियों के पुराने रास्ते बाधित नहीं होने चाहिए। जरूरत पड़ने पर हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास या ऊपर से रास्ते की व्यवस्था करने पर भी विचार किया जाए। निर्माण स्थलों पर मलबा और निर्माण सामग्री हाथियों के रास्ते में नहीं रखने का निर्देश दिया गया।
जंगल में ही भोजन-पानी की व्यवस्था पर जोर
मानव बस्तियों की ओर हाथियों के आने की संभावना कम करने के लिए जंगलों में उनके लिए पर्याप्त भोजन की व्यवस्था पर जोर दिया गया। इसके लिए बांस और स्थानीय प्रजातियों के पौधों का अधिक से अधिक रोपण करने की योजना है। मिर्जापुर और तेनुघाट डैम के आसपास करीब 50 एकड़ क्षेत्र में बांस लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा जंगल के बाहर खाली जमीन की पहचान कर वहां भी पौधरोपण करने का निर्देश दिया गया।
सोलर फेंसिंग और मधुमक्खी पालन का सुझाव
हाथियों के संवेदनशील आवागमन वाले इलाकों में सोलर फेंसिंग लगाने का सुझाव दिया गया। साथ ही मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। फूलदार पौधे और झाड़ियां लगाने से मधुमक्खियों के लिए भोजन उपलब्ध होगा और स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त आय का साधन भी विकसित किया जा सकेगा।
तीन जिलों के बीच बनेगा बेहतर समन्वय
डीसी ने बोकारो, रामगढ़ और हजारीबाग समेत आसपास के जिलों के बीच हाथियों की गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने को कहा। इसका उद्देश्य हाथियों की मौजूदगी की सूचना दूसरे क्षेत्रों तक समय पर पहुंचाना और लोगों को पहले से सतर्क करना है।
तेलमोच्चो में 280 मीटर क्षेत्र में विकसित होगा रिवरफ्रंट
बैठक में तेलमोच्चो पुल के पास प्रस्तावित घाट और रिवरफ्रंट की योजना भी प्रस्तुत की गई। करीब 280 मीटर क्षेत्र में घाट के साथ पैदल चलने का रास्ता, पार्किंग, प्रवेश द्वार, बैठने की व्यवस्था, बच्चों के लिए खुला स्थान, सेल्फी प्वाइंट, प्रतीक्षालय, महिला और पुरुष शौचालय, कपड़े बदलने की जगह तथा हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है।
रिवरफ्रंट में बोकारो की औद्योगिक पहचान के साथ झारखंड की संस्कृति, सोहराय कला, दामोदर नदी और जिले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को प्रदर्शित करने की योजना है। योजना में बारिश के पानी की निकासी और हरियाली का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
बैठक में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार, संलग्न पदाधिकारी संदीप शिंदे, डीडीसी शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, अपर नगर आयुक्त संजीव कुमार, जिला खनन पदाधिकारी रवि कुमार, नमामि गंगे के नोडल पदाधिकारी शक्ति कुमार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


