रांची, 12 अगस्त: अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर बुधवार को बाल कल्याण संघ और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के संयुक्त तत्वावधान में ‘बाल श्रम- बाल तस्करी से आजादी’ विषय पर स्टेकहोल्डर परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसमें विभिन्न राज्यों से बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम कर रहे स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारियों, बाल कल्याण समितियों के सदस्यों के साथ करीब 200 युवाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम में बाल तस्करी और बाल श्रम की रोकथाम के साथ बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और बाल संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी दौरान बाल श्रम उन्मूलन के लिए राज्य कार्ययोजना (State Action Plan) भी लॉन्च की गई।
हर बच्चे को शिक्षा और सुरक्षित बचपन मिले: राज्यपाल
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि खासकर सुदूर ग्रामीण और कमजोर क्षेत्रों में बाल संरक्षण को लेकर लगातार सजगता और संवेदनशीलता की जरूरत है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। विद्यालय से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ना समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि गरीबी, असुरक्षा, शोषण और बाल तस्करी जैसी परिस्थितियों से प्रभावित बच्चों के साथ संवेदनशीलता से काम करने की आवश्यकता है। हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि जिस उम्र में बच्चे को स्कूल जाना चाहिए, अगर उसी उम्र में वह मजदूरी करने या तस्करी और शोषण का शिकार होने को मजबूर होता है, तो इसका असर केवल उसके बचपन पर नहीं पड़ता, बल्कि समाज और देश की प्रगति भी प्रभावित होती है।
उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से बच्चों की शिक्षा, संरक्षण, देखभाल और कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत@2047 का संकल्प तभी मजबूत होगा, जब देश का हर बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और स्वस्थ हो तथा उसे आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।
पिछले वित्तीय वर्ष में 2700 निरीक्षण, 59 मामलों में FIR
श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव जितेंद्र कुमार सिंह ने बाल श्रम के खिलाफ विभाग की कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 2700 निरीक्षण किए गए, जबकि 59 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई। इस दौरान झारखंड के 71 बच्चों का विद्यालय में नामांकन कराया गया।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक 812 निरीक्षण किए जा चुके हैं और 52 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है।
उन्होंने कहा कि केवल कानून किसी बच्चे को नहीं बचा सकता, बल्कि कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले लोगों की सक्रिय भूमिका जरूरी है। बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन, श्रम विभाग, पुलिस, बाल कल्याण समिति, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
सचिव ने खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जैसे संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बताई। उन्होंने अधिकारियों से कार्यक्रम में सामने आए सुझावों को अपने-अपने जिलों में लागू कर ठोस परिणाम हासिल करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम या तस्करी से मुक्त कराया गया प्रत्येक बच्चा महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लौटाया गया बचपन और खुला हुआ भविष्य है।
सिर्फ रेस्क्यू नहीं, पुनर्वास भी जरूरी
पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के लिए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था और एक समग्र योजना की जरूरत है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार से पुनर्मिलन, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास को शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी बड़ी ताकत है। युवाओं की ऊर्जा और क्षमता को कौशल और हुनर में बदलकर उन्हें सही दिशा और अवसर देने की जरूरत है। बाल श्रम के मामलों में अधिकारियों को बाल हित और बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्य केवल बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें शिक्षा, सुरक्षा, परिवार, कौशल और सम्मानजनक भविष्य से जोड़ना भी जरूरी है।
अगले पांच वर्षों में बाल श्रम खत्म करने की रणनीति
कार्यक्रम में बाल कल्याण संघ के संस्थापक संजय मिश्रा ने अगले पांच वर्षों में बाल श्रम को समाप्त करने की दिशा में संगठन की रणनीति प्रस्तुत की। इसी अवसर पर बाल कल्याण संघ और ILO के संयुक्त तत्वावधान में राज्य कार्ययोजना का शुभारंभ किया गया।
कार्ययोजना में बाल श्रम की रोकथाम, बच्चों की पहचान और बचाव, पुनर्वास, शिक्षा से जोड़ने तथा बच्चों और उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इसके लिए सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और समुदाय के बीच समन्वित प्रयासों को मजबूत करने की बात कही गई है।
युवाओं को बाल संरक्षण अभियान से जोड़ने पर जोर
ILO के डिप्टी डायरेक्टर ओक्तावियो ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही दिशा में इस्तेमाल कर बाल श्रम और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं को बाल संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदार बनाने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी से समुदाय के स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ बाल संरक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में बाल अधिकारों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पक्षों पर चर्चा के साथ राज्य में बाल श्रम और बाल तस्करी के खिलाफ प्रशासन, संस्थाओं, युवाओं और समाज के सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने का संदेश दिया गया।


