हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। भगवान विश्वकर्मा को सृजन और निर्माण का प्रतीक माना जाता है और उनके अनुयायी विशेष रूप से कारीगर, शिल्पकार, इंजीनियर्स और विभिन्न निर्माण से जुड़े लोग होते हैं। इस दिन विशेष रूप से औजारों, उपकरणों, कारखानों, कार्यस्थल और मशीनों की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा-आराधना करने से सुख-सुविधा, उन्नति और कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। इस दिन पूजा करने से आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिलता है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन औजारों और कारखानों की विशेष पूजा होगी। पंचांग के मुताबिक, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 58 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।
जानें विश्वकर्मा पूजन की सही विधि
विश्वकर्मा पूजन के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें और फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए गंगाजल से प्रतिमा का जलाभिषेक करें और फिर घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा में रोली, अक्षत, फल, फूल और मिठाई अर्पित करें। साथ ही कार्यस्थल पर रखे मशीनों, औजारों और अन्य उपकरणों को रोली, अक्षत, फूल अर्पित करके प्रणाम करें।
पूजन सामग्री की सूची
विश्वकर्मा पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति, लकड़ी की चौकी, पीला कपड़ा, कलश, जनेऊ, हल्दी, रोली, अक्षत, सुपारी, मौली, लौंग, कपूर, देसी घी, फल, मिठाई और इत्र-शहद आदि शामिल हैं।
पूजा के अंत में की जाती है आरती
पूजा-विधि पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा की आरती करते हैं, जिसमें उन्हें सृष्टि के रचनाकार और कारीगरों के रक्षक के रूप में स्तुति की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक आरती करने से सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा करने से कार्यक्षेत्र में उन्नति, व्यापार में वृद्धि और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है, इसलिए कारीगर, इंजीनियर और उद्योग से जुड़े लोग इस दिन विशेष श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है।
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