Tuesday, September 22

यरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद, जो इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है और दुनिया भर के लाखों मुसलमानों के लिए आस्था का केंद्र है, एक बार फिर विवादों के गहरे साये में आ गई है। फिलिस्तीनी निगरानी संगठन अल-कुद्स इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि इजराइल ने मस्जिद परिसर में मौजूद चार अहम इमारतों को जबरन खाली करा दिया है। ये सभी इमारतें जॉर्डन समर्थित इस्लामिक वक्फ के प्रशासनिक और धार्मिक कामों के लिए इस्तेमाल की जाती थीं, जो दशकों से इस पवित्र स्थल का प्रबंधन संभाल रहा है। यह घटना सिर्फ इमारतों को खाली कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे अल-अक्सा मस्जिद के भविष्य और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयासों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अल-अक्सा मस्जिद: विवाद की नई जड़ें और चिंताएँ

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अल-कुद्स इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन का कहना है कि इजराइली अधिकारियों ने “सुरक्षा खतरे” का हवाला देकर इन इमारतों को निशाना बनाया है। हालांकि, फिलिस्तीनी पक्ष इस दावे को सिरे से खारिज करता है और इसे अल-अक्सा परिसर पर इजराइली नियंत्रण बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मानता है। पिछले कुछ महीनों में, इजराइली सेना ने इन परिसरों पर कई बार छापे मारे हैं, उनके ताले तोड़ दिए हैं, और बाद में नए ताले लगाने की इजाजत भी नहीं दी। इसके परिणामस्वरूप, ये महत्वपूर्ण इमारतें अब खुली छोड़ दी गई हैं और किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने से रोका जा रहा है, जिससे परिसर के प्रबंधन और रखरखाव में बड़ी बाधा आ रही है।

कौन सी इमारतें हुईं खाली?

जिन चार परिसरों को खाली कराया गया है, उनमें इमाम अल-गजाली गुम्बद, दार अल-हदीस अल-शरीफ, कुब्बत सुलेमान और कुब्बत मूसा शामिल हैं। यह कोई सामान्य घटना नहीं है क्योंकि ये चारों इमारतें अल-अक्सा परिसर के चार अलग-अलग कोनों में स्थित हैं। फिलिस्तीनी संगठन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह कोई महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और समन्वित कदम है जिसका उद्देश्य परिसर के विभिन्न हिस्सों पर इजराइली प्रभुत्व स्थापित करना है। इन इमारतों का खाली होना, वक्फ अधिकारियों के लिए एक बड़ा झटका है, जो पहले से ही परिसर में अपने कर्तव्यों का पालन करने में कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

स्थायी नियंत्रण की ओर इजराइल का कथित कदम

अल-कुद्स इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन का दावा है कि इन परिसरों को खाली कराने का असली मकसद भविष्य में इजराइली पुलिस और प्रशासन के लिए वहां स्थायी नियंत्रण स्थापित करने का रास्ता तैयार करना है। यह चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसा होता है, तो इस्लामिक वक्फ की प्रशासनिक भूमिका धीरे-धीरे खत्म हो सकती है, और इजराइल असल में अपनी एक समानांतर प्रशासनिक बॉडी स्थापित कर सकता है। यह एक ऐसा कदम होगा जो दशकों पुराने अंतरराष्ट्रीय “स्टेटस क्वो” समझौते का सीधा उल्लंघन करेगा और क्षेत्र में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और भड़का सकता है।

  • यह कदम वक्फ की स्वायत्तता को चुनौती देता है।
  • इससे अल-अक्सा परिसर में मुस्लिम उपस्थिति पर असर पड़ सकता है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए।

अल-अक्सा मस्जिद: इतिहास और वर्तमान की जटिलता

करीब 1.44 लाख वर्ग मीटर में फैला अल-अक्सा परिसर पूर्वी यरुशलम के पुराने शहर में स्थित है। यह केवल एक मस्जिद नहीं, बल्कि मस्जिदों, मदरसों, प्रार्थना स्थलों, गुंबदों और ऐतिहासिक संरचनाओं का एक विशाल और पवित्र समूह है। यह स्थल न केवल मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यहूदियों के लिए भी पवित्र है, जो इसे टेम्पल माउंट कहते हैं। इसी वजह से यहां की संवेदनशीलता हमेशा चरम पर रहती है। दशकों पुराने अंतरराष्ट्रीय स्टेटस क्वो समझौते के तहत, इस परिसर का प्रशासन और रखरखाव मुस्लिम संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में है, जिसमें जॉर्डन की भूमिका केंद्रीय है। यह समझौता शांति बनाए रखने और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

जॉर्डन और मुस्लिम देशों से सख्त कार्रवाई की मांग

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 1967 में पूर्वी यरुशलम पर इजराइल के कब्जे के बाद से, इस पवित्र स्थल के प्रबंधन की जिम्मेदारी जॉर्डन द्वारा नियुक्त यरुशलम इस्लामिक वक्फ निभाता रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में वक्फ अधिकारियों ने कई बार आरोप लगाए हैं कि इजराइली प्रतिबंधों की वजह से उनके कर्मचारियों के लिए परिसर में प्रवेश करना और नियमित मरम्मत के काम करना मुश्किल हो रहा है। ये प्रतिबंध अक्सर अनावश्यक सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर लगाए जाते हैं, जिससे परिसर की ऐतिहासिक और धार्मिक इमारतों का रखरखाव बाधित होता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिस्तीनी संगठन का कहना है कि हालिया इजराइली कदमों के दूरगामी और विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने जॉर्डन से केवल बयान जारी करने के बजाय अल-अक्सा मस्जिद की सुरक्षा के लिए ठोस और निर्णायक रणनीति अपनाने की मांग की है। संगठन ने इस बात पर जोर दिया है कि सिर्फ कड़े शब्दों में निंदा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को मजबूती से उठाना होगा। इसके साथ ही, अरब और मुस्लिम देशों से भी अपील की गई है कि वे इस मुद्दे को अल-अक्सा के भविष्य से जुड़े एक गंभीर खतरे के रूप में देखें और एकजुट होकर इजराइल पर दबाव बनाएं। अल-जज़ीरा जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स भी इस मुद्दे पर लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं, जिससे इसकी वैश्विक गंभीरता उजागर होती है।

यह संकट न सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा है, बल्कि लाखों लोगों की धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा है। अल-अक्सा मस्जिद का भविष्य अब एक चौराहे पर खड़ा है, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से उम्मीद की जा रही है कि वे इस पवित्र स्थल की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएं। इस संवेदनशील मुद्दे पर अधिक जानकारी के लिए, आप हमारे [INTERNAL_LINK_HOLDER] पढ़ सकते हैं।

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