Wednesday, November 4

क्या आपके बच्चे भी इस दिवाली दिल्ली-NCR में त्योहार मनाने वाले है ?? अगर हां, तो हो जाइए सावधान ! रोशनी और खुशियों के इस त्योहार से पहले ही दिल्ली की हवा जहरीली हो चुकी है। AQI 330 के पार पहुंच चुका है और कई इलाकों में प्रदूषण गंभीर स्तर पर है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ना लाजिमी है। पराली का धुआं, वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण और दिवाली पर ग्रीन पटाखों की सीमित छूट के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिल्ली की हवा बच्चों के त्योहार का मजा किरकिरा कर सकती है? दिवाली से पहले ही जब हालात इतने खराब हैं, तो त्योहार के बाद सांसों पर संकट कितना गहरा होगा?

दिल्ली की जहरीली हवा के लिए अब केवल स्थानीय प्रदूषण या पंजाब-हरियाणा में जलने वाली पराली को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा है। राजधानी की हवा बिगड़ने के पीछे सीमापार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खेतों में लगने वाली आग भी एक बड़ा चर्चा का विषय बन गई है। अक्टूबर के आखिरी दिनों में पाकिस्तान के पंजाब में खेतों में आग लगने की घटनाओं में तेजी आई। इसके बाद लाहौर से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है। सवाल यह है कि क्या सीमापार जल रहे खेतों का धुआं भी दिल्ली की हवा को जहरीला बनाने में योगदान दे रहा है?

नासा के सैटेलाइट डेटा (FIRMS) पर आधारित आंकड़ों के अनुसार, 1 से 29 अक्टूबर के बीच पाकिस्तान के पंजाब में आग लगने की 13,241 घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं, इसी अवधि में भारतीय पंजाब में ऐसी 3,158 घटनाएं सामने आईं। आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान के पंजाब में दर्ज फायर डिटेक्शन की संख्या भारतीय पंजाब से करीब 4.2 गुना अधिक रही। हालांकि, सैटेलाइट से मिले फायर डिटेक्शन को सीधे पराली जलाने की घटनाओं के बराबर नहीं माना जा सकता, लेकिन ये क्षेत्र में आग की व्यापकता का संकेत जरूर देते हैं।

पाकिस्तान के पंजाब में खेतों में आग की 13,241 घटनाएं, भारतीय पंजाब में 3,158 मामले दर्ज; पराली, वाहनों और निर्माण की धूल के बीच दिल्ली-NCR में प्रदूषण का संकट गहराया

लाहौर में AQI 500 के पार, दिल्ली की हवा भी बिगड़ी

अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा। लाहौर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 500 के पार पहुंचने की खबरें सामने आईं। इसी दौरान दिल्ली-एनसीआर की हवा भी तेजी से खराब होने लगी। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी दिशा से चलने वाली हवाएं क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषकों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा सकती हैं। हालांकि, दिल्ली के प्रदूषण में पाकिस्तान से आए धुएं का वास्तविक योगदान कितना है, इसे लेकर वैज्ञानिक आकलन जरूरी है।

आठ साल का सबसे साफ अक्टूबर, फिर अचानक बिगड़े हालात

दिल्ली में अक्टूबर महीने की शुरुआत अपेक्षाकृत राहत भरी रही थी। इस साल राजधानी ने आठ वर्षों में सबसे साफ अक्टूबर दर्ज किया और महीने का औसत AQI 167 रहा। 30 अक्टूबर को बारिश के बाद वायु गुणवत्ता में और सुधार हुआ तथा AQI घटकर 60 तक पहुंच गया था। लेकिन नवंबर की शुरुआत होते ही तस्वीर बदल गई।

2 नवंबर को दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई। मंगलवार को औसत AQI करीब 330 दर्ज किया गया, जबकि कम से कम तीन निगरानी केंद्रों पर यह 400 के पार चला गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, 301 से 400 तक AQI बेहद खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में आता है।

दिल्ली में GRAP-II लागू, प्रदूषण रोकने के लिए बढ़ेगी सख्ती

प्रदूषण में अचानक आई तेजी के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू किया गया। इसके तहत सड़कों पर पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल, निर्माण स्थलों की निगरानी और धूल नियंत्रण के उपायों को तेज किया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि स्थानीय स्तर पर होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।

दिल्ली की समस्या केवल पराली के धुएं तक सीमित नहीं है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और मौसम में बदलाव भी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। हवा की रफ्तार कम होने और तापमान गिरने से प्रदूषक वातावरण में जमा रहने लगते हैं।

दिवाली पर ग्रीन पटाखों की छूट, प्रदूषण को लेकर बढ़ी चिंता

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली 2026 के लिए दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध में अस्थायी राहत देते हुए केवल CSIR-NEERI से स्वीकृत ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी है। अदालत के निर्देश के मुताबिक, 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक रहेगी। 9 नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू हो जाएगा।

हालांकि ग्रीन पटाखों से सामान्य पटाखों की तुलना में प्रदूषण कम होने का दावा किया जाता है, लेकिन इन्हें प्रदूषण मुक्त नहीं माना जा सकता। ऐसे में पहले से खराब हवा के बीच दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी प्रदूषण का अतिरिक्त दबाव बढ़ा सकती है।

सीमापार की आग से लेकर स्थानीय धुएं तक, चुनौती बड़ी

दिल्ली के सामने अब प्रदूषण से निपटने की चुनौती केवल अपने शहर या राज्यों तक सीमित नहीं रह गई है। पाकिस्तान के पंजाब में आग की घटनाएं, भारत के पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की समस्या तथा राजधानी के भीतर वाहनों और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाला प्रदूषण, सभी मिलकर हालात को जटिल बना रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि दिवाली से पहले ही जब दिल्ली का AQI 330 के आसपास पहुंच चुका है, तो त्योहार के दौरान और उसके बाद हवा की गुणवत्ता किस दिशा में जाएगी। हालांकि इसका सटीक अनुमान मौसम और प्रदूषण के स्रोतों पर निर्भर करेगा, लेकिन इतना तय है कि दिल्ली को राहत दिलाने के लिए केवल पटाखों पर पाबंदी या सड़कों पर पानी का छिड़काव पर्याप्त नहीं होगा। प्रदूषण के हर स्रोत पर एक साथ और लगातार नियंत्रण करना जरूरी है।

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