Wednesday, September 9

रांची: राजधानी रांची में भूजल के लगातार गिरते स्तर को देखते हुए नगर निगम ने बोरिंग को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। अब घर में ट्यूबवेल या बोरवेल कराने के लिए मनमाने तरीके से बोरिंग नहीं कराई जा सकेगी। घरेलू उपयोग के लिए अधिकतम 4 इंच व्यास की बोरिंग की ही अनुमति मिलेगी और काम शुरू कराने से पहले नगर निगम से अनुमति लेना जरूरी होगा।

नगर निगम ने साफ किया है कि बिना अनुमति बोरिंग कराने पर कार्रवाई की जाएगी। मामले के अनुसार आवासीय बोरिंग पर 25 हजार रुपये तक और व्यावसायिक बोरिंग पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर बोरिंग को सील भी किया जाएगा।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग के बिना नहीं मिलेगी अनुमति

नगर निगम ने बोरिंग की अनुमति को अब वर्षाजल संचयन से भी जोड़ दिया है। जिन भवनों में अभी रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था नहीं है, वहां पहले इसकी व्यवस्था करनी होगी। इसके बाद ही 4 इंच बोरिंग की अनुमति दी जाएगी।

नगर निगम के मुताबिक शहर में रिग मशीनों और वाहनों के जरिए लगातार बोरिंग होने से भूजल का स्तर नीचे जा रहा है। इसका असर खासकर गर्मी के दिनों में दिखाई देता है, जब कई इलाकों में पानी की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकने के लिए बोरिंग को नियंत्रित करना जरूरी है।

बोरिंग की गहराई भी होगी नियंत्रित

घरेलू उपयोग के लिए बोरिंग की अधिकतम गहराई भी संबंधित इलाके के भूगर्भ जलस्तर को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। बोरिंग कराने के बाद उसकी गहराई और उस समय के जलस्तर की जानकारी भी नगर निगम को देनी होगी।

अनुमति के लिए आवेदक को पहचान पत्र, होल्डिंग रसीद, जीपीएस फोटो और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। खास बात यह है कि बोरिंग सिर्फ निजी जमीन पर ही कराई जा सकेगी। सरकारी जमीन, सड़क, नदी या नाले पर बोरिंग की अनुमति नहीं होगी। ऐसे मामलों में भवन मालिक के खिलाफ कार्रवाई के साथ बोरिंग को सील किया जा सकता है।

अनुमति मिलने के 15 दिन के अंदर करानी होगी बोरिंग

नगर निगम ने अनुमति की वैधता को लेकर भी समय सीमा तय की है। अनुमति मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर बोरिंग कराना अनिवार्य होगा। तय अवधि में काम शुरू नहीं कराने पर अनुमति अपने आप रद्द मानी जाएगी। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में 15 दिन के बाद भी अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।

आवासीय बोरिंग के लिए 2500 से 5000 रुपये शुल्क

नए नियमों के तहत बोरिंग की अनुमति के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया है। 5,000 वर्गफीट तक के आवासीय भवन के लिए 2,500 रुपये और इससे अधिक क्षेत्रफल वाले भवन के लिए 5,000 रुपये शुल्क देना होगा।

वहीं व्यावसायिक भवनों के लिए 1,000 वर्गफीट तक 10 हजार रुपये शुल्क निर्धारित है। 1,000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल होने पर 10 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से शुल्क लिया जाएगा।

बिना अनुमति बोरिंग पर भारी जुर्माना

नियमों में सबसे कड़ा प्रावधान बिना पूर्व अनुमति बोरिंग कराने को लेकर किया गया है। अगर कोई आवासीय भवन मालिक बिना अनुमति बोरिंग कराता है तो उस पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं व्यावसायिक बोरिंग के मामले में यह जुर्माना एक लाख रुपये तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा नगर निगम बोरिंग को सील करने की कार्रवाई भी कर सकता है।

नगर आयुक्त ने लोगों से नियम मानने की अपील की

नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि बोरिंग को लेकर नगर निगम के नए नियम प्रभावी हैं और लोगों को इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति बोरिंग कराने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर जुर्माना लगाने के साथ बोरिंग को सील भी किया जा सकता है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि बोरिंग कराने से पहले नगर निगम से अनुमति जरूर लें और भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था को प्राथमिकता दें। नगर निगम का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य बोरिंग पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं, बल्कि भूजल के अनियंत्रित इस्तेमाल को नियंत्रित करना और राजधानी के जलस्रोतों को सुरक्षित रखना है।

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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