Tuesday, September 22

JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर गुरुवार को रांची में निकाला गया छात्रों का विधानसभा मार्च उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक युवक ने स्याही फेंक दी। घटना के बाद कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हालांकि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को मौके से हिरासत में ले लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने यह कदम किस उद्देश्य से उठाया और क्या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका है।

हजारों छात्रों ने विधानसभा की ओर किया मार्च

छात्रों का यह मार्च जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होकर विधानसभा की ओर बढ़ा। इसमें झारखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचे बड़ी संख्या में छात्र और अभ्यर्थी शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां, बैनर और तिरंगा लेकर भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। उनकी की मुख्य मांग थी कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाई जाए और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

झारखंड के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचीं नेहा बोरा

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के मुद्दों को लेकर सक्रिय रही हैं। झारखंड में चल रहे आंदोलन को समर्थन देने के लिए वह विशेष रूप से रांची पहुंची थीं। उन्होंने कहा  “भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय हैं। जब तक परीक्षा व्यवस्था में ठोस और पारदर्शी सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक छात्रों का आंदोलन जारी रहेगा।

घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

स्याही फेंकने की घटना के बाद मार्च स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इतनी बड़ी रैली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने के बावजूद इस तरह की घटना कैसे हो गई।
बताया जा रहा है कि आंदोलन को देखते हुए झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच पहले से अलर्ट थी और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था। इसके बावजूद घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘आंदोलन रुकेगा नहीं ‘

घटना के बाद भी आंदोलनकारी छात्रों ने साफ कहा कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी एक संगठन या नेता की नहीं, बल्कि उन हजारों अभ्यर्थियों की है जो निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती प्रक्रिया चाहते हैं।
छात्रों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं आंदोलन को कमजोर नहीं करेंगी, बल्कि उनकी एकजुटता को और मजबूत करेंगी।

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