Tuesday, October 13

प्रदेश अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष ने किया था हरमू चौक का चुनाव

अब केवल बयानबाजी…सीधे पीएम नरेंद्र मोदी की भावनाओं से खिलवाड़

झारखंड भाजपा के नेताओं ने पार्टी पर कालिख पोत कर रख दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े विकसित भारत संकल्प सेवा का बोर्ड हरमू चौक पर 24 घंटे भी नहीं टिक सका। भाजपा सूत्रों की मानें तो हरमू चौक का चुनाव प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और महानगर अध्यक्ष वरुण साहू ने किया था। अब बोर्ड उखाड़े जाने के बाद दोनों नेताओं का कोई बयान सामने नहीं आ रहा। राज्य की जनता को लग रहा है कि बोर्ड लगाने की प्रक्रिया की केवल रील बनाने, फोटो खिंचवाने और दिल्ली को खुश करने के लिए की गई थी।

सियासी पारा केवल बयानों में सिमटा

राजधानी रांची के प्रमुख हरमू चौक पर राजनीतिक सरगर्मी उस वक्त अचानक चरम पर पहुंच गई, जब भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगाए गए ‘विकसित भारत संकल्प सेवा चौक’ के नए बोर्ड को महज 24 घंटे के भीतर ही हटा दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद झारखंड के राजनीतिक गलियारों में भारी भूचाल आ गया लेकिन बयानों में ही सिमटकर दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। इस वाकये ने शहर के चौक-चौराहों के नामकरण और राजनीतिक प्रतीकों की जंग को एक बार फिर से गर्मा दिया है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

​प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और संकल्प से जुड़ा था मामला

​इस पूरे आयोजन की पृष्ठभूमि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के ऐतिहासिक 25 वर्ष पूरे होने और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ी थी। इसी विजन को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष ने विशेष रूप से हरमू चौक का चुनाव किया था। योजना के तहत इस चौक का नाम प्रतीकात्मक रूप से बदलकर ‘विकसित भारत संकल्प सेवा चौक’ किया गया और वहाँ बाकायदा एक भव्य बोर्ड भी लगाया गया था। पार्टी का उद्देश्य जनता के बीच इस संदेश को ले जाना था, लेकिन बोर्ड के इतनी जल्दी उखाड़े जाने से पूरी योजना विवादों के घेरे में आ गई है और भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

​भाजपा का कांग्रेस पर सीधा हमला: ‘भारत’ शब्द से नफरत का आरोप

​इस घटना के बाद भाजपा ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। भाजपा नेताओं ने इस पूरे प्रकरण के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके शीर्ष नेतृत्व को ‘भारत’ शब्द से ही नफरत है। संदीप वर्मा के अनुसार, इस प्रकार की हरकतें उनकी संकुचित मानसिकता और भारत-विरोधी सोच को स्पष्ट रूप से उजागर करती हैं। भाजपा का यह भी स्पष्ट आरोप है कि यह केवल एक बोर्ड को उखाड़ने की मामूली घटना नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं, उनके समर्पण और देश के विकास के विजन के साथ सीधा खिलवाड़ है।

अनधिकृत नामकरण और कांग्रेस की कड़ी आपत्ति

​इस विवाद के दूसरे पहलू पर गौर करें तो कांग्रेस पार्टी ने इस नामकरण पर पहले ही कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। कांग्रेस का तर्क था कि किसी भी सार्वजनिक चौक या स्थल का नाम इस तरह से एकतरफा और बिना किसी प्रशासनिक प्रक्रिया या स्थानीय निकाय की अनुमति के राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं बदला जा सकता। विपक्षी दल का यह मानना रहा है कि भाजपा इस तरह के कृत्यों के जरिए सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों का राजनीतिकरण कर रही है और जनता का ध्यान मूल स्थानीय मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस ने इस बोर्ड को हटाए जाने को प्रशासनिक नियमों की जीत और भाजपा के मनमाने रवैये की हार करार दिया है।

झारखंड की राजनीति में बढ़ते टकराव के नए आयाम

​रांची के हरमू चौक पर हुई यह घटना झारखंड की वर्तमान राजनीतिक संस्कृति की बानगी पेश करती है, जहां अब शहर के चौराहों, गोलंबरों और प्रतीकों पर भी वैचारिक और राजनीतिक आधिपत्य की लड़ाई लड़ी जाने लगी है। एक तरफ भाजपा इसे राष्ट्र निर्माण, सेवा और प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान से जोड़कर इसे एक बड़ा जनहित का मुद्दा बना रही है, वहीं विपक्ष इसे नियमों की धज्जियां उड़ाने और सत्ता के राजनीतिक उपयोग का मामला बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड के राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्माने का काम करेगा, क्योंकि दोनों ही दल इस मामले में एक-दूसरे को घेरने का कोई मौका छोड़ते नजर नहीं आ रहे हैं।

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