Wednesday, November 4

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में परामर्शदात्री समिति की बैठक में शामिल हुए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ; स्वदेशी हथियार, AI, ड्रोन और तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन पर हुई चर्चा

रांची/जैसलमेर। भारतीय सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाई देने की दिशा में केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ समेत लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों तथा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य विषय भारतीय सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण रहा। इसमें वर्ष 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल करने पर विशेष चर्चा हुई।

बैठक में देश की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध की बदलती रणनीतियों, आधुनिक सैन्य तकनीक और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। साथ ही भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत बनाने तथा तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।

रक्षा आधुनिकीकरण के लिए 2029 तक बड़ा लक्ष्य

बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारतीय सेनाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित, आत्मनिर्भर और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाना है। उन्होंने वर्ष 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सैन्य आधुनिकीकरण केवल नए हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है। इसके लिए स्वदेशी अनुसंधान, तकनीकी क्षमता, मजबूत सैन्य संरचना और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने और देश में ही अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण पर बल दिया।

आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा : संजय सेठ

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर रहा है। रक्षा उत्पादन में लगातार वृद्धि और निर्यात में विस्तार इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा विनिर्माण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारतीय सेनाओं का तकनीकी रूप से आधुनिक, सामरिक रूप से सक्षम और स्वदेशी संसाधनों से सुसज्जित होना समय की आवश्यकता है। इसके लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), निजी उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

AI, ड्रोन और साइबर सुरक्षा जैसी तकनीकों पर जोर

बैठक में आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इसमें अगली पीढ़ी के हथियारों और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसी तकनीकों के विस्तार पर जोर दिया गया।

इसके अलावा थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त संचालन क्षमता मजबूत करने, स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने और रक्षा योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर भी विचार किया गया।

आधुनिक सैन्य जरूरतों के अनुरूप ‘असनी’, ‘भैरव’ और ‘शक्तिबाण’ प्लाटून की भूमिका तथा नई सैन्य संरचनाओं के विकास पर भी चर्चा हुई।

रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़, उत्पादन पहुंचा 1.78 लाख करोड़

बैठक में रक्षा क्षेत्र में देश की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इसमें रक्षा आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वहीं, रक्षा उत्पादन वर्ष 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहां रक्षा निर्यात 2,000 करोड़ रुपये से कम था, वहीं अब यह लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

सांसदों ने भी दिए सुझाव

बैठक में मौजूद सांसदों ने भारतीय सशस्त्र सेनाओं को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप और अधिक सक्षम बनाने के लिए अपने सुझाव रखे। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय समेत रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में हुई चर्चा से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार का जोर सैन्य आधुनिकीकरण के साथ रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने पर है। वर्ष 2029 तक निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करना भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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