Saturday, October 31

सोना-चांदी से लेकर झाड़ू, बर्तन और धनिया खरीदने तक की है परंपरा; जानिए कम बजट में क्या खरीदना होगा शुभ, भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा का सही समय

रांची: दीपावली की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बाजारों में सोने-चांदी के आभूषणों, बर्तनों, सजावटी सामान और पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ने लगी है। दीपावली से पहले मनाया जाने वाला धनतेरस इस बार 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में धनतेरस को धन, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा सबसे ज्यादा प्रचलित है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शुभ खरीदारी के लिए सोना या चांदी खरीदना जरूरी है। पीतल, तांबे और स्टील के बर्तन, नई झाड़ू, साबुत धनिया और मिट्टी के दीये जैसी चीजें भी परंपरागत रूप से खरीदी जाती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस बार धनतेरस पर खरीदारी की योजना बना रहे हैं तो जान लीजिए पर्व की सही तारीख, रांची का पूजा मुहूर्त और किन चीजों को खरीदना शुभ माना जाता है।

1. कब है धनतेरस 2026? जानिए त्रयोदशी तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जाएगा।

धनतेरस की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह लगभग 10:47 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि और प्रदोष काल में त्रयोदशी की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए 6 नवंबर को ही धनतेरस मनाया जाएगा।

धनतेरस 2026 की प्रमुख जानकारी:

  • पर्व: धनतेरस या धनत्रयोदशी
  • तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
  • पूजा का समय: शाम 5:39 बजे से 7:37 बजे तक (रांची)

2. रांची में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

धनतेरस की शाम को प्रदोष काल में माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार रांची में इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 39 मिनट से रात 7 बजकर 37 मिनट तक रहेगा।

इस दौरान भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जा सकती है।

रांची का पूजा मुहूर्त:

  • धनतेरस पूजा: शाम 5:39 से 7:37 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 5:08 से 7:42 बजे तक
  • वृषभ काल: शाम 5:39 से 7:37 बजे तक

धनतेरस पर स्थिर लग्न में पूजा करना शुभ माना जाता है। इसी कारण प्रदोष काल के दौरान आने वाले वृषभ लग्न को विशेष महत्व दिया जाता है।

ध्यान रखें कि पूजा का मुहूर्त शहर के अनुसार बदलता है। रांची का समय जमशेदपुर, धनबाद या दिल्ली के समय से कुछ मिनट अलग हो सकता है।

3. धनतेरस पर क्या-क्या खरीदना माना जाता है शुभ?

धनतेरस पर खरीदारी को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और पारंपरिक रीति-रिवाज हैं। माना जाता है कि इस दिन नई वस्तुएं घर लाने से सुख-समृद्धि का प्रतीकात्मक स्वागत होता है। आइए जानते हैं कौन-सी चीजें खरीदी जा सकती हैं।

सोना खरीदना

धनतेरस पर सोना खरीदना सबसे लोकप्रिय परंपराओं में से एक है। इस दिन लोग सोने के सिक्के, अंगूठी, चेन, कंगन और अन्य आभूषण खरीदते हैं। कई परिवार मां लक्ष्मी के चित्र वाले सोने के सिक्के भी खरीदकर दीपावली की पूजा में रखते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सोना समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। अगर आपका बजट कम है तो बड़ी ज्वेलरी खरीदने की जरूरत नहीं है। छोटा सोने का सिक्का या अपनी क्षमता के अनुसार कोई आभूषण भी खरीदा जा सकता है।

चांदी खरीदना

सोने के बाद धनतेरस पर चांदी खरीदने की भी विशेष परंपरा है। इस दिन चांदी के सिक्के, पायल, बिछिया, कटोरी, चम्मच और छोटे बर्तन खरीदे जाते हैं।

चांदी के सिक्के पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आकृति बनी हो तो कई परिवार उन्हें दीपावली की पूजा में शामिल करते हैं।

जो लोग सोना नहीं खरीदना चाहते या जिनका बजट कम है, उनके लिए चांदी एक विकल्प हो सकती है।

पीतल और तांबे के बर्तन

धनतेरस पर बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से इस दिन धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा जुड़ी हुई है।

आप अपनी जरूरत के अनुसार ये चीजें खरीद सकते हैं:

  • पीतल का लोटा या थाली
  • तांबे का कलश
  • स्टील की थाली और कटोरी
  • पानी रखने का नया बर्तन
  • रसोई के लिए नया पतीला या अन्य बर्तन

नई खरीदी गई वस्तु को घर लाने के बाद उसमें चावल, अनाज या पानी भरने की परंपरा भी कई परिवारों में है। इसे घर में अन्न और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

नई झाड़ू खरीदना

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी एक पुरानी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को घर की सफाई और नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि साफ-सुथरे घर में मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। इसलिए कई परिवार धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदते हैं।

यह कम खर्च में निभाई जाने वाली परंपरागत खरीदारी भी है।

साबुत धनिया खरीदना

धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने और उसकी पूजा करने की परंपरा भी कई परिवारों में है। इसे खेती, अनाज, वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

कुछ परिवार धनिया को मां लक्ष्मी के सामने अर्पित करते हैं और पूजा के बाद इसे अपनी तिजोरी या अनाज रखने की जगह पर रखते हैं। कुछ लोग इसे मिट्टी में बोने की परंपरा भी निभाते हैं।

मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति

धनतेरस पर कई लोग दीपावली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदते हैं।

मिट्टी, पीतल, चांदी या अन्य धातु की मूर्तियां अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदी जा सकती हैं। दीपावली की लक्ष्मी पूजा में इनकी पूजा की जाती है।

मिट्टी के दीये और पूजा सामग्री

धनतेरस पर मिट्टी के दीये, कलश, रोली, अक्षत, फूल, धूप, कपूर और पूजा की अन्य सामग्री खरीदना भी शुभ माना जाता है।

दीपावली से पहले घर को सजाने और पूजा की तैयारी के लिए इन वस्तुओं की खरीदारी की जाती है।

 

4. कम बजट में धनतेरस पर क्या खरीदें?

धनतेरस पर खरीदारी करने के लिए सोना-चांदी खरीदना अनिवार्य नहीं है। अगर आपका बजट कम है तो भी आप परंपरा के अनुसार कुछ छोटी चीजें खरीद सकते हैं।

बजट/पसंद क्या खरीद सकते हैं
कम बजट मिट्टी के दीये, झाड़ू, साबुत धनिया
सामान्य बजट स्टील या पीतल के बर्तन
मध्यम बजट चांदी का छोटा सिक्का या चांदी का दीया
अधिक बजट सोने का सिक्का या आभूषण

धनतेरस का उद्देश्य अपनी क्षमता से अधिक खर्च करना नहीं है। अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर खरीदारी करना बेहतर है।

5. धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने का शुभ समय

धनतेरस के दिन खरीदारी के लिए कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त बताए जाते हैं। रांची के लिए उपलब्ध पंचांग आधारित गणना में 6 नवंबर को कुछ अनुकूल खरीदारी के समय इस प्रकार हैं:

  • सुबह 11:32 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक
  • दोपहर 3:44 बजे से शाम 5:08 बजे तक
  • रात 8:20 बजे से 9:56 बजे तक

सुबह 10:08 बजे से 11:32 बजे तक राहुकाल बताया गया है। जो लोग चौघड़िया के अनुसार खरीदारी करना चाहते हैं, वे इस अवधि को छोड़कर अन्य अनुकूल समय चुन सकते हैं।

ये समय रांची के लिए प्रकाशित पंचांग आधारित गणना हैं। अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

6. धनतेरस पर क्या खरीदने से बचते हैं?

कुछ धार्मिक और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन कुछ वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये सभी जगह एक समान लागू धार्मिक नियम नहीं हैं।

लोहे की वस्तुएं: कई परिवार धनतेरस पर लोहे की वस्तुएं खरीदने से बचते हैं। इसे कुछ परंपराओं में शुभ नहीं माना जाता।

चाकू और कैंची: कुछ घरों में चाकू, कैंची और अन्य धारदार सामान खरीदने से परहेज किया जाता है। इसके पीछे प्रतीकात्मक धार्मिक मान्यता है।

कांच की वस्तुएं: कुछ परिवार इस दिन कांच के बर्तन या सजावटी सामान खरीदने से बचते हैं।

उधार लेकर खरीदारी: अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने या केवल परंपरा निभाने के लिए कर्ज लेकर खरीदारी करने से बचना चाहिए।

इन मान्यताओं का पालन परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इन्हें अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं समझना चाहिए।

7. धनतेरस पर यम दीपदान का क्या महत्व है?

धनतेरस के दिन भगवान यम के नाम से दीपदान करने की भी परंपरा है। इसे यम दीपम कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाया जाता है। इसे परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना से जोड़ा जाता है।

कई परिवार मिट्टी के दीपक में सरसों का तेल डालकर चार बत्तियां जलाते हैं। हालांकि, दीपदान की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है।

रांची में 6 नवंबर को सूर्यास्त के बाद दीपदान किया जा सकता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार सूर्यास्त लगभग शाम 5:07 बजे है।

8. धनतेरस क्यों मनाया जाता है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है।

इसी वजह से धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन लोग अच्छे स्वास्थ्य, परिवार की खुशहाली और आर्थिक समृद्धि की कामना करते हैं।

इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी तथा भगवान कुबेर को धन का अधिपति माना जाता है।

धनतेरस के साथ ही दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत होती है। इसके बाद छोटी दीपावली, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है।

खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल शुभ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि सामान की शुद्धता और कीमत भी जांचें।

  • सोने के आभूषण पर BIS हॉलमार्क और छह अंकों का HUID कोड जरूर जांचें।
  • चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता और वजन की जानकारी लें।
  • खरीदारी का पक्का बिल जरूर लें।
  • मेकिंग चार्ज और GST की जानकारी पहले ही पूछ लें।
  • बजट के अनुसार खरीदारी करें और अनावश्यक कर्ज लेने से बचें।

 

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