Friday, October 23

रांची: झारखंड में चिकित्सक संगठनों और राज्य सरकार के बीच हुई वार्ता के बाद डॉक्टरों का चरणबद्ध आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। शुक्रवार शाम स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के साथ हुई बैठक में चिकित्सकों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। साथ ही, इन मांगों को लागू करने के लिए जरूरी कार्रवाई और समय-सीमा निर्धारित करने पर भी सहमति जताई गई।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड, झारखंड हेल्थ सर्विस एसोसिएशन (JHASA) और अन्य चिकित्सक संगठनों ने बैठक के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। संगठनों ने इसे लगातार संवाद और चिकित्सकों की एकजुटता का सकारात्मक परिणाम बताया। हालांकि, सहमत मांगों को धरातल पर लागू करना अब अगली महत्वपूर्ण चुनौती होगी।

क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन का रास्ता साफ

IMA झारखंड के अनुसार, चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण से जुड़े क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (CEA) में जरूरी संशोधन की मांग स्वीकार की गई है। इस संबंध में अगले दो महीने के भीतर संशोधन प्रस्ताव मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजने पर सहमति बनी।

अस्पतालों में न्यूनतम बिस्तरों की अनिवार्यता के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 30 और शहरी क्षेत्रों के लिए 40 बिस्तरों की व्यवस्था पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक बनाना है।

समयबद्ध पदोन्नति पर भी होगी पहल

चिकित्सकों की पदोन्नति से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार और बिहार में लागू प्रासंगिक प्रावधानों के आधार पर व्यवस्था तैयार करने पर सहमति बनी। इसके तहत सामान्य चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों और दोनों संवर्गों के विशेषज्ञ चिकित्सकों को डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) के अनुरूप लाभ देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

इस मामले में वित्त विभाग के साथ बैठक कर आवश्यक समाधान निकालने की बात भी तय हुई है।

डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए DSP स्तर के अधिकारी होंगे नोडल

चिकित्सकों की सुरक्षा से जुड़ी मांग पर पूर्व में लागू व्यवस्था को फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके तहत पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारी को नोडल पदाधिकारी नामित करने की व्यवस्था बहाल की जाएगी। इसका उद्देश्य चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

इसके अलावा, ट्रेनी रिजर्व पोस्ट (TRP) पर गए चिकित्सकों के मामले में भी पहले लागू व्यवस्था को दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी है, जिससे उनकी सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की उम्मीद है।

महिला डॉक्टरों के अधिकार और युवा चिकित्सकों के भुगतान पर सहमति

बैठक में महिला चिकित्सकों के मातृत्व अवकाश और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी स्वीकार किया गया। वहीं, इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट चिकित्सकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनियमितताओं को दूर कर इसे नियमित करने पर सहमति बनी।

चिकित्सक संगठनों ने इन मुद्दों को स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की कार्यस्थितियों और अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है।

अस्पतालों को मिलेगी सिंगल विंडो व्यवस्था की सुविधा

चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण, प्रमाणन और अन्य जरूरी अनुमतियों की प्रक्रिया सरल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग भी स्वीकार की गई है। इससे अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों को अलग-अलग अनुमतियों के लिए विभिन्न कार्यालयों में जाने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लागू टू-टियर व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा हुई। हालांकि, इन विषयों पर अंतिम समाधान के बजाय आगे विचार-विमर्श जारी रखने पर सहमति बनी है।

मांगों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए बनेगी समन्वय समिति

सभी सहमत बिंदुओं पर कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर एक संयुक्त समन्वय समिति गठित करने पर सहमति बनी है। IMA झारखंड चाहता है कि समिति में संगठन और संबंधित चिकित्सक संगठनों की प्रभावी भागीदारी हो, ताकि सहमत मांगों पर हुई कार्रवाई की नियमित निगरानी की जा सके।

संगठन के अनुसार, फिलहाल चिकित्सक हड़ताल पर नहीं जाएंगे। छठ पर्व के बाद स्वास्थ्य विभाग के साथ फिर बैठक होगी, जिसमें शेष लंबित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

आंदोलन स्थगित, अब सहमतियों को लागू करने की बारी

चिकित्सक संगठनों ने वार्ता को सकारात्मक शुरुआत बताया है। हालांकि, आंदोलन स्थगित होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी मांगें पूरी तरह लागू हो गई हैं। कुछ बिंदुओं पर प्रस्ताव तैयार करने, मंत्रिमंडल की मंजूरी लेने और संबंधित विभागों के साथ आगे चर्चा करने की प्रक्रिया बाकी है।

IMA झारखंड ने स्पष्ट किया है कि सहमति का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा, जब तय बिंदुओं पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई होगी। फिलहाल, सरकार और चिकित्सक संगठनों के बीच संवाद जारी रखने पर सहमति के बाद आंदोलन थम गया है और सबकी नजरें आगे होने वाले क्रियान्वयन पर टिकी हैं।

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