झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की 85% सीटों पर दाखिले के लिए स्थानीय या स्थायी निवासी प्रमाण पत्र (Residential Certificate) अनिवार्य है। यानी राज्य कोटे की इन सीटों पर एडमिशन लेने वाले अभ्यर्थियों को झारखंड का डोमिसाइल प्रमाणित करना होगा।
झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) की ओर से निर्धारित नियमों के अनुसार इन सीटों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का भारत का नागरिक होना जरूरी है। हालांकि, इसके लिए अभ्यर्थियों को नागरिकता साबित करने के लिए अलग से कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। उम्मीदवारों से जन्म तिथि, जन्म स्थान और उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी ली जाती है।
17 साल की उम्र पूरी करना जरूरी
MBBS में दाखिले के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 17 वर्ष होनी चाहिए। अभ्यर्थी को प्रवेश वाले वर्ष की 31 दिसंबर तक 17 वर्ष की आयु पूरी करनी जरूरी है।
इसके साथ ही उम्मीदवार के पास झारखंड का स्थानीय या स्थायी निवासी प्रमाण पत्र होना चाहिए। JCECEB ने इसके लिए राज्य सरकार के संकल्प संख्या 3198, दिनांक 14 अगस्त 2016 को आधार बनाया है। इसी संकल्प में झारखंड के स्थानीय और स्थायी निवासियों की पहचान और उनकी पात्रता से संबंधित प्रावधान तय किए गए हैं।
एडमिशन के समय होगी प्रमाण पत्र की जांच
नियमों के अनुसार, शैक्षणिक संस्थान में दाखिले के दौरान उम्मीदवार को अपना रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रमाण पत्र की जांच सामान्य दस्तावेजों की तरह ही गंभीरता से की जाती है।
अतिरिक्त समाहर्ता कुंदन कुमार के मुताबिक, वर्ष 2016 के सरकारी संकल्प में स्थानीय निवास से जुड़े दस्तावेजों के तौर पर जमीन के रिकॉर्ड, रजिस्टर्ड डीड, राइट्स के रिकॉर्ड और भू-राजस्व रसीद जैसे दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है।
मेडिकल कॉलेज में दस्तावेजों की सख्त जांच
रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट के अलावा अभ्यर्थियों के उम्र प्रमाण पत्र, 10वीं और 12वीं के प्रमाण पत्र व मार्कशीट, NEET स्कोरकार्ड, जाति प्रमाण पत्र और दिव्यांगता प्रमाण पत्र की भी जांच की जाती है। वहीं EWS श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों के आय और संपत्ति से जुड़े प्रमाण पत्र भी सत्यापित किए जाते हैं।
फर्जी डोमिसाइल प्रमाण पत्र को लेकर चिंता
सूत्रों के मुताबिक, रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में फर्जीवाड़े की आशंका को लेकर भी चिंता बनी रहती है। वर्ष 2025 में हजारीबाग जिले के एक इलाके में जारी दो रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट जांच के दौरान फर्जी पाए जाने की बात सामने आई थी।
ऐसे मामलों को देखते हुए मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन अहम हो जाता है। खासकर राज्य कोटे की 85% MBBS सीटों पर दाखिले में उम्मीदवार का झारखंड का वैध निवासी होना महत्वपूर्ण पात्रता शर्त है।
कुल मिलाकर, झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 85% राज्य कोटा MBBS सीटों पर दाखिले के लिए सिर्फ NEET में बेहतर प्रदर्शन करना पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार को निर्धारित पात्रता पूरी करने के साथ वैध स्थानीय या स्थायी निवासी प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। एडमिशन के समय इस दस्तावेज की सख्त जांच की जाएगी।
इसे भी पढ़े – पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए फिर खुला ई-कल्याण पोर्टल, छूटे विद्यार्थियों को दोबारा आवेदन का मौका
