पश्चिम बंगाल की राजनीति और सांस्कृतिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन, उनकी सहयोगी संस्थाओं और उनसे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा। ईडी (कोलकाता ज़ोन-I) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत कोलकाता में 15 विभिन्न ठिकानों पर व्यापक तलाशी और ज़ब्ती की कार्रवाई की। यह पूरा मामला ‘मासआर्ट’ (महानिर्बान रोड मासआर्ट) सोसाइटी द्वारा दुर्गा पूजा के ‘प्रिव्यू शो’ के आयोजन में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर की गई वित्तीय अनियमितताओं, यूनेस्को (UNESCO) के नाम पर फर्जीवाड़े और सरकारी टेंडरों में धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।
यूनेस्को के नाम पर फर्जीवाड़ा: आस्था और परंपरा को बनाया कमाई का जरिया
दुर्गा पूजा बंगाल की संस्कृति, पहचान और आस्था का प्रतीक है। यूनेस्को द्वारा कोलकाता की दुर्गा पूजा को ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage) का दर्जा दिया गया है। आरोप है कि इस वैश्विक सम्मान की आड़ में जनता की आस्था का शोषण किया गया और इसे एक निजी व्यावसायिक उद्यम में बदल दिया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने खुद को यूनेस्को से प्रायोजित और मान्यता प्राप्त संस्था के रूप में गलत तरीके से पेश किया। मासआर्ट सोसाइटी के माध्यम से कोलकाता के 24 प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में ‘प्रिव्यू शो’ देखने के नाम पर आम जनता से 1,749 रुपये से लेकर 5,499 रुपये तक के महंगे टिकट बेचे गए। वर्ष 2023 और 2024 के दौरान ही एक लाख से अधिक टिकट जारी किए गए। यूनेस्को के आधिकारिक नाम, लोगो और साख (Goodwill) का अनधिकृत और भ्रामक उपयोग करके करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई। इस प्रकार एकत्र की गई भारी-भरकम राशि का गबन बैंक खातों से नकद निकासी के जरिए या फर्जी विविध खर्चों (miscellaneous expenses) के नाम पर किया गया।
बोबाज़ार एफआईआर और प्राथमिकी का आधार
ईडी की इस कार्रवाई की नींव कोलकाता पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत बोबाज़ार पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर (FIR) पर आधारित है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 316(2), 318(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2), और 61(2) के तहत दर्ज की गई थी।
यह मामला शिकायतकर्ता श्री जयदीप मुखर्जी की लिखित शिकायत के बाद दर्ज हुआ। शिकायत में पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व राज्य मंत्री श्री इंद्रनील सेन, मासआर्ट की अध्यक्ष श्रीमती मधूच्छंदा सेन, सचिव ध्रुवज्योति बोस, उपाध्यक्ष सायंतन मैत्रा और कोषाध्यक्ष रंजन चटर्जी सहित अन्य अज्ञात व्यक्तियों को नामजद किया गया है। आरोप है कि इन सभी ने 2022 से 2025 के बीच संगठित रूप से जनता और प्रायोजकों को गुमराह किया तथा करोड़ों रुपये का वित्तीय गबन कर निजी लाभ कमाया।
85 करोड़ रुपये का टेंडर घोटाला और स्वजनों को अनुचित लाभ
जांच एजेंसियों के अनुसार, मामला केवल प्रिव्यू शो के टिकटों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार राज्य सरकार के मंत्रालयों में हुए बड़े टेंडर घोटालों से भी जुड़े हैं। इंद्रनील सेन के मंत्री कार्यकाल के दौरान पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय से 85 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कई सरकारी टेंडर उनके बेहद करीबी सहयोगियों—ध्रुवज्योति बोस और दीपेश रॉय—की संस्थाओं को आवंटित किए गए।
टेंडर प्राप्त करने वाली इन संस्थाओं ने बाद में इस धन का बड़ा हिस्सा इंद्रनील सेन के रिश्तेदारों द्वारा संचालित व नियंत्रित कंपनियों और संस्थाओं में ट्रांसफर कर दिया। इसके अलावा, जिन कंपनियों को ये टेंडर मिले थे, उनके बैंक खातों से असामान्य रूप से बड़ी मात्रा में नकद निकासी (cash withdrawals) दर्ज की गई है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करती है।
ममता बनर्जी को भुगतान का दावा और वित्तीय तार
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर मोड़ तब आया जब जांच में सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद तक वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जुड़ती दिखीं। ईडी की जांच के अनुसार, पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और उनकी व्यक्तिगत प्रोप्राइटरशिप फर्म ‘मेसर्स ऑक्टेव रिकॉर्ड्स’ (M/s Octave Records) के बैंक खातों में उनके मंत्री रहते हुए 3.8 करोड़ रुपये से अधिक की नकद राशि जमा की गई थी।
इसके अतिरिक्त, ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खाते से बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के व्यक्तिगत खाते में लगभग 30 लाख रुपये की राशि स्थानांतरित की गई। हालांकि, पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन ने जांच एजेंसियों के समक्ष यह दावा किया है कि ममता बनर्जी को हस्तांतरित किया गया यह पैसा किसी घोटाले का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी कला/संगीत कृतियों के एवज में दिया गया ‘रॉयल्टी’ का भुगतान था। बावजूद इसके, केंद्रीय जांच एजेंसियां इस तर्क की वैधता और लेन-देन की टाइमिंग की बारीकी से जांच कर रही हैं।
डिजिटल साक्ष्य, ज़ब्ती और आगे की जांच
छापेमारी के दौरान ईडी की टीमों ने विभिन्न ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेजी सबूत और कई संदिग्ध डिजिटल डिवाइस (लैपटॉप, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन आदि) जब्त किए हैं। इन सबूतों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि इस सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क और शेल कंपनियों के जाल का पर्दाफाश किया जा सके।
केंद्रीय जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि:
धोखाधड़ी और टेंडर आवंटन से अर्जित अवैध धन का निवेश किन अचल संपत्तियों, बेनामी संपत्तियों या अन्य व्यावसायिक उपक्रमों में किया गया।
इस पूरे सिंडिकेट में और कौन-कौन से प्रशासनिक अधिकारी, राजनीतिक हस्तियां या बिचौलिए शामिल हैं।
यूनेस्को के फर्जीवाड़े से प्राप्त धन को किन-किन रास्तों से होकर निकाला और खपाया गया।
दुर्गा पूजा जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील त्योहार के नाम पर इस तरह का संगठित वित्तीय घोटाला सामने आने से राज्य की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन, मासआर्ट सोसाइटी के पदाधिकारियों और पर्यटन मंत्रालय के टेंडरों से शुरू हुई यह जांच अब सीधे शीर्ष नेतृत्व के वित्तीय लेन-देन तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में बैंक खातों के फोरेंसिक ऑडिट और ज़ब्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में कई और बड़े खुलासे, सम्मन और गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।
