Tuesday, September 22

चतरा। टीपीसी के कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत के बाद अब इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बृजेश का शव सोमवार को उसके पैतृक गांव चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र स्थित लुट्टू सोहावन पहुंचा। शव पहुंचने के बाद उसके बड़े भाई और सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने मुठभेड़ की पूरी कहानी पर सवाल खड़े किए और इसे  फर्जी एनकाउंटर बताया।

पूर्व विधायक ने दावा किया कि बृजेश को पहले चतरा से पकड़ा गया और बाद में उसे उत्तर प्रदेश ले जाकर मुठभेड़ का रूप दिया गया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

पूर्व विधायक का आरोप- पहले इस्तेमाल किया, फिर मरवा दिया

गणेश गंझू ने झारखंड पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि बृजेश को पहले माओवादियों के खिलाफ इस्तेमाल किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए।

पूर्व विधायक के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि बृजेश के बारे में मिले इनपुट के आधार पर वाराणसी के रामनगर इलाके में एटीएस ने कार्रवाई की थी।

बाइक से जा रहा था बृजेश, पुलिस ने बताया- हुई थी फायरिंग

पुलिस के मुताबिक, 20 सितंबर की सुबह बृजेश गंझू अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से रामनगर इलाके से गुजर रहा था। सूचना के आधार पर यूपी एटीएस की टीम ने उसे रोकने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि इस दौरान बृजेश ने फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई हुई और वह गोली लगने से घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान एटीएस के दो पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोली लगी, हालांकि दोनों सुरक्षित रहे। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद किए जाने की भी जानकारी दी है।

फायरिंग की कहानी पर भी पूर्व विधायक ने उठाया सवाल

गणेश गंझू ने पुलिस की ओर से बताई गई फायरिंग की कहानी पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि यदि बृजेश उस समय बाइक चला रहा था, तो उसके लिए बाइक संभालते हुए दोनों हाथों से एक साथ अंधाधुंध फायरिंग करना कैसे संभव था।

इसी सवाल को आधार बनाते हुए पूर्व विधायक ने मुठभेड़ की परिस्थितियों, घटनास्थल, बरामद हथियारों और फायरिंग के पूरे घटनाक्रम की गहन जांच की मांग की है।

बृजेश पर था 30 लाख रुपये का इनाम

पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बृजेश गंझू प्रतिबंधित संगठन टीपीसी का कमांडर था। उस पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और एनआईए की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह एनआईए के कई मामलों में वांछित था।

अब उसकी मौत के बाद जहां पुलिस इसे मुठभेड़ में हुई कार्रवाई बता रही है, वहीं उसके भाई और पूर्व विधायक गणेश गंझू ने पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। ऐसे में इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच होती है या नहीं, इस पर अब सबकी नजर है।

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